जयशंकर की UN महासचिव गुटेरेस से मुलाकात, ग्लोबल साउथ और वैश्विक संघर्षों पर केंद्रित रही चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों को कम करने और ग्लोबल साउथ पर उनके प्रभाव को लेकर विस्तृत बातचीत हुई। यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान हुई।
मुलाकात का केंद्र बिंदु
जयशंकर ने बैठक के बाद कहा, "संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत चल रहे झगड़ों और उनके असर को कम करने की जरूरत पर फोकस थी, खासकर ग्लोबल साउथ को लेकर।" ग्लोबल साउथ के देश यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में जारी संघर्षों के आर्थिक व मानवीय परिणाम सबसे गहराई से भुगत रहे हैं — यह संदर्भ इस मुलाकात की पृष्ठभूमि में निर्णायक था।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जयशंकर का बयान
न्यूयॉर्क में एक अलग कार्यक्रम में जयशंकर ने अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल के साथ बातचीत में कहा कि भारत जो नीति दशकों से अपनाता आया है — यानी एकाधिक देशों के साथ स्वतंत्र रूप से संबंध संभालना — वही नीति अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका भी अपना रहा है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।" उनका आशय था कि अमेरिका अब एक साथ चीन, रूस, यूक्रेन और एशिया यूरोप के देशों से समानांतर कूटनीतिक संबंध निभा रहा है।
च्यूइंगम वाला तंज — जयशंकर का चुटीला अंदाज़
रसेल ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए अमेरिकी मुहावरे 'च्यूइंग गम चबाना और चलना' का इस्तेमाल किया — जिसका अर्थ है एक साथ कई काम संभालना। जयशंकर ने इसी मुहावरे को पलटते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में जवाब दिया, "मुझे लगता है कि वॉशिंगटन में उस च्यूइंगम की काफी बड़ी सप्लाई है।"
यह टिप्पणी इस ओर इशारा कर रही थी कि अमेरिका खुद परस्पर विरोधी हितों वाले अनेक देशों के साथ एक साथ रिश्ते निभाने की कोशिश कर रहा है — वही काम जो भारत को पहले 'गुटनिरपेक्षता' के नाम पर आलोचना का सामना करना पड़ता था।
वैश्विक कूटनीति में नया यथार्थ
जयशंकर ने कहा कि एक दौर था जब भारत जैसे विकासशील देशों को सलाह दी जाती थी कि वे अपने कूटनीतिक संबंधों को किसी एक ध्रुव पर केंद्रित करें और 'बहुत अधिक विकल्प' न रखें। इसके विपरीत, खुद अमेरिका एक महाशक्ति के रूप में असीमित कूटनीतिक स्वतंत्रता का उपयोग करता रहा।
उन्होंने कहा, "आज यह दिखावा सभी के लिए खत्म हो चुका है। अब हर कोई खुले तौर पर हर किसी के साथ रिश्ते रख रहा है।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "एक बार जब वॉशिंगटन इस मामले में आगे बढ़ता है तो एक तरह से यह पूरी दुनिया का सवाल बन जाता है। यही आज की हकीकत है।"
आगे का एजेंडा
यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्र सत्र के हाशिये पर हुई कई उच्च स्तरीय बैठकों का हिस्सा है। भारत ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है, और जयशंकर की यह यात्रा उसी रणनीतिक कूटनीति की कड़ी है। आने वाले दिनों में अन्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें अपेक्षित हैं।