भारत-अरब लीग साझेदारी: श्रीप्रिया रंगनाथन ने काहिरा में खालिद मंजलावी से की मुलाकात, 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' पर बल
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय में सचिव (कॉन्सुलर, पासपोर्ट, वीज़ा और प्रवासी भारतीय मामले) श्रीप्रिया रंगनाथन ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को काहिरा में अरब लीग के सहायक महासचिव राजदूत खालिद मंजलावी से भेंट की और भारत-अरब साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैठक का केंद्रबिंदु 'एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28' को गति देना था, जिसे दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में औपचारिक रूप से अपनाया गया था।
बैठक के मुख्य बिंदु
मिस्र में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने सहयोग के नए और उभरते क्षेत्रों में ठोस पहल करने पर सहमति जताई। दूतावास के अनुसार, वार्ता में एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28 के क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने और द्विपक्षीय संबंधों को व्यावहारिक धरातल पर आगे बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के देशों के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक सम्बन्धों को व्यापक रणनीतिक ढाँचे में ढालने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि अरब लीग के 22 सदस्य देशों में भारत के लाखों प्रवासी नागरिक कार्यरत हैं, जो भारत के प्रेषण (रेमिटेंस) प्रवाह में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताएँ
इससे एक दिन पूर्व, रविवार 16 अगस्त को, सचिव रंगनाथन ने काहिरा के डिप्लोमैटिक क्लब में आयोजित भारत-मिस्र ब्रिक्स पार्टनरशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। यह सम्मेलन मिस्र में भारतीय दूतावास ने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) के सहयोग से आयोजित किया था।
सचिव रंगनाथन ने अपने संबोधन में भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत-मिस्र रणनीतिक साझेदारी, ब्रिक्स के भीतर घनिष्ठ सहयोग और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान करती है।
यात्रा का दायरा और उद्देश्य
सचिव रंगनाथन 16 से 21 अगस्त 2026 तक मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान वे अपने समकक्षों और विभिन्न हितधारकों से भेंट करेंगी तथा क्षेत्रीय घटनाक्रमों और आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगी।
मंत्रालय ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि अपनी वर्तमान भूमिका में इन तीनों देशों की यह सचिव की पहली आधिकारिक यात्रा है। इससे क्षेत्र के साथ भारत के सम्बन्ध और प्रगाढ़ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्षेत्रीय महत्त्व और आगे की राह
यह यात्रा पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हो रही है। भारत की कोशिश है कि वह इस क्षेत्र में एक संतुलित और विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को और मज़बूत करे। फिलिस्तीन और लेबनान की यात्रा, जहाँ हाल के वर्षों में संघर्ष की स्थिति बनी रही है, भारत की 'सबके साथ, सबके विकास' की कूटनीतिक सोच को रेखांकित करती है। आने वाले हफ्तों में एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम 2026-28 के तहत होने वाली ठोस पहलों पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।