कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर भाजपा का हमला: 'पेमेंट कोटा' और दागी नेताओं को मंत्री पद, महिलाओं को नज़रअंदाज़
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने 4 अगस्त को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक के ताज़े कैबिनेट विस्तार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विस्तार में 'पेमेंट कोटा' के ज़रिए मंत्री पद बाँटे गए हैं और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 'दागी' नेताओं को सरकार में जगह दी गई है। अशोक ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को अपनी मंत्रिपरिषद चुनने में पूरी स्वायत्तता नहीं दी गई।
मुख्य आरोप: दागी नेता और पैसे का खेल
अशोक ने कहा, 'नई कैबिनेट दागदार नेताओं से भरी है और कई लोगों को पैसे के बदले जगह मिली है। यह साफ है कि मुख्यमंत्री को अपनी टीम चुनने की आज़ादी नहीं थी।' उन्होंने आखिरी वक्त पर मंकल वैद्य की जगह एस.एस. मल्लिकार्जुन को शामिल किए जाने का हवाला देते हुए दावा किया कि अंतिम सूची पर 'धन-बल' का प्रभाव था।
बी. नागेंद्र की वापसी पर सवाल
अशोक ने महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले का उल्लेख करते हुए बी. नागेंद्र की कैबिनेट में पुनः वापसी पर कड़ा एतराज़ जताया। उन्होंने कहा कि नागेंद्र इस मामले में जेल जा चुके हैं और सवाल उठाया, 'उन्हें क्लीन चिट किसने दी और वापस कैबिनेट में कौन लाया?' अशोक ने यह भी दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए आवंटित राशि का दुरुपयोग हुआ था।
क्षेत्रीय असंतुलन और महिलाओं की अनदेखी
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यादगीर, रायचूर, विजयनगर, कोलार और चिक्कबल्लापुर जैसे ज़िलों को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व से वंचित रखा गया है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर महिलाओं की घोर अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है, फिर भी एक भी महिला को मंत्री नहीं बनाया गया। यह कर्नाटक की महिलाओं के साथ धोखा है।' उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा का नाम शुरुआती सूची में था, उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की, लेकिन अंततः उन्हें कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया।
कांग्रेस के भीतर असंतोष और संवैधानिक उल्लंघन के आरोप
अशोक ने कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शनों का ज़िक्र किया और कहा कि इससे सत्तारूढ़ दल के भीतर व्यापक असंतोष उजागर होता है। उन्होंने दावा किया, 'कुछ विधायकों ने इस्तीफे की धमकी दी है और कांग्रेस कार्यकर्ता खुद मुख्यमंत्री के पोस्टर फाड़ रहे हैं।' इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, विधान परिषद के सभापति और उपसभापति जैसे संवैधानिक पदों के लिए नामों की घोषणा पार्टी के लेटरहेड पर की — जो संवैधानिक परंपराओं का उल्लंघन है।
कावेरी विवाद और आगे की रणनीति
कावेरी जल विवाद पर अशोक ने कर्नाटक सरकार को आगाह किया कि वह ऐसा कोई फैसला न ले जिससे राज्य के हितों को नुकसान पहुँचे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ समझौता करके पानी छोड़ती है, तो राज्य की जनता चुप नहीं बैठेगी। भाजपा ने घोषणा की कि पार्टी शुक्रवार को विधानसभा सत्र से पहले एक बैठक करेगी, जिसमें कैबिनेट विस्तार, सूखे और कावेरी विवाद से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने की रणनीति तय की जाएगी। आने वाले विधानसभा सत्र में इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की संभावना है।