विदेश सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन 16 अगस्त से मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान दौरे पर, ब्रिक्स और क्षेत्रीय मुद्दे एजेंडे में
सारांश
मुख्य बातें
विदेश सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) राजदूत श्रीप्रिया रंगनाथन 16 से 21 अगस्त 2026 के बीच मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगी। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 15 अगस्त को जारी बयान में बताया कि वर्तमान पद संभालने के बाद इन तीनों देशों की यह उनकी पहली यात्रा है। पश्चिम एशिया में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह दौरा भारत की सक्रिय क्षेत्रीय कूटनीति का हिस्सा है।
यात्रा का उद्देश्य और एजेंडा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, श्रीप्रिया रंगनाथन तीनों देशों में अपने समकक्षों तथा विभिन्न हितधारकों से मुलाकात करेंगी। वार्ताओं में द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने, क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपसी हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श प्रमुख रहेगा। मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा तीनों देशों के साथ मौजूदा सहयोग को नई गति देने का महत्वपूर्ण अवसर है।
ब्रिक्स में भारत-मिस्र साझेदारी
मिस्र प्रवास के दौरान श्रीप्रिया रंगनाथन 'इंडिया-इजिप्ट इन ब्रिक्स: टुवर्ड्स अ स्ट्रॉन्गर वॉयस फॉर द ग्लोबल साउथ' विषयक कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देंगी। इस मंच पर ब्रिक्स के ढाँचे में भारत और मिस्र के बीच साझेदारी को मजबूत करने तथा ग्लोबल साउथ की आवाज को प्रभावशाली तरीके से रखने के उपायों पर मंथन होगा। गौरतलब है कि मिस्र 2024 में ब्रिक्स का सदस्य बना और दोनों देश कई बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय सहयोग करते हैं।
फिलिस्तीन और लेबनान: क्षेत्रीय स्थिति पर संवाद
फिलिस्तीन और लेबनान की यात्रा के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और मानवीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और कूटनीतिक हलचल दोनों एक साथ जारी हैं। भारत लगातार इस क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देता रहा है।
भारत की पश्चिम एशिया नीति का संदर्भ
भारत और मिस्र के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। फिलिस्तीन के साथ भारत की ऐतिहासिक एकजुटता और लेबनान में भारतीय शांति सैनिकों की उपस्थिति इस क्षेत्र में भारत के हितों को रेखांकित करती है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह यात्रा इन संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
आगे क्या
यात्रा 21 अगस्त 2026 को समाप्त होगी। वार्ताओं के नतीजे और साझा बयान भारत की पश्चिम एशिया नीति की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल साउथ के नेतृत्व की भूमिका में भारत के बढ़ते दावे के मद्देनजर यह दौरा कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।