27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा: भारत-चीन राजनीतिक व जनस्तरीय संवाद मज़बूत करने पर सहमति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा: भारत-चीन राजनीतिक व जनस्तरीय संवाद मज़बूत करने पर सहमति

सारांश

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं — यह कजान के बाद शुरू हुई पुनर्संपर्क प्रक्रिया की अगली परीक्षा है। राजनीतिक, जनस्तरीय और थिंक-टैंक संवाद को संस्थागत रूप देने की कोशिश बता रही है कि भारत सतर्क लेकिन सक्रिय कूटनीति के रास्ते पर है।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 27 जुलाई 2026 को बीजिंग में सीपीपीसीसी उप महासचिव होंग लियांग से मुलाकात की।
बैठक में भारत-चीन के बीच राजनीतिक, जनस्तरीय, शैक्षणिक और थिंक-टैंक स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाने पर चर्चा हुई।
मिस्री ने यात्रा की शुरुआत सीपीसी अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हाईयान के साथ बैठक से की; राजदूत विक्रम दोराईस्वामी भी उपस्थित रहे।
विदेश मंत्री जयशंकर ने पिछले सप्ताह मनीला में कहा था कि 2024 कजान शिखर वार्ता के बाद से भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
भारत ने निष्पक्ष बाज़ार पहुँच और व्यापार संतुलन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 27 जुलाई 2026 को बीजिंग में चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) की 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप महासचिव होंग लियांग से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने भारत और चीन के बीच राजनीतिक, जनस्तरीय, शैक्षणिक तथा थिंक-टैंक स्तर पर आदान-प्रदान को और सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बैठक की जानकारी साझा की।

मिस्री की बीजिंग यात्रा का आगाज़

मिस्री ने अपनी आधिकारिक चीन यात्रा की शुरुआत चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हाईयान के साथ बैठक से की। इस मुलाकात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा द्विपक्षीय संबंधों के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू करने के उपायों पर चर्चा हुई। चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी भी इन बैठकों में उपस्थित रहे।

मुख्य घटनाक्रम

भारतीय दूतावास के अनुसार, होंग लियांग के साथ हुई बैठक में दोनों देशों की प्राथमिकताओं से जुड़े मुद्दों के समाधान पर विशेष ज़ोर दिया गया। साथ ही पार्टी-से-पार्टी संपर्क को पुनर्जीवित करने और जनस्तरीय आदान-प्रदान को संस्थागत रूप देने की संभावनाएँ तलाशी गईं। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश 2020 की गलवान झड़प के बाद से धीरे-धीरे कूटनीतिक सामान्यीकरण की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

जयशंकर का संदर्भ और कजान की भूमिका

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान बैठकों के इतर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के बाद कहा था कि 2024 में रूस के कजान में मोदी-शी शिखर वार्ता के बाद से द्विपक्षीय संबंध क्रमशः सामान्य हो रहे हैं। जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले अगस्त तियानजिन में हुई नेताओं की मुलाकात ने इस दिशा को और बल दिया।

भारत की शर्तें और रुख

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध केवल आपसी सम्मान, आपसी हित और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के सम्मान के आधार पर ही संभव हैं। उन्होंने निष्पक्ष बाज़ार पहुँच और व्यापार संतुलन की आवश्यकता पर भी बल दिया — एक ऐसा मुद्दा जो भारत के लिए लंबे समय से संवेदनशील रहा है, क्योंकि भारत-चीन व्यापार घाटा अरबों डॉलर में बना हुआ है। उनका यह भी मानना है कि मज़बूत भारत-चीन संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

आगे क्या

मिस्री की बीजिंग यात्रा उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क की उस श्रृंखला की अगली कड़ी है जो कजान के बाद से तेज़ हुई है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और थिंक-टैंक स्तर पर संवाद के ठोस कार्यक्रम तय होने की संभावना है, जो संबंधों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया को और गति दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जयशंकर का 'निष्पक्ष बाज़ार पहुँच' पर ज़ोर बताता है कि भारत सामान्यीकरण को बिना शर्त नहीं मान रहा। थिंक-टैंक और शैक्षणिक आदान-प्रदान की बात तब तक अधूरी है जब तक दोनों देशों में वीज़ा और संस्थागत रुकावटें दूर नहीं होतीं। यह यात्रा दिशा तो दर्शाती है, पर मंज़िल अभी दूर है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा का उद्देश्य क्या था?
मिस्री की यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और चीन के बीच राजनीतिक, जनस्तरीय, शैक्षणिक और थिंक-टैंक स्तर पर संवाद को मज़बूत करना था। यह यात्रा 2024 के कजान शिखर सम्मेलन के बाद शुरू हुई द्विपक्षीय सामान्यीकरण प्रक्रिया की कड़ी है।
सीपीपीसीसी क्या है और होंग लियांग कौन हैं?
चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (सीपीपीसीसी) चीन की एक प्रमुख राजनीतिक सलाहकार संस्था है। होंग लियांग इसकी 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप महासचिव हैं, जिनसे मिस्री ने 27 जुलाई को बीजिंग में मुलाकात की।
भारत-चीन संबंध कब से सामान्य हो रहे हैं?
विदेश मंत्री जयशंकर के अनुसार, 2024 में रूस के कजान में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। पिछले अगस्त तियानजिन में हुई नेताओं की बैठक ने इस प्रक्रिया को और बल दिया।
भारत ने चीन के साथ बातचीत में किन मुद्दों पर ज़ोर दिया?
भारत ने निष्पक्ष बाज़ार पहुँच और व्यापार संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही आपसी सम्मान और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के सम्मान को स्थिर संबंधों की बुनियाद बताया गया।
इस यात्रा में और कौन-कौन शामिल थे?
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी बीजिंग में हुई बैठकों में उपस्थित रहे। मिस्री ने सीपीसी केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हाईयान से भी मुलाकात की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले