3 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार एक महीने बाद भी अधर में, 20 पद खाली; शिवकुमार सरकार पर दबाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार एक महीने बाद भी अधर में, 20 पद खाली; शिवकुमार सरकार पर दबाव

सारांश

मुख्यमंत्री बने एक महीना बीत गया, पर कर्नाटक कैबिनेट में 20 पद अभी भी खाली हैं। कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और मंत्री पद की लॉबिंग ने विस्तार को रोक रखा है — और राज्य सूखे व कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के बीच बिना पूर्णकालिक मंत्रियों के चल रहा है।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 3 जून 2025 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी; 3 जुलाई 2025 तक एक महीना पूरा हो गया।
मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन अभी केवल 13 मंत्री कार्यरत हैं और 20 पद रिक्त हैं।
कांग्रेस के भीतर गुटीय खींचतान और मंत्री पद की लॉबिंग कैबिनेट विस्तार में देरी की मुख्य वजह बताई जा रही है।
BJP प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री SIR को कैबिनेट विस्तार टालने का बहाना बना रहे हैं।
अधूरी कैबिनेट के बावजूद शिवकुमार ने बेंगलुरु सड़कों के लिए ₹2,000 करोड़ और 72,000 सरकारी रिक्तियों को 6 महीने में भरने समेत कई घोषणाएँ की हैं।
राज्य सूखे, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और प्रशासनिक दबावों से एक साथ जूझ रहा है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक की सत्ता संभाले पूरा एक महीना बीत चुका है, लेकिन राज्य की मंत्रिपरिषद अब भी अधूरी है — 34 में से केवल 13 मंत्री कार्यरत हैं और 20 पद रिक्त पड़े हैं। सत्ताधारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के भीतर गुटीय खींचतान और मंत्री पद को लेकर जारी लॉबिंग इस देरी की मुख्य वजह बताई जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

3 जून 2025 को अपने पूर्ववर्ती सिद्दारमैया के साथ लंबे सत्ता-बंटवारे के विवाद के बाद शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उम्मीद थी कि उनके आने से कर्नाटक कांग्रेस में वर्षों से चली आ रही गुटबाजी और अनिश्चितता का दौर समाप्त होगा। परंतु 3 जुलाई 2025 तक, यानी एक महीने बाद भी, कैबिनेट का विस्तार नहीं हो सका है।

एकता का संदेश देने की कोशिश में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस अवसर पर बेंगलुरु में सिद्दारमैया के आवास पर जाकर उनसे भेंट की। उनके साथ उनकी पत्नी उषा शिवकुमार और भाई एवं पूर्व सांसद डी.के. सुरेश भी उपस्थित थे। नाश्ते पर हुई इस बैठक में राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई।

पार्टी के भीतर असंतोष

कृष्णा बायरे गौड़ा, रामलिंगा रेड्डी और के.एच. मुनियप्पा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने पहले मंत्री पद न मिलने पर अपनी नाराजगी जताई थी, हालांकि अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से विरोध की बजाय कामकाज पर ध्यान केंद्रित कर लिया है। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य सिद्दारमैया ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर अधिक कुछ नहीं कहा है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल कैबिनेट विस्तार की जल्दबाजी में नहीं है। नेतृत्व को आशंका है कि कुछ को मंत्री बनाने और कुछ को बाहर रखने से पार्टी के भीतर नाराजगी और बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी अनुभवी विधायकों के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका देने पर विचार कर रही है।

विपक्ष का हमला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को कैबिनेट विस्तार टालने का बहाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जानते हैं कि विस्तार होने पर उनकी सरकार की नींव हिल जाएगी। BJP और जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] ने SIR में सरकारी हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सरकार का कामकाज दीर्घकाल तक केवल मुख्यमंत्री और मुट्ठी भर मंत्रियों के भरोसे नहीं चल सकता, खासकर तब जब कई अहम विभाग पूर्णकालिक राजनीतिक नेतृत्व की प्रतीक्षा में हों।

सरकार के पहले महीने के विवाद

शिवकुमार सरकार को अपने पहले महीने में कई विवादों का सामना करना पड़ा। मंत्री प्रियांक खड़गे की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर की गई टिप्पणी विवादों में रही। इसके अलावा, बेंगलुरु के निकट प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और मुख्यमंत्री शिवकुमार के बीच राजनीतिक टकराव भी सामने आया। राज्य में कई आपराधिक घटनाएं भी हुईं।

यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब कर्नाटक सूखे, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और प्रशासनिक दबावों से एक साथ जूझ रहा है।

नीतिगत घोषणाएँ और आगे की राह

अधूरी कैबिनेट के बावजूद मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत घोषणाएँ की हैं। इनमें पूरे कर्नाटक के छात्रों के लिए मुफ्त बस पास, हर ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड में ₹10 लाख की सहायता से 'भारत जोड़ो यूथ एसोसिएशन' बनाने की योजना, 2,500 वर्ग फुट तक के नए मकानों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) की अनिवार्यता से छूट और 'बी' खाता संपत्तियों को 'ए' खाता में बदलने की योजना शामिल है।

इसके अतिरिक्त, बेंगलुरु की सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए ₹2,000 करोड़ का कार्यक्रम, 72,000 सरकारी रिक्तियों को छह महीने में भरने की समय-सीमा और एक अलग 'प्रजा सेवा' मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव भी घोषित किया गया है। सरकार ने प्रमुख गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों के पुनः सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और वित्तीय दबाव के बीच RTC बस किराए में संशोधन पर विचार कर रही है। कैबिनेट विस्तार की अनिश्चितता जब तक बनी रहेगी, तब तक शिवकुमार सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कांग्रेस की उस पुरानी बीमारी का लक्षण है जिसमें गठबंधन प्रबंधन हमेशा शासन पर भारी पड़ता है। शिवकुमार और सिद्दारमैया के बीच का सत्ता-बंटवारा विवाद महीनों तक चला — और अब कैबिनेट विस्तार उसी खींचतान का अगला अध्याय बन गया है। राज्य जब सूखे और कानून-व्यवस्था की दोहरी चुनौती झेल रहा हो, तब 20 अहम विभागों का बिना पूर्णकालिक मंत्री के चलना गंभीर प्रशासनिक जोखिम है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्रीय नेतृत्व 'सही समय' का इंतजार कर रहा है, या वह उस विस्फोटक असंतोष को टालना चाहता है जो किसी भी सूची से अनिवार्यतः उपजेगा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में देरी क्यों हो रही है?
कांग्रेस के भीतर गुटीय खींचतान और मंत्री पद को लेकर जारी लॉबिंग कैबिनेट विस्तार में देरी की मुख्य वजह बताई जा रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व को आशंका है कि कुछ को मंत्री बनाने और कुछ को बाहर रखने से पार्टी में नाराजगी और बढ़ सकती है।
कर्नाटक मंत्रिपरिषद में अभी कितने पद रिक्त हैं?
कर्नाटक मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन 3 जुलाई 2025 तक केवल 13 मंत्री कार्यरत हैं और 20 पद रिक्त हैं। इससे कई अहम विभाग बिना पूर्णकालिक मंत्री के चल रहे हैं।
डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ कब ली?
डी.के. शिवकुमार ने 3 जून 2025 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, अपने पूर्ववर्ती सिद्दारमैया के साथ लंबे सत्ता-बंटवारे के विवाद के बाद। 3 जुलाई 2025 को उनके कार्यकाल का एक महीना पूरा हुआ।
विपक्ष ने कैबिनेट विस्तार में देरी पर क्या कहा?
BJP प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को कैबिनेट विस्तार टालने का बहाना बना रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जानते हैं कि विस्तार होने पर उनकी सरकार की नींव हिल जाएगी।
अधूरी कैबिनेट के बावजूद शिवकुमार सरकार ने कौन-सी प्रमुख घोषणाएँ की हैं?
शिवकुमार सरकार ने बेंगलुरु की सड़कों के लिए ₹2,000 करोड़ का कार्यक्रम, 72,000 सरकारी रिक्तियों को 6 महीने में भरने की समय-सीमा, छात्रों के लिए मुफ्त बस पास और 'प्रजा सेवा' मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों के पुनः सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले