कर्नाटक सरकारी अस्पतालों में ब्लड टेस्ट फंड नहीं, दवाओं की किल्लत — BJP नेता आर. अशोक का कांग्रेस पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने 6 नवंबर 2026 को कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ब्लड टेस्ट तक के लिए फंड नहीं बचा है और खांसी की गोलियों से लेकर पैरासिटामोल जैसी जरूरी दवाओं की भी कमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक को वित्तीय दिवालियापन की कगार पर खड़ा कर दिया है।
सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा
अशोक ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल, जो गरीबों के लिए जीवनरेखा होने चाहिए, फंड की भारी कमी से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार अस्पतालों में उपकरण तो मौजूद हैं, लेकिन ब्लड टेस्ट कराने के लिए आवश्यक धनराशि नहीं है, जिससे मरीजों को निजी लैब की ओर रुख करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि कमीशन आधारित रैकेट का हिस्सा है, जहाँ सरकारी लैब बंद कर गरीब मरीजों को जानबूझकर निजी लैब की ओर धकेला जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के स्कैन तक के लिए फंड न होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के साथ घोर अन्याय है।
दवाओं की कमी और गरीबों पर बोझ
अशोक के अनुसार सरकारी अस्पतालों में पैरासिटामोल और खांसी की दवाओं जैसी बुनियादी जरूरत की चीजें भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कमी की वजह से गरीब मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जो उनकी आर्थिक हालत पर सीधा प्रहार है।
उन्होंने सवाल उठाया, 'इसके लिए जिम्मेदार कौन है? किसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए?' — और मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से सीधे जवाब माँगा।
वित्तीय संकट के व्यापक आरोप
अशोक ने स्वास्थ्य क्षेत्र से आगे बढ़कर राज्य के समग्र वित्तीय प्रबंधन पर भी निशाना साधा। उनके आरोपों के अनुसार सरकार के पास गृह लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों का भुगतान करने, परिवहन निगमों और बिजली आपूर्ति कंपनियों का बकाया चुकाने, किसानों को सूखा राहत देने, सरकारी बसों के लिए डीजल खरीदने और शोध छात्रों की फेलोशिप जारी करने तक के लिए धन नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत 45 शोध छात्रों की फेलोशिप पिछले 11 महीनों से रोकी हुई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्र कर्ज और परेशानियों में फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुप्रबंधन के कारण छात्र, किसान और परिवहन कर्मचारी — सभी मुश्किल में हैं।
सरकार पर इस्तीफे की माँग
अशोक ने आरोप लगाया, 'कांग्रेस ने राज्य के खजाने को पूरी तरह लूट लिया है, सरकार को दिवालियापन की ओर धकेल दिया है और पूरे प्रशासनिक तंत्र को नष्ट कर दिया है।' उन्होंने कांग्रेस सरकार को कर्नाटक की जनता से माफी माँगकर इस्तीफा देने की माँग की।
उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि बढ़े हुए करों और मूल्य वृद्धि के जरिए इकट्ठा किए गए करोड़ों रुपये आखिर गए कहाँ, जब स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों में फंड की कमी बनी हुई है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में विपक्ष ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाए हों — राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से यह विधानसभा में बार-बार उठाया जाने वाला मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस सरकार इन आरोपों का जवाब कब और कैसे देती है, और क्या स्वास्थ्य बजट आवंटन में कोई ठोस बदलाव आता है।