28 जुलाई 2026
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विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग में CPC सेंट्रल पार्टी स्कूल के उपाध्यक्ष से मुलाकात, सहयोग पर चर्चा

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विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग में CPC सेंट्रल पार्टी स्कूल के उपाध्यक्ष से मुलाकात, सहयोग पर चर्चा

सारांश

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बीजिंग यात्रा सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं — यह 2020 के बाद सबसे सक्रिय कूटनीतिक पुनर्जुड़ाव है। एक ही दौरे में CPC स्कूल, CPPCC, विदेश उप मंत्री और पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग — चारों से संपर्क बताता है कि भारत हर स्तर पर चीन से संवाद की डोर थामना चाहता है।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री 28 जुलाई 2026 को बीजिंग में CPC के सेंट्रल पार्टी स्कूल (नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस) के उपाध्यक्ष ली वेनतांग से मिले।
दोनों पक्षों ने स्कूल के शैक्षणिक कार्यक्रमों और भविष्य के सहयोग के अवसरों पर चर्चा की।
सोमवार को मिस्री ने चीन की विदेश उप मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात में भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर सहमति जताई।
CPPCC के उप महासचिव होंग लियांग और CPC अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हैयान से भी अलग-अलग बैठकें हुईं।
यह यात्रा 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन के बीच सबसे व्यापक कूटनीतिक संपर्क प्रयासों में से एक मानी जा रही है।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री 28 जुलाई 2026 को बीजिंग में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के सेंट्रल पार्टी स्कूल (नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस) के उपाध्यक्ष ली वेनतांग से मिले और भविष्य में शैक्षणिक सहयोग तथा आदान-प्रदान की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। यह मुलाकात मिस्री की चीन की आधिकारिक यात्रा के दूसरे दिन हुई, जो भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

सेंट्रल पार्टी स्कूल में क्या हुआ

चीन में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि विक्रम मिस्री को स्कूल के ऐतिहासिक महत्व, उसके बौद्धिक योगदान और शैक्षणिक कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। दोनों पक्षों ने भविष्य में सहयोग और लेन-देन के अवसरों पर चर्चा की।

उल्लेखनीय है कि सेंट्रल पार्टी स्कूल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है और इसे चीन की शासन व्यवस्था की वैचारिक रीढ़ माना जाता है। इस संस्था से संपर्क बढ़ाना कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है।

विदेश उप मंत्री हुआ चुनयिंग से वार्ता

इससे पहले सोमवार को मिस्री ने चीन की विदेश उप मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की, जिसमें भारत-चीन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई। भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने दोनों देशों के नेताओं की उस सोच को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की, जिसमें भारत और चीन को एक-दूसरे के साझेदार और विकास के अवसरों में सहयोगी बताया गया है।

इस वार्ता में व्यापार और आर्थिक संबंध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए आपसी लाभ वाले कदमों पर सहमति बनी। विशेष रूप से, दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया — जो 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से द्विपक्षीय वार्ता का केंद्रीय मुद्दा रहा है।

CPPCC और CPC अंतरराष्ट्रीय विभाग से भी संपर्क

सोमवार को ही मिस्री ने चीन की 14वीं राष्ट्रीय जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (CPPCC) की समिति के उप महासचिव होंग लियांग से भी मुलाकात की। इसमें राजनीतिक स्तर पर और आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।

यात्रा की शुरुआत मिस्री ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हैयान से मुलाकात के साथ की थी — जो पार्टी-से-पार्टी संपर्क के पुनरुद्धार का स्पष्ट संकेत है।

यात्रा का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और चीन के बीच 2020 की सीमा तनातनी के बाद से संबंध धीरे-धीरे सामान्य होने की राह पर हैं। गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त व्यवस्था को लेकर समझौता हुआ था, जिसके बाद राजनयिक संवाद की गति तेज़ हुई है।

मिस्री की यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है — यह उस कूटनीतिक ढाँचे को मज़बूत करने की कोशिश है जो व्यापार, शिक्षा और सीमा प्रबंधन — तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पार्टी-से-पार्टी स्तर पर भी संपर्क बहाल करने को तैयार है। यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन में असली नीतिगत शक्ति CPC में केंद्रित है, न कि केवल कार्यकारी मंत्रालयों में। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि जब तक LAC पर ज़मीनी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होती और व्यापार असंतुलन पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ये बैठकें प्रतीकात्मक ही रहेंगी। असली कसौटी यह है कि क्या यह कूटनीतिक ऊर्जा मापने योग्य परिणामों में बदलती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा का उद्देश्य क्या है?
विक्रम मिस्री की चीन यात्रा का उद्देश्य भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सीमा प्रबंधन के मोर्चों पर मज़बूत करना है। यह यात्रा 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से जारी कूटनीतिक पुनर्जुड़ाव की प्रक्रिया का हिस्सा है।
CPC सेंट्रल पार्टी स्कूल क्या है और इससे मुलाकात क्यों अहम है?
CPC सेंट्रल पार्टी स्कूल (नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस) चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। इससे संपर्क बढ़ाना पार्टी-स्तरीय कूटनीति का संकेत है, जो चीन में नीति-निर्माण के केंद्र तक सीधी पहुँच का रास्ता खोलता है।
भारत-चीन सीमा पर शांति के बारे में क्या चर्चा हुई?
विदेश उप मंत्री हुआ चुनयिंग के साथ वार्ता में दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया। यह अक्टूबर 2024 में हुए LAC गश्त समझौते के बाद की कूटनीतिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
मिस्री ने बीजिंग में किन-किन अधिकारियों से मुलाकात की?
मिस्री ने इस यात्रा में CPC सेंट्रल पार्टी स्कूल के उपाध्यक्ष ली वेनतांग, विदेश उप मंत्री हुआ चुनयिंग, CPPCC के उप महासचिव होंग लियांग और CPC केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हैयान से मुलाकात की। यह बहु-स्तरीय संपर्क भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है।
इस यात्रा से भारत-चीन संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा व्यापार, शिक्षा और सीमा प्रबंधन — तीनों मोर्चों पर संवाद की नींव रखती है। हालाँकि, ठोस परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि LAC पर ज़मीनी स्थिति कितनी सामान्य होती है और व्यापार असंतुलन को लेकर कोई सहमति बनती है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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