23 सितंबर 2026
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जयशंकर ने न्यूयॉर्क में ग्लोबल साउथ मंत्री-बैठक की अध्यक्षता, UNGA के इतर SDG और AI पर बनी सहमति

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जयशंकर ने न्यूयॉर्क में ग्लोबल साउथ मंत्री-बैठक की अध्यक्षता, UNGA के इतर SDG और AI पर बनी सहमति

सारांश

न्यूयॉर्क में UNGA के इतर जयशंकर की अध्यक्षता में हुई ग्लोबल साउथ की यह बैठक महज़ एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी — यह वैश्विक दक्षिण की बढ़ती एकजुटता का संकेत है। SDG विलंब, AI की डिजिटल खाई और संयुक्त राष्ट्र सुधार — तीनों मुद्दों पर सहमति बनी।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में UNGA के 81वें सत्र के समानांतर ग्लोबल साउथ की उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक का विषय था: 'एक उज्ज्वल भविष्य की ओर साथ-साथ आगे बढ़ना: सशक्त वैश्विक दक्षिण का मज़बूत पक्ष' ।
खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा , SDG में देरी , समुद्री सुरक्षा और जलवायु चरम घटनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
देशों ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की तत्काल ज़रूरत पर सहमति जताई; बहुपक्षीय संस्थाओं के कमज़ोर होने पर साझा चिंता व्यक्त की।
AI तकनीक को मानव-केंद्रित बनाने और विकासशील देशों को डिजिटल परिवर्तन में शामिल करने पर ज़ोर दिया गया।
जयशंकर ने एक्स पर साझा किया कि आपूर्ति श्रृंखला, वित्त और कनेक्टिविटी में अवरोध विकासशील देशों के लिए अस्वीकार्य हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के समानांतर आयोजित 'ग्लोबल साउथ' के समान विचारधारा वाले देशों और सहयोगियों की उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का केंद्रीय विषय था — 'एक उज्ज्वल भविष्य की ओर साथ-साथ आगे बढ़ना: सशक्त वैश्विक दक्षिण का मज़बूत पक्ष'। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक दक्षिण के देश बहुपक्षीय मंचों पर अपनी आवाज़ को और बुलंद करने की कोशिश में हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में वैश्विक दक्षिण के समक्ष मौजूद कई गंभीर चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। इनमें जारी सशस्त्र संघर्षों के कारण खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव, व्यापार एवं निवेश प्रवाह में बढ़ती अस्थिरता, संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में समुद्री यात्रियों की सुरक्षा, चरम जलवायु घटनाएँ और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को हासिल करने में हो रही देरी प्रमुख रूप से सामने आए।

प्रतिभागी देशों ने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा वैश्विक संकटों का असर विकासशील देशों पर असमान रूप से पड़ रहा है, जिससे विकास की खाई और गहरी होती जा रही है।

बहुपक्षीय सुधार पर साझा चिंता

मित्र देशों ने बहुपक्षीय संस्थाओं के कमज़ोर पड़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका जोर था कि वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र में व्यापक और तत्काल सुधार आवश्यक हैं। गौरतलब है कि ग्लोबल साउथ के देश लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी भागीदारी बढ़ाने की माँग उठाते रहे हैं।

प्रतिभागियों ने बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक दक्षिण के बीच बेहतर समन्वय की ज़रूरत बताते हुए दक्षिण-दक्षिण सहयोग को व्यापक बनाने और एक-दूसरे की क्षमताओं तथा संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर सहमति जताई।

AI और तकनीकी बदलाव पर विशेष चर्चा

बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने स्पष्ट किया कि AI से होने वाला तकनीकी परिवर्तन दुनिया में नई डिजिटल खाई उत्पन्न करने का माध्यम नहीं बनना चाहिए। यह भी कहा गया कि वैश्विक दक्षिण को इस परिवर्तन का सक्रिय हिस्सा बनना होगा और AI का उपयोग मानव-केंद्रित तरीके से किया जाना चाहिए।

जयशंकर का संदेश: आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सुरक्षा

बैठक से पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बैठक के प्रमुख बिंदुओं का सारांश साझा किया। उन्होंने बताया कि आपूर्ति श्रृंखलाओं, वित्त और कनेक्टिविटी में ऐसे अवरोधों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए जो विकासशील देशों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उन्होंने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को विकास की बुनियादी ज़रूरत करार दिया।

समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर भी विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करते हुए समुद्री मार्गों और वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में समुद्री यात्रियों की हिफाज़त पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

आगे की राह

बैठक में भाग लेने वाले देशों ने अपनी सामूहिक स्थिति को मज़बूत करने और एक संतुलित, सर्व-समावेशी तथा न्यायपूर्ण वैश्विक शासन ढाँचे के लिए प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह बैठक इस लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण है कि UNGA का 81वाँ सत्र ऐसे वक्त में हो रहा है जब भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं और विकासशील देश अधिक प्रभावी वैश्विक प्रतिनिधित्व की माँग कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यूयॉर्क में ग्लोबल साउथ की मंत्रिस्तरीय बैठक क्यों हुई?
यह बैठक UNGA के 81वें सत्र के समानांतर 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित की गई, जिसमें समान विचारधारा वाले विकासशील देशों ने वैश्विक चुनौतियों पर सामूहिक रुख तय किया। इसका उद्देश्य बहुपक्षीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज़ को मज़बूत करना था।
बैठक में कौन-कौन से मुख्य मुद्दे उठाए गए?
बैठक में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार में अस्थिरता, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा, चरम जलवायु घटनाएँ, SDG में देरी, AI सहयोग और संयुक्त राष्ट्र सुधार प्रमुख विषय रहे। देशों ने यह भी माना कि वैश्विक संकटों का बोझ विकासशील देशों पर असमान रूप से पड़ रहा है।
जयशंकर ने एक्स पर बैठक के बारे में क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर बताया कि बैठक में आपूर्ति श्रृंखलाओं, वित्त और कनेक्टिविटी में ऐसे अवरोधों को अस्वीकार करने पर ज़ोर दिया गया जो विकासशील देशों के लिए नई मुश्किलें पैदा करें। उन्होंने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को विकास की बुनियादी ज़रूरत बताया।
बैठक में AI पर क्या सहमति बनी?
प्रतिभागी देशों ने सहमति जताई कि AI से होने वाला तकनीकी बदलाव नई डिजिटल खाई नहीं पैदा करना चाहिए और वैश्विक दक्षिण को इस परिवर्तन का सक्रिय हिस्सा बनाना ज़रूरी है। AI के उपयोग को मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से संचालित किए जाने पर भी बल दिया गया।
ग्लोबल साउथ के देश संयुक्त राष्ट्र सुधार क्यों चाहते हैं?
इन देशों का मानना है कि मौजूदा संयुक्त राष्ट्र ढाँचा वैश्विक दक्षिण की आबादी और चुनौतियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करता। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बहुपक्षीय संस्थाओं के कमज़ोर पड़ने से विकासशील देश सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, इसलिए व्यापक और तत्काल सुधार आवश्यक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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