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जयशंकर की UN महासचिव गुटेरेस से मुलाकात, ग्लोबल साउथ और वैश्विक संघर्षों पर केंद्रित रही चर्चा

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जयशंकर की UN महासचिव गुटेरेस से मुलाकात, ग्लोबल साउथ और वैश्विक संघर्षों पर केंद्रित रही चर्चा

सारांश

जयशंकर ने UN महासचिव गुटेरेस से ग्लोबल साउथ पर असर डाल रहे वैश्विक संघर्षों को लेकर बातचीत की। साथ ही उन्होंने तीखे अंदाज़ में कहा कि भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' को पहले आलोचना झेलनी पड़ती थी — अब वही नीति अमेरिका भी अपना रहा है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्री जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की।
बातचीत का फोकस वैश्विक संघर्षों को कम करने और ग्लोबल साउथ पर उनके प्रभाव पर रहा।
जयशंकर ने कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति को पहले आलोचना मिलती थी, अब वॉशिंगटन वही काम कर रहा है।
पूर्व अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल से संवाद में जयशंकर ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की — "वॉशिंगटन में उस च्यूइंगम की काफी बड़ी सप्लाई है।" जयशंकर ने कहा कि अब हर देश खुले तौर पर हर किसी के साथ संबंध रख रहा है — पुराना दिखावा खत्म हो चुका है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों को कम करने और ग्लोबल साउथ पर उनके प्रभाव को लेकर विस्तृत बातचीत हुई। यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान हुई।

मुलाकात का केंद्र बिंदु

जयशंकर ने बैठक के बाद कहा, "संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत चल रहे झगड़ों और उनके असर को कम करने की जरूरत पर फोकस थी, खासकर ग्लोबल साउथ को लेकर।" ग्लोबल साउथ के देश यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में जारी संघर्षों के आर्थिक व मानवीय परिणाम सबसे गहराई से भुगत रहे हैं — यह संदर्भ इस मुलाकात की पृष्ठभूमि में निर्णायक था।

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जयशंकर का बयान

न्यूयॉर्क में एक अलग कार्यक्रम में जयशंकर ने अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल के साथ बातचीत में कहा कि भारत जो नीति दशकों से अपनाता आया है — यानी एकाधिक देशों के साथ स्वतंत्र रूप से संबंध संभालना — वही नीति अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका भी अपना रहा है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।" उनका आशय था कि अमेरिका अब एक साथ चीन, रूस, यूक्रेन और एशिया यूरोप के देशों से समानांतर कूटनीतिक संबंध निभा रहा है।

च्यूइंगम वाला तंज — जयशंकर का चुटीला अंदाज़

रसेल ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए अमेरिकी मुहावरे 'च्यूइंग गम चबाना और चलना' का इस्तेमाल किया — जिसका अर्थ है एक साथ कई काम संभालना। जयशंकर ने इसी मुहावरे को पलटते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में जवाब दिया, "मुझे लगता है कि वॉशिंगटन में उस च्यूइंगम की काफी बड़ी सप्लाई है।"

यह टिप्पणी इस ओर इशारा कर रही थी कि अमेरिका खुद परस्पर विरोधी हितों वाले अनेक देशों के साथ एक साथ रिश्ते निभाने की कोशिश कर रहा है — वही काम जो भारत को पहले 'गुटनिरपेक्षता' के नाम पर आलोचना का सामना करना पड़ता था।

वैश्विक कूटनीति में नया यथार्थ

जयशंकर ने कहा कि एक दौर था जब भारत जैसे विकासशील देशों को सलाह दी जाती थी कि वे अपने कूटनीतिक संबंधों को किसी एक ध्रुव पर केंद्रित करें और 'बहुत अधिक विकल्प' न रखें। इसके विपरीत, खुद अमेरिका एक महाशक्ति के रूप में असीमित कूटनीतिक स्वतंत्रता का उपयोग करता रहा।

उन्होंने कहा, "आज यह दिखावा सभी के लिए खत्म हो चुका है। अब हर कोई खुले तौर पर हर किसी के साथ रिश्ते रख रहा है।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "एक बार जब वॉशिंगटन इस मामले में आगे बढ़ता है तो एक तरह से यह पूरी दुनिया का सवाल बन जाता है। यही आज की हकीकत है।"

आगे का एजेंडा

यह मुलाकात संयुक्त राष्ट्र सत्र के हाशिये पर हुई कई उच्च स्तरीय बैठकों का हिस्सा है। भारत ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है, और जयशंकर की यह यात्रा उसी रणनीतिक कूटनीति की कड़ी है। आने वाले दिनों में अन्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरा कूटनीतिक संदेश है। दशकों तक भारत की बहु संरेखण नीति को 'अनिर्णायक' या 'अस्पष्ट' बताकर खारिज किया गया; अब जब अमेरिका खुद चीन, रूस और यूक्रेन से एक साथ बातचीत कर रहा है, तो वह ढाँचा वैध हो गया है। इसमें विरोधाभास यह है कि भारत की इसी नीति की आलोचना अक्सर उन्हीं पश्चिमी राजधानियों से आती थी। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को 'चुटीला' बताकर आगे बढ़ जाती है — असल खबर यह है कि भारत अब वैश्विक बहु ध्रुवीयता का सैद्धांतिक आधार तैयार कर रहा है, जो उसकी अपनी कूटनीतिक मान्यता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और गुटेरेस की मुलाकात में क्या हुआ?
29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री जयशंकर ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की, जिसमें वैश्विक संघर्षों को कम करने और ग्लोबल साउथ पर उनके प्रभाव पर चर्चा हुई। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान हुई।
जयशंकर ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि भारत जो नीति दशकों से अपनाता रहा है — कई देशों के साथ एक साथ संबंध निभाना — वही नीति अब अमेरिका भी अपना रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।'
जयशंकर का 'च्यूइंगम' वाला बयान किस संदर्भ में आया?
पूर्व अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल ने 'च्यूइंग गम चबाना और चलना' — यानी एक साथ कई काम करने — के मुहावरे का इस्तेमाल किया था। जयशंकर ने इसी का जवाब देते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि वॉशिंगटन में उस च्यूइंगम की बड़ी सप्लाई है, इशारा करते हुए कि अमेरिका परस्पर विरोधी हितों वाले अनेक देशों से एकसाथ रिश्ते निभा रहा है।
ग्लोबल साउथ के संदर्भ में यह मुलाकात क्यों अहम है?
ग्लोबल साउथ के देश यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के संघर्षों के आर्थिक और मानवीय परिणाम सबसे अधिक भुगत रहे हैं। भारत इन देशों की आवाज़ के रूप में UN में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है, और यह बैठक उसी रणनीति का हिस्सा है।
जयशंकर का वैश्विक कूटनीति पर क्या नज़रिया है?
जयशंकर का मानना है कि अब हर देश खुले तौर पर हर किसी के साथ संबंध रख रहा है और पुराना दिखावा — जिसमें छोटे देशों को एकध्रुवीय रहने की सलाह दी जाती थी — समाप्त हो चुका है। उनके अनुसार बहु संरेखण अब वैश्विक कूटनीति की नई सच्चाई बन चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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