21 सितंबर 2026
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सविता पूनिया बनीं भारतीय महिला हॉकी की सर्वाधिक कैप्ड खिलाड़ी, हॉकी इंडिया ने दिया ₹10 लाख का नकद पुरस्कार

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सविता पूनिया बनीं भारतीय महिला हॉकी की सर्वाधिक कैप्ड खिलाड़ी, हॉकी इंडिया ने दिया ₹10 लाख का नकद पुरस्कार

सारांश

सविता पूनिया ने जापान के काकामिगाहारा में एशियन गेम्स 2026 के दौरान वंदना कटारिया का 320 मैचों का रिकॉर्ड तोड़ा और भारतीय महिला हॉकी की सबसे कैप्ड खिलाड़ी बनीं। हॉकी इंडिया ने 'द वॉल ऑफ इंडिया' को ₹10 लाख के नकद पुरस्कार से नवाजने की घोषणा की।

मुख्य बातें

सविता पूनिया ने 21 सितंबर 2026 को एशियन गेम्स 2026 , काकामिगाहारा में इंडोनेशिया के खिलाफ मैच में भारतीय महिला हॉकी की सर्वाधिक कैप्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया।
उन्होंने वंदना कटारिया के 320 सीनियर इंटरनेशनल मैच के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
हॉकी इंडिया ने इस उपलब्धि पर सविता को ₹10 लाख के नकद पुरस्कार की घोषणा की।
सविता ने 2009 में सीनियर डेब्यू किया था; वे तीन ओलंपिक और दो एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
20 सितंबर 2026 को उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19 0 की जीत में उन्होंने 320 मैचों की बराबरी की थी।
हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने सविता को 'टीम की रीढ़' बताया।

भारतीय महिला हॉकी टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने 21 सितंबर 2026 को जापान के काकामिगाहारा में चल रहे एशियन गेम्स 2026 के दौरान इंडोनेशिया के खिलाफ पूल बी मैच में उतरते ही भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सर्वाधिक इंटरनेशनल मैच खेलने वाली खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल कर लिया। उन्होंने पूर्व स्ट्राइकर वंदना कटारिया के 320 सीनियर इंटरनेशनल मैच के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हॉकी इंडिया ने सविता को ₹10 लाख के नकद इनाम से सम्मानित करने की घोषणा की।

रिकॉर्ड की पृष्ठभूमि

20 सितंबर 2026 को एशियन गेम्स के ओपनिंग मैच में उज्बेकिस्तान के खिलाफ भारत की 19 0 की शानदार जीत के दौरान सविता ने वंदना के 320 मैचों के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। अगले ही दिन इंडोनेशिया के खिलाफ मुकाबले में मैदान पर उतरते ही उन्होंने वह रिकॉर्ड तोड़ दिया और अपने करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ा। इससे पहले सविता ने फरवरी 2025 में एफआईएच हॉकी प्रो लीग में नीदरलैंड के खिलाफ अपना 300वाँ इंटरनेशनल मैच खेला था — वंदना के बाद यह मुकाम हासिल करने वाली वे दूसरी भारतीय महिला और पीआर श्रीजेश के बाद ऐसा करने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर बनी थीं।

करियर की झलकियाँ

36 वर्षीय सविता ने 2009 में सीनियर इंटरनेशनल हॉकी में कदम रखा था। ओपन प्ले में शॉट रोकने की असाधारण क्षमता और पेनल्टी शूटआउट में शांत स्वभाव के कारण वे हॉकी जगत में 'द वॉल ऑफ इंडिया' के नाम से विख्यात हैं। अपने शानदार करियर में वे तीन ओलंपिक, दो एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच प्रो लीग जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने लंबे समय तक टीम की कप्तानी की और बाद में टीम की बागडोर सलीमा टेटे को सौंपी, लेकिन भारतीय टीम में उनकी अहमियत आज भी उतनी ही है।

सविता की भावुक प्रतिक्रिया

इंडोनेशिया के खिलाफ मैच के बाद सविता ने कहा, "मैं सबसे पहले धन्यवाद कहना चाहती हूँ — अपने परिवार, कोच, टीम के साथियों और उन सभी लोगों का, जो तब से मेरे साथ खड़े रहे हैं जब मैं एक छोटी बच्ची थी और अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर रोकना सीख रही थी। सच कहूँ तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम तक पहुँच पाऊँगी।"

उन्होंने आगे कहा, "यह रिकॉर्ड सिर्फ मेरा नहीं है — यह उन सभी का है जिन्होंने मेरे साथ खेला है, और वंदना का भी, क्योंकि उन्होंने एक स्टैंडर्ड सेट किया और हम सभी को और बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। मैं चाहती हूँ कि आने वाली युवा पीढ़ी इसे देखे और विश्वास करे कि उनके लिए भी यह मुमकिन है।"

हॉकी इंडिया की प्रतिक्रिया

हॉकी इंडिया ने इस उपलब्धि को करीब दो दशकों के अनुशासन, मेहनत और नेतृत्व का प्रमाण बताया। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, "सविता का रिकॉर्ड दो दशकों के अनुशासन और शांत नेतृत्व का सबूत है। वह इस टीम की रीढ़ रही हैं और आज का यह मुकाम पूरी तरह से उनके हक में है।" हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल भोला नाथ सिंह ने कहा, "उनका सफर हर उस युवा गोलकीपर के लिए प्रेरणा है जो भारत की जर्सी पहनने का सपना देखता है।"

वंदना कटारिया — जिनका रिकॉर्ड टूटा

जिस रिकॉर्ड को सविता ने पीछे छोड़ा, वह भारत की दिग्गज फॉरवर्ड वंदना कटारिया के नाम था। वंदना ने 2009 में सविता के साथ ही इंटरनेशनल हॉकी में कदम रखा था। उन्होंने भारत के लिए 320 मैच खेले और 158 गोल किए। अप्रैल 2025 में उन्होंने इंटरनेशनल हॉकी से संन्यास लिया। टोक्यो ओलंपिक में उनकी ऐतिहासिक हैट्रिक और पद्म श्री से सम्मान उनके करियर की अमिट पहचान है। गौरतलब है कि सविता का यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारतीय महिला हॉकी एशियन गेम्स में मजबूत प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय महिला हॉकी की उस पीढ़ी का प्रतीक है जिसने खेल को सुर्खियों से परे जाकर एक पेशेवर करियर के रूप में स्थापित किया। यह ऐसे समय में आया है जब टीम की कमान नई कप्तान सलीमा टेटे के हाथों में है — सविता की उपस्थिति अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच की उस कड़ी को दर्शाती है जो भारतीय महिला हॉकी को अगले स्तर पर ले जा सकती है। ₹10 लाख का पुरस्कार प्रतीकात्मक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय खेल प्रशासन महिला हॉकी के लिए ढाँचागत निवेश — बेहतर घरेलू लीग, स्थायी अनुबंध, खेल पश्चात करियर सहायता — में वही तत्परता दिखाएगा जो उसने पुरस्कार घोषणा में दिखाई।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सविता पूनिया ने किसका रिकॉर्ड तोड़ा और कब?
सविता पूनिया ने 21 सितंबर 2026 को जापान के काकामिगाहारा में एशियन गेम्स 2026 के दौरान इंडोनेशिया के खिलाफ मैच में भारत की पूर्व स्ट्राइकर वंदना कटारिया का 320 सीनियर इंटरनेशनल मैचों का रिकॉर्ड तोड़ा। इस तरह वे भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सर्वाधिक इंटरनेशनल मैच खेलने वाली खिलाड़ी बन गईं।
हॉकी इंडिया ने सविता पूनिया को क्या पुरस्कार दिया?
हॉकी इंडिया ने सविता पूनिया को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में ₹10 लाख के नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने इसे दो दशकों के अनुशासन और शांत नेतृत्व का प्रमाण बताया।
सविता पूनिया का अंतरराष्ट्रीय करियर कब शुरू हुआ था?
सविता पूनिया ने 2009 में सीनियर इंटरनेशनल हॉकी में डेब्यू किया था। करीब दो दशकों के करियर में वे तीन ओलंपिक, दो एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और एफआईएच प्रो लीग जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
वंदना कटारिया का करियर कैसा रहा और उन्होंने संन्यास कब लिया?
वंदना कटारिया ने 2009 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी में कदम रखा और भारत के लिए 320 मैचों में 158 गोल किए। टोक्यो ओलंपिक में उनकी ऐतिहासिक हैट्रिक और पद्म श्री से सम्मान उनके करियर की खास पहचान रही। उन्होंने अप्रैल 2025 में इंटरनेशनल हॉकी से संन्यास लिया।
सविता पूनिया को 'द वॉल ऑफ इंडिया' क्यों कहा जाता है?
ओपन प्ले में शॉट रोकने की असाधारण क्षमता और पेनल्टी शूटआउट में घबराहट रहित प्रदर्शन के कारण सविता पूनिया को हॉकी जगत में 'द वॉल ऑफ इंडिया' की उपाधि दी गई है। लंबे समय तक टीम की कप्तानी करते हुए उन्होंने भारतीय महिला हॉकी की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी की छवि बनाई।
राष्ट्र प्रेस
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