10 अगस्त 2026
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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में देरी: BJP के आर. अशोक ने सीएम शिवकुमार को घेरा, 20 पद अभी भी खाली

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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में देरी: BJP के आर. अशोक ने सीएम शिवकुमार को घेरा, 20 पद अभी भी खाली

सारांश

कर्नाटक में BJP नेता आर. अशोक ने सीएम शिवकुमार पर तीखा हमला बोला — 20 कैबिनेट पद खाली, कृषि और शिक्षा विभागों में महीनेभर से मंत्री नहीं, 16,800 से अधिक स्कूल क्लासरूम जर्जर, और गृह लक्ष्मी योजना में CAG ने 19,020 लाभार्थियों को एक ही बैंक खाते से जोड़े जाने की गड़बड़ी पकड़ी।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार मात्र 13 मंत्रियों के साथ काम कर रही है; कैबिनेट के 20 पद अभी भी रिक्त हैं।
कृषि, स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों में पिछले एक महीने से कोई स्वतंत्र मंत्री नहीं।
अशोक ने दावा किया कि 46,174 सरकारी स्कूलों में से 16,800 से अधिक क्लासरूम मरम्मत की प्रतीक्षा में हैं।
बेंगलुरु में 80 से अधिक सरकारी स्कूल खतरनाक हालत में बताए गए।
CAG की रिपोर्ट के अनुसार गृह लक्ष्मी योजना में 19,020 लाभार्थियों को एक ही बैंक खाता नंबर से जोड़ा गया।
कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 23 जून को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार कैबिनेट के 20 रिक्त पदों को भरने में नाकाम रही है और यह देरी सत्ता की अंदरूनी खींचतान का नतीजा है। फिलहाल कर्नाटक सरकार केवल 13 मंत्रियों के साथ काम कर रही है।

कैबिनेट विस्तार में देरी की स्थिति

राजनीतिक हलकों में कैबिनेट विस्तार में देरी की वजह सत्ताधारी पार्टी के भीतर मतभेदों को माना जा रहा है। मंत्रियों को पहले से सौंपे गए विभागों को छोड़कर, शेष सभी विभागों का कामकाज स्वयं मुख्यमंत्री शिवकुमार देख रहे हैं। आर. अशोक ने सवाल उठाया, 'राज्यसभा और विधान परिषद दोनों के चुनाव हो चुके हैं, फिर भी कर्नाटक में अभी तक पूरी कैबिनेट नहीं बनी है। ऐसे बेबस और 'रबड़ स्टांप' मुख्यमंत्री से कन्नड़ लोग क्या उम्मीद कर सकते हैं?'

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कृषि, स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा जैसे अहम विभागों के लिए पिछले एक महीने से कोई स्वतंत्र मंत्री नहीं है। आलोचकों का कहना है कि इससे प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत पर हमला

आर. अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक के 46,174 सरकारी स्कूलों में से 16,800 से अधिक क्लासरूम मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, यानी लगभग 40 प्रतिशत कक्षाएँ जर्जर हालत में हैं। उनके अनुसार यह समस्या कल्याणा कर्नाटक, कित्तूर कर्नाटक, मलनाड, पुराने मैसूर और यहाँ तक कि बेंगलुरु में भी बड़े पैमाने पर फैली है, जहाँ 80 से अधिक सरकारी स्कूल खतरनाक हालत में बताए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षकों को छत से पानी टपकने, दीवारें गिरने और टूटी खिड़कियों वाले असुरक्षित कक्षाओं में जाने पर मजबूर किया जा रहा है। अशोक ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, 'क्या यही आपकी गारंटी वाली सरकार की उपलब्धि है?'

गृह लक्ष्मी योजना में अनियमितताओं का आरोप

आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजना 'गृह लक्ष्मी' के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की टिप्पणियों का हवाला देते हुए दावा किया कि ऑडिट में 19,020 लाभार्थियों को एक ही बैंक खाता नंबर से जोड़े जाने का मामला सामने आया है। उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्टीकरण माँगा कि हजारों महिलाओं के नाम पर जारी धनराशि एक ही खाते में कैसे जमा हो सकती है।

BJP का व्यापक आरोप: प्रशासन ठप, सिर्फ कुर्सी की चिंता

आर. अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को 'अपनी मर्जी से शिक्षाविद' कहा और उन पर राजनीतिक जोड़-तोड़ में माहिर होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री पूर्ण कैबिनेट विस्तार से इसलिए हिचकिचा रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी कुर्सी खोने का डर है। उन्होंने कहा, 'स्कूल की दीवारें गिर रही हैं, प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा रही है, लेकिन कांग्रेस सरकार को सिर्फ राजनीतिक हिसाब-किताब और अपनी कुर्सियाँ बचाने की चिंता है।'

गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया खेमे के बीच तनाव की खबरें पहले भी आती रही हैं। यह नवीनतम हमला उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार में और देरी से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब प्रमुख विभाग बिना मंत्री के चल रहे हों। बेंगलुरु में अगले कुछ दिनों में कांग्रेस के आंतरिक समन्वय की दिशा पर नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कांग्रेस के भीतर सत्ता-संतुलन की उस पुरानी पहेली का नया अध्याय है जो शिवकुमार और सिद्धरामैया खेमे के बीच सुलग रही है। जब प्रमुख विभाग बिना मंत्री के चल रहे हों और CAG की रिपोर्ट में 19,020 लाभार्थियों को एक खाते से जोड़ने जैसी गड़बड़ी सामने आए, तो सवाल सिर्फ BJP के आरोपों तक सीमित नहीं रहता — यह जवाबदेही का मसला बन जाता है। कांग्रेस को यह समझना होगा कि 'गारंटी सरकार' की छवि तब तक टिकाऊ नहीं है जब तक कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी और सत्यापन-योग्य न हो।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट में अभी कितने पद खाली हैं?
कर्नाटक सरकार इस समय केवल 13 मंत्रियों के साथ काम कर रही है और कैबिनेट के 20 पद अभी भी रिक्त हैं। खाली विभागों का कामकाज स्वयं मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार देख रहे हैं।
BJP ने सीएम शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए हैं?
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि शिवकुमार कुर्सी बचाने के डर से पूर्ण कैबिनेट विस्तार नहीं कर रहे और सरकार सत्ता-बंटवारे की आंतरिक लड़ाई में उलझी है। उन्होंने शिवकुमार पर राजनीतिक जोड़-तोड़ में माहिर होने का भी आरोप लगाया।
गृह लक्ष्मी योजना में क्या अनियमितताएँ सामने आई हैं?
आर. अशोक ने CAG की टिप्पणियों का हवाला देते हुए दावा किया कि 19,020 लाभार्थियों को एक ही बैंक खाता नंबर से जोड़ा गया था। उन्होंने सरकार से स्पष्टीकरण माँगा कि हजारों महिलाओं के नाम पर जारी धनराशि एक ही खाते में कैसे जमा हो सकती है।
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों की स्थिति कैसी बताई गई है?
BJP नेता आर. अशोक के दावे के अनुसार राज्य के 46,174 सरकारी स्कूलों में से 16,800 से अधिक क्लासरूम मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, यानी लगभग 40 प्रतिशत कक्षाएँ जर्जर हैं। बेंगलुरु में भी 80 से अधिक स्कूल खतरनाक हालत में बताए गए हैं।
कर्नाटक में कौन-से अहम विभाग बिना मंत्री के चल रहे हैं?
आर. अशोक के अनुसार कर्नाटक में पिछले एक महीने से कृषि, स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों के लिए कोई स्वतंत्र मंत्री नहीं है। इन विभागों का कामकाज मुख्यमंत्री शिवकुमार स्वयं देख रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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