विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा: हुआ चुनयिंग से वार्ता, भारत-चीन सीमा शांति और द्विपक्षीय संबंधों पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 27 जुलाई 2026 को बीजिंग में अपनी आधिकारिक चीन यात्रा के दौरान चीन की विदेश उप मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया तथा द्विपक्षीय संबंधों के समग्र ढाँचे की समीक्षा की।
वार्ता में क्या हुआ
चीन में भारतीय दूतावास ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की। दूतावास के अनुसार, 'दोनों देशों के नेताओं की उस सोच को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई, जिसमें भारत और चीन को एक-दूसरे के साझेदार और विकास के अवसरों में सहयोगी बताया गया है।' इसमें व्यापार और आर्थिक संबंध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के आपसी लाभ वाले कदम भी शामिल रहे।
होंग लियांग से मुलाकात
इसी दिन मिस्री ने चीन की 14वीं राष्ट्रीय जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (CPPCC) की समिति के उप महासचिव होंग लियांग से भी भेंट की। दूतावास के अनुसार दोनों ने राजनीतिक स्तर पर और आम नागरिकों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। यह बैठक दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यात्रा की शुरुआत: सन हैयान से भेंट
मिस्री ने अपनी बीजिंग यात्रा की औपचारिक शुरुआत चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हैयान से मुलाकात के साथ की। भारतीय दूतावास के अनुसार, इस बैठक में 'द्विपक्षीय संबंधों के लिए नेताओं के दिशा-निर्देशों को लागू करने के तरीकों पर चर्चा की गई', जिसमें दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाना और राजनीतिक, शैक्षणिक तथा थिंक-टैंक स्तर के संपर्क को बढ़ावा देना शामिल रहा।
व्यापक संदर्भ
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से संबंध सामान्य करने की प्रक्रिया में हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर तनाव के कारण व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। मिस्री की यह यात्रा उस कूटनीतिक पुनर्जुड़ाव की कड़ी है जो दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर शुरू हुई है।
आगे की राह
वार्ताओं में जिस सहयोग के ढाँचे की रूपरेखा तैयार की गई, उसके तहत व्यापार, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा शांति को द्विपक्षीय संबंधों की बहाली की पूर्वशर्त मानने की दोनों पक्षों की स्वीकृति एक सकारात्मक संकेत है, हालाँकि क्रियान्वयन की कसौटी अभी बाकी है।