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कर्नाटक में 'गारंटी कमेटियों' पर BJP का हमला: अशोक बोले — टैक्सपेयर के पैसे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 'मलाई'

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कर्नाटक में 'गारंटी कमेटियों' पर BJP का हमला: अशोक बोले — टैक्सपेयर के पैसे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 'मलाई'

सारांश

कर्नाटक में BJP नेता आर. अशोक ने कांग्रेस की 'गारंटी कमेटियों' को करदाताओं के पैसे पर चलने वाला 'मलाई केंद्र' बताया। गृह लक्ष्मी में गड़बड़ी, बेंगलुरु में दूषित पानी और 1,775 टन रोज़ाना बिना प्रसंस्करण का कचरा — विपक्ष ने कांग्रेस सरकार की जवाबदेही पर सीधे सवाल उठाए।

मुख्य बातें

अशोक ने 22 जून को कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस की 'गारंटी कमेटियों' पर तीखा हमला बोला।
BJP का आरोप — इन कमेटियों का उपयोग करदाताओं के पैसे से पार्टी के नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को पद देने के लिए हो रहा है।
'गृह लक्ष्मी' योजना में कथित गड़बड़ी: मृत व्यक्तियों को भी लाभ मिलने की रिपोर्टें सामने आईं।
HSR लेआउट में दूषित पेयजल से 60 से अधिक परिवार बीमार; जाँच में 278 कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिले।
बेंगलुरु में प्रतिदिन लगभग 1,775 टन कचरा बिना प्रसंस्करण के सड़कों पर जमा होने का दावा।
अशोक ने माँग की — कमेटियाँ तत्काल भंग हों और अब तक दिए गए वेतन व लाभों की वसूली हो।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार, 22 जून को कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत स्तर पर गठित 'गारंटी कमेटियाँ' जनसेवा के नाम पर करदाताओं के पैसे से पार्टी के नाराज नेताओं और बेरोज़गार कार्यकर्ताओं को पद और फायदे देने का ज़रिया बन गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अशोक ने माँग की कि इन कमेटियों को तत्काल भंग किया जाए और अब तक वितरित वेतन व लाभों की वसूली की जाए।

गारंटी कमेटियों पर क्या है विवाद

अशोक ने सवाल उठाया कि क्या ये संस्थाएँ वास्तव में जनता की सेवा के लिए बनाई गई थीं, या ये 'मुफ्त की मलाई खाने के केंद्र' के रूप में काम कर रही हैं। उनका आरोप है कि कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में इन कमेटियों के विस्तार से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जबकि राज्य पहले से ही वित्तीय दबाव में है।

गृह लक्ष्मी योजना में गड़बड़ी का संदर्भ

अशोक ने यह भी कहा कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब 'गृह लक्ष्मी' योजना में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, योजना का लाभ कथित तौर पर उन लोगों को भी दिया जा रहा था जिनकी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि फंड की कमी के चलते सरकारी स्कूलों के छात्र किताबों और यूनिफॉर्म के लिए प्रतीक्षारत हैं, जर्जर कक्षाओं की मरम्मत रुकी पड़ी है और बच्चों को मिलने वाले अंडे जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी प्रभावित हो रही हैं।

किसानों और विकास कार्यों पर असर

अशोक के अनुसार, रागी की खेती करने वाले किसान बकाया न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भुगतान के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में पार्टी कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक धन से रोज़गार और फायदे देना 'शर्मनाक' है।

बेंगलुरु की नागरिक समस्याएँ: पानी और कचरा संकट

अशोक ने विकास मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा पर भी निशाना साधा और उन्हें 'रील्स मिनिस्टर' कहते हुए आरोप लगाया कि वे बेंगलुरु की बिगड़ती नागरिक समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर प्रचार पर ध्यान दे रहे हैं।

HSR लेआउट में हाल ही में कावेरी के पेयजल में गंदगी का हवाला देते हुए अशोक ने कहा कि दूषित पानी पीने से 60 से अधिक परिवार बीमार पड़ गए और कई बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके दावे के अनुसार, जाँच में पेयजल आपूर्ति में 278 कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए। उन्होंने बेंगलुरु वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB) पर आरोप लगाया कि 6 जून को शिकायत दर्ज होने के बावजूद उसे नज़रअंदाज़ किया गया।

कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर अशोक ने दावा किया कि शहर में प्रतिदिन लगभग 1,775 टन कचरा बिना प्रसंस्करण के सड़कों और स्टॉर्मवॉटर नालियों में जमा हो रहा है। उन्होंने कांग्रेस सरकार के 'ब्रांड बेंगलुरु' विज़न पर व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या इसका अर्थ नागरिकों को दूषित पानी और कचरे के ढेर के बीच रहने पर मजबूर करना है।

BJP की माँग

अशोक ने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस सरकार में जवाबदेही की थोड़ी भी भावना है, तो उसे नई गारंटी कमेटियाँ बनाने के बजाय मौजूदा कमेटियों को भंग करना चाहिए और अब तक दिए गए वेतन व लाभों की वसूली करनी चाहिए। कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और आगे के घटनाक्रम पर सबकी नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके भीतर एक वैध प्रशासनिक प्रश्न छुपा है — क्या सरकारी योजनाओं की निगरानी के लिए गठित कमेटियाँ स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र हैं या दलीय संरचना का विस्तार? गृह लक्ष्मी में मृत लाभार्थियों को भुगतान की रिपोर्टें और बेंगलुरु में पेयजल संकट — ये अलग-अलग मुद्दे हैं, लेकिन एक साथ उठाए जाने पर ये कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस की 'पाँच गारंटियाँ' चुनाव में निर्णायक रहीं, पर उनके क्रियान्वयन की पारदर्शिता अब खुद एक राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में 'गारंटी कमेटियाँ' क्या हैं?
ये ग्राम पंचायत स्तर पर कांग्रेस सरकार द्वारा गठित समितियाँ हैं, जिनका उद्देश्य सरकारी गारंटी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन बताया गया है। BJP का आरोप है कि इनका उपयोग पार्टी कार्यकर्ताओं को पद और वेतन देने के लिए किया जा रहा है।
BJP ने इन कमेटियों पर क्या आरोप लगाए हैं?
विपक्ष के नेता आर. अशोक का आरोप है कि ये कमेटियाँ करदाताओं के पैसे से कांग्रेस के नाराज नेताओं और बेरोज़गार कार्यकर्ताओं को रोज़गार देने का साधन बन गई हैं। उन्होंने इन्हें तत्काल भंग करने और दिए गए लाभों की वसूली की माँग की है।
गृह लक्ष्मी योजना में क्या गड़बड़ियाँ सामने आई हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, कर्नाटक की 'गृह लक्ष्मी' योजना का लाभ कथित तौर पर उन लोगों को भी दिया गया जिनकी मृत्यु हो चुकी है। BJP ने इसे सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया है।
बेंगलुरु में पेयजल प्रदूषण का मामला क्या है?
HSR लेआउट में कावेरी के पेयजल में 278 कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए जाने की रिपोर्ट है, जिससे 60 से अधिक परिवार बीमार पड़े और कई बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अशोक के अनुसार, 6 जून को शिकायत के बावजूद BWSSB ने कार्रवाई नहीं की।
कांग्रेस सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
22 जून तक कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विकास मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा पर भी अशोक ने निशाना साधा, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।
राष्ट्र प्रेस
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