2 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-अरब लीग साझेदारी: श्रीप्रिया रंगनाथन ने काहिरा में खालिद मंजलावी से की मुलाकात, 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' पर बल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-अरब लीग साझेदारी: श्रीप्रिया रंगनाथन ने काहिरा में खालिद मंजलावी से की मुलाकात, 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' पर बल

सारांश

भारत की वरिष्ठ राजनयिक श्रीप्रिया रंगनाथन की काहिरा यात्रा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं — यह 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' को ज़मीन पर उतारने और ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ में भारत की साख पुख्ता करने की सुविचारित कोशिश है।

मुख्य बातें

सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने 17 अगस्त 2026 को काहिरा में अरब लीग के सहायक महासचिव राजदूत खालिद मंजलावी से मुलाकात की।
बैठक का मुख्य एजेंडा 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' को आगे बढ़ाना और सहयोग के नए क्षेत्रों में ठोस पहल करना था।
रविवार को सचिव ने भारत-मिस्र ब्रिक्स पार्टनरशिप कॉन्फ्रेंस में भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता की प्राथमिकताएँ रखीं।
सचिव 16 से 21 अगस्त 2026 तक मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं — अपनी वर्तमान भूमिका में इन देशों की पहली यात्रा ।
यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा और इन देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों को और मज़बूत करना है।

विदेश मंत्रालय में सचिव (कॉन्सुलर, पासपोर्ट, वीज़ा और प्रवासी भारतीय मामले) श्रीप्रिया रंगनाथन ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को काहिरा में अरब लीग के सहायक महासचिव राजदूत खालिद मंजलावी से भेंट की और भारत-अरब साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैठक का केंद्रबिंदु 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' को गति देना था, जिसे दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में औपचारिक रूप से अपनाया गया था।

बैठक के मुख्य बिंदु

मिस्र में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने सहयोग के नए और उभरते क्षेत्रों में ठोस पहल करने पर सहमति जताई। दूतावास के अनुसार, वार्ता में एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28 के क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने और द्विपक्षीय संबंधों को व्यावहारिक धरातल पर आगे बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया गया।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के देशों के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक सम्बन्धों को व्यापक रणनीतिक ढाँचे में ढालने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि अरब लीग के 22 सदस्य देशों में भारत के लाखों प्रवासी नागरिक कार्यरत हैं, जो भारत के प्रेषण (रेमिटेंस) प्रवाह में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताएँ

इससे एक दिन पूर्व, रविवार 16 अगस्त को, सचिव रंगनाथन ने काहिरा के डिप्लोमैटिक क्लब में आयोजित भारत-मिस्र ब्रिक्स पार्टनरशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। यह सम्मेलन मिस्र में भारतीय दूतावास ने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) के सहयोग से आयोजित किया था।

सचिव रंगनाथन ने अपने संबोधन में भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी, ब्रिक्स के भीतर घनिष्ठ सहयोग और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान करती है।

यात्रा का दायरा और उद्देश्य

सचिव रंगनाथन 16 से 21 अगस्त 2026 तक मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान वे अपने समकक्षों और विभिन्न हितधारकों से भेंट करेंगी तथा क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगी।

मंत्रालय ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि अपनी वर्तमान भूमिका में इन तीनों देशों की यह सचिव की पहली आधिकारिक यात्रा है। इससे क्षेत्र के साथ भारत के सम्बन्ध और प्रगाढ़ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्षेत्रीय महत्त्व और आगे की राह

यह यात्रा पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हो रही है। भारत की कोशिश है कि वह इस क्षेत्र में एक संतुलित और विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को और मज़बूत करे। फिलिस्तीन और लेबनान की यात्रा, जहाँ हाल के वर्षों में संघर्ष की स्थिति बनी रही है, भारत की 'सबके साथ, सबके विकास' की कूटनीतिक सोच को रेखांकित करती है। आने वाले हफ्तों में एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28 के तहत होने वाली ठोस पहलों पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि इसके तहत होने वाली 'ठोस पहलें' केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर भी दिखें। फिलिस्तीन और लेबनान जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे निरंतरता और ठोस परिणामों की ज़रूरत है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीप्रिया रंगनाथन और अरब लीग के बीच काहिरा में किस मुद्दे पर बातचीत हुई?
बातचीत का मुख्य फोकस 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' को आगे बढ़ाने पर था, जिसे दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में अपनाया गया था। इसके साथ ही सहयोग के नए और उभरते क्षेत्रों में ठोस पहल करने पर भी सहमति बनी।
भारत-अरब 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' क्या है?
यह दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में अपनाया गया एक द्विपक्षीय सहयोग ढाँचा है, जो 2026 से 2028 के बीच भारत और अरब लीग के सदस्य देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना निर्धारित करता है।
सचिव रंगनाथन की मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान यात्रा का उद्देश्य क्या है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा इन देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों को मज़बूत करने, क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करने और आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए है। अपनी वर्तमान भूमिका में इन देशों की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।
भारत-मिस्र ब्रिक्स पार्टनरशिप कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ?
16 अगस्त को काहिरा के डिप्लोमैटिक क्लब में आयोजित इस सम्मेलन में सचिव रंगनाथन ने भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता की प्राथमिकताएँ रखीं। उन्होंने भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी को ब्रिक्स के भीतर सहयोग और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं के लिए एक मज़बूत आधार बताया।
अरब लीग के साथ भारत की साझेदारी क्यों महत्त्वपूर्ण है?
अरब लीग के 22 सदस्य देशों में भारत के लाखों प्रवासी नागरिक कार्यरत हैं, जो भारत के प्रेषण (रेमिटेंस) में बड़ा योगदान देते हैं। इसके अलावा, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से भी यह साझेदारी भारत की विदेश नीति के लिए रणनीतिक महत्त्व रखती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले