राजभर का अखिलेश पर तीखा वार: 'पीडीए यानी पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश, यादव ढूंढना बंद करें'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजभर का अखिलेश पर तीखा वार: 'पीडीए यानी पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश, यादव ढूंढना बंद करें'

सारांश

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरक्षण विवाद तेज हो गया है। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सपा के 'पीडीए' को 'पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश' बताते हुए 2013 के यूपीपीएससी नियुक्ति कांड और एसडीएम नियुक्तियों में यादव-पक्षपात के आरोप दोहराए — 2027 चुनाव से पहले पिछड़ी जातियों की राजनीति का नया मोर्चा खुलता दिख रहा है।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 18 मई को एक्स पर पोस्ट कर सपा के 'पीडीए' को 'पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश' करार दिया।
अखिलेश यादव ने 20 मई को 'पीडीए ऑडिट, आरक्षण की लूट' विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है।
राजभर ने 2013 के यूपीपीएससी अध्यक्ष नियुक्ति विवाद का उल्लेख किया, जिसे 14 अक्टूबर 2015 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 'अवैध' घोषित किया था।
राजभर के अनुसार सपा सरकार में 86 में से 56 एसडीएम नियुक्तियाँ यादव समुदाय से हुई थीं।
राजभर ने राजभर, निषाद, कश्यप, मौर्य सहित 19 से अधिक बहुजन जातियों के युवाओं के लिए समान अवसर की माँग उठाई।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 18 मई को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर आरक्षण के मुद्दे पर कड़ा पलटवार किया। राजभर ने सपा के 'पीडीए' फॉर्मूले को 'पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश' करार देते हुए आरोप लगाया कि यह गठबंधन वास्तव में पिछड़े और बहुजन समुदायों के लिए नहीं, बल्कि यादव जाति को लाभ पहुँचाने का माध्यम है।

विवाद की पृष्ठभूमि

अखिलेश यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरने के लिए 20 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसका विषय 'पीडीए ऑडिट, आरक्षण की लूट' रखा गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'भाजपा पीडीए के आरक्षण की लूट का गैंग है।' यह बयान राजभर की तीखी प्रतिक्रिया का तात्कालिक कारण बना।

राजभर का एक्स पर पलटवार

मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'लगता है कि अखिलेश यादव का हाल एकदम ठीक नहीं है। हम उनसे सवाल पूछते हैं और वो साधु-संतों को गोली देते हैं। आप और आपके लोग बात-बात पर साधु-संतों को गाली देना बंद करें। अभी तो कम दुर्गति हुई है, आगे आप लोगों को बड़ा श्राप भोगना पड़ेगा।'

2013 के यूपीपीएससी विवाद का उल्लेख

राजभर ने अपनी पोस्ट में 2013 के उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) नियुक्ति विवाद को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने आयोग के अध्यक्ष पद पर एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया था, जो हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी था, और इस प्रक्रिया में 80 से अधिक योग्य उम्मीदवारों के साथ छल किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस नियुक्ति को 14 अक्टूबर 2015 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने 'अवैध', 'मनमाना' और संविधान के अनुच्छेद 316 का उल्लंघन घोषित किया था।

एसडीएम नियुक्तियों पर सवाल

राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान 86 में से 56 एसडीएम की नियुक्तियाँ यादव समुदाय से हुई थीं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि वे भी वह 'सीक्रेट फॉर्मूला' जानना चाहते हैं, जिससे राजभर, चौहान, निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, कश्यप, प्रजापति, पाल, लोहार, बढ़ई, कहार, धीमर, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, धोबी, सैनी और अन्य बहुजन जातियों के युवा भी एसडीएम बन सकें।

राजनीतिक संदर्भ

यह वाक्युद्ध ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं। पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों को लेकर सपा और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही उसकी जातिगत संरचना पर सवाल उठाना भी आसान है — और राजभर ने यही किया। गौरतलब है कि एसडीएम नियुक्तियों और यूपीपीएससी विवाद जैसे पुराने मुद्दों को फिर उठाना दर्शाता है कि भाजपा गठबंधन चाहता है कि 'आरक्षण की लूट' का आरोप सपा पर ही पलटे। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये आरोप जनता के बीच विश्वसनीय साबित होते हैं या फिर जवाबी आरोपों में दब जाते हैं।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा का 'पीडीए' फॉर्मूला वास्तव में 'पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश' है और इसकी आड़ में केवल यादव समुदाय को फायदा पहुँचाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सपा सरकार में 86 में से 56 एसडीएम यादव समुदाय से नियुक्त किए गए थे।
सपा का 'पीडीए ऑडिट, आरक्षण की लूट' प्रेस कॉन्फ्रेंस क्या है?
अखिलेश यादव ने 20 मई को इस विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें वे भाजपा सरकार पर पिछड़े वर्गों के आरक्षण में हेरफेर के आरोप लगाने वाले हैं। इससे पहले उन्होंने एक्स पर लिखा था कि भाजपा पीडीए के आरक्षण की लूट का गैंग है।
2013 का यूपीपीएससी विवाद क्या था जिसका राजभर ने उल्लेख किया?
राजभर के अनुसार, अखिलेश यादव सरकार ने 2013 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया था जो हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2015 को इस नियुक्ति को 'अवैध' और संविधान के अनुच्छेद 316 का उल्लंघन घोषित किया था।
राजभर किन जातियों के लिए आरक्षण की बात कर रहे हैं?
राजभर ने राजभर, चौहान, निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, कश्यप, प्रजापति, पाल, लोहार, बढ़ई, कहार, धीमर, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, धोबी और सैनी सहित 19 से अधिक बहुजन जातियों का उल्लेख किया। उनका सवाल था कि इन समुदायों के युवाओं को एसडीएम जैसे पदों पर क्यों उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियों का समर्थन हासिल करना दोनों पक्षों के लिए निर्णायक है। सपा और भाजपा गठबंधन दोनों इन जातियों को अपना असली हितैषी साबित करने की कोशिश में हैं, और आरक्षण का मुद्दा इस लड़ाई का केंद्र बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले