अखिलेश यादव पर नितिन नवीन के बयान को योगी मंत्रियों का समर्थन, ओपी राजभर और ब्रजेश पाठक बोले — दुनिया जानती है सच
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव को 'माफियाओं का सहयोगी' बताए जाने के बयान पर योगी सरकार के मंत्रियों ने 7 नवंबर 2026 को खुलकर समर्थन जताया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर ने कहा कि यह बात किसी से छिपी नहीं है और पूरी दुनिया इस सच्चाई से वाकिफ है। यह विवाद लखनऊ की राजनीति में उस वक्त और गरमा गया जब अखिलेश यादव का 12 दिसंबर को अयोध्या में रामलला के पारिवारिक दर्शन का कार्यक्रम सामने आया।
नितिन नवीन का बयान और विवाद की पृष्ठभूमि
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक इंटरव्यू में सपा मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे वोट-बैंक की राजनीति के चलते माफियाओं के सहयोगी बने रहते हैं। उनका यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस का केंद्र बन गया। भाजपा और सपा के बीच इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं हैं, लेकिन इस बार पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी की ओर से आए बयान ने विवाद को एक नया आयाम दे दिया।
ओपी राजभर का समर्थन और अखिलेश पर तंज
योगी सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे नितिन नवीन के बयान से 'बिल्कुल सहमत' हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी अखिलेश यादव के साथ रहते थे और बड़े-बड़े माफिया उनके साथ घूमते थे। गौरतलब है कि अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी दोनों की मौत हो चुकी है, और सपा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताती रही है।
अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दर्शन पर राजभर ने पूर्वांचल की एक लोकप्रिय कहावत का सहारा लिया — 'अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।' उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव पहले अयोध्या गए लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए, वाराणसी में काशी विश्वनाथ के दर्शन नहीं किए और मथुरा में भी दर्शन से दूर रहे। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'भगवान ने सद्बुद्धि दी है तो दर्शन करने जा रहे हैं — इसी सद्बुद्धि के साथ मथुरा और काशी की तारीख भी बता दीजिए।'
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का बयान
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे पर कहा, 'देर आए, दुरुस्त आए।' उन्होंने कहा कि भगवान उन्हें सद्बुद्धि दें और उन्हें सनातन संस्कृति को अपनाना चाहिए। पाठक ने यह भी जोड़ा कि अयोध्या में कारसेवकों पर जो गोलियां चलाई गई थीं, उसके लिए अखिलेश यादव को माफी भी माँगनी चाहिए। नितिन नवीन के बयान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि अखिलेश यादव माफियाओं को पालते हैं।
सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ परोक्ष रूप से शुरू हो चुकी हैं। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से इस तरह के बयान सियासी ध्रुवीकरण को और गहरा करते हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से इस विवाद पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि अखिलेश यादव का 12 दिसंबर को परिवार सहित रामलला के दर्शन का कार्यक्रम एक अलग राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
अखिलेश यादव के अयोध्या दर्शन के बाद भाजपा और सपा की नोकझोंक और तेज होने के आसार हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिंदू धार्मिक स्थलों पर विपक्षी नेताओं के दर्शन को लेकर सत्तारूढ़ दल की प्रतिक्रिया यूपी की चुनावी राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों की रणनीति और स्पष्ट होगी।