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अल-कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम पर भारतीय खुफिया एजेंसियों की कड़ी नजर, भारत में टारगेट किलिंग नेटवर्क बनाने की आशंका

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अल-कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम पर भारतीय खुफिया एजेंसियों की कड़ी नजर, भारत में टारगेट किलिंग नेटवर्क बनाने की आशंका

सारांश

अल-कायदा से जुड़ा बांग्लादेशी संगठन ABT भारत में 'लोन वुल्फ' टारगेट किलिंग के लिए ऑनलाइन भर्ती कर रहा है और पश्चिम बंगाल में दुष्प्रचार अभियान की योजना बना रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसियाँ इसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।

मुख्य बातें

भारतीय खुफिया एजेंसियाँ अल-कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) और अंसार अल-इस्लाम (AAI) की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रही हैं।
ABT जानबूझकर 'लो-प्रोफाइल' रणनीति अपना रहा है लेकिन ऑनलाइन भर्ती अभियान तेज है, जिसका मुख्य निशाना भारत है।
संगठन का उद्देश्य पारंपरिक आतंकी हमलों की बजाय टारगेट किलिंग के लिए 'लोन वुल्फ' व्यक्तियों को कट्टरपंथी बनाना है।
ABT और AAI पाकिस्तान मिलकर भर्ती गतिविधियाँ बढ़ा रहे हैं; दोनों अल-कायदा की विचारधारा से प्रेरित हैं।
कथित तौर पर पश्चिम बंगाल को निशाना बनाकर फर्जी तस्वीरों और झूठी कहानियों से हिंसा भड़काने की योजना है।
अधिकारियों के अनुसार ABT अभी 'टेस्टिंग द वॉटर' चरण में है और भारत में पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है।

भारतीय खुफिया एजेंसियां अल-कायदा से संबद्ध संगठन अंसार अल-इस्लाम (AAI) और उसके बांग्लादेश स्थित विंग अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, ABT भारत में ऑनलाइन भर्ती अभियान तेज कर रहा है और टारगेट किलिंग के लिए स्वतंत्र रूप से काम करने वाले व्यक्तियों का नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

संगठन की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति

अंसार अल-इस्लाम की स्थापना 2021 में इराक में हुई थी, जहाँ इसने शुरुआत में धर्मनिरपेक्ष कुर्द गुटों और अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष किया था। अधिकारियों के अनुसार, इराक में इस संगठन का ढाँचा अब काफी हद तक बिखर चुका है। हालाँकि, इसका बांग्लादेशी विंग ABT फिर से सक्रिय होने के संकेत दे रहा है।

एक खुफिया ब्यूरो अधिकारी ने बताया कि ABT फिलहाल जमीनी स्तर पर बहुत सक्रिय नहीं है और जानबूझकर 'लो-प्रोफाइल' रणनीति अपना रहा है ताकि सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान उस पर कम जाए। बांग्लादेश में कड़े दमन के बाद उसकी जमीनी गतिविधियाँ सीमित हो गई हैं, लेकिन ऑनलाइन गतिविधियाँ तेज हैं।

भारत को निशाना बनाने की रणनीति

अधिकारियों का कहना है कि ABT भारत में वही मॉडल दोहराना चाहता है जो उसने बांग्लादेश में अपनाया था। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों का नेटवर्क तैयार करना है जो कथित तौर पर 'इस्लाम-विरोधी' बताए जाने वाले व्यक्तियों — जैसे धर्मनिरपेक्ष लेखकों, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक वर्ग — को निशाना बना सकें।

सूत्रों के मुताबिक, ABT का फोकस पारंपरिक आतंकी मॉड्यूल बनाकर विस्फोट या बड़े हमले करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तियों को कट्टरपंथी बनाना है जो अकेले काम करते हुए टारगेट किलिंग को अंजाम दे सकें। यह 'लोन वुल्फ' शैली की रणनीति संगठित आतंकी गुटों की तुलना में पहचानना और रोकना अधिक कठिन होती है।

पाकिस्तानी समकक्ष से तालमेल

एक अधिकारी के अनुसार, ABT अपने पाकिस्तानी समकक्ष AAI पाकिस्तान के साथ मिलकर भर्ती गतिविधियाँ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें मुख्य फोकस भारत पर है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि AAI पाकिस्तान की तुलना में ABT अधिक खतरनाक है। दोनों संगठन अल-कायदा की विचारधारा और ओसामा बिन लादेन के लेखन को अपने भर्ती अभियानों में प्रमुखता से इस्तेमाल करते हैं।

दुष्प्रचार अभियान और पश्चिम बंगाल पर नजर

अधिकारियों के अनुसार, ABT भारत में बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार अभियान चलाने की भी योजना बना रहा है, जिसका मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल पर होगा। कथित तौर पर यह संगठन फर्जी तस्वीरें और झूठी कहानियाँ फैलाकर घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश कर सकता है।

खुफिया एजेंसियों की निगरानी और आगे की स्थिति

अधिकारियों का कहना है कि ABT अभी भारत में पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है और स्थिति को 'टेस्टिंग द वॉटर' — यानी परिस्थितियाँ भाँपने — के चरण में देखा जा रहा है। भारतीय खुफिया एजेंसियाँ इसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा चिंताएँ पहले से बढ़ी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ धर्मनिरपेक्ष ब्लॉगरों और लेखकों की हत्याएँ हुईं। चिंताजनक यह है कि पश्चिम बंगाल में दुष्प्रचार अभियान की योजना केवल आतंकवाद नहीं, बल्कि सामाजिक ध्रुवीकरण का हथियार है। खुफिया निगरानी जरूरी है, लेकिन असली परीक्षा ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण को रोकने की क्षमता की है — जो अभी तक भारत की सबसे कमजोर कड़ी रही है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) क्या है और यह भारत के लिए खतरा क्यों है?
ABT अल-कायदा से जुड़े संगठन अंसार अल-इस्लाम का बांग्लादेशी विंग है, जो भारत में ऑनलाइन भर्ती और टारगेट किलिंग नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहा है। खुफिया अधिकारियों के अनुसार यह AAI पाकिस्तान की तुलना में अधिक खतरनाक माना जा रहा है।
ABT भारत में किस तरह की गतिविधियाँ चला रहा है?
सूत्रों के मुताबिक ABT भारत में ऑनलाइन माध्यमों से कट्टरपंथीकरण और भर्ती कर रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को तैयार करना है जो अकेले काम करते हुए धर्मनिरपेक्ष लेखकों, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक वर्ग को कथित तौर पर निशाना बना सकें।
पश्चिम बंगाल को ABT का निशाना क्यों बताया जा रहा है?
अधिकारियों के अनुसार ABT पश्चिम बंगाल में फर्जी तस्वीरों और झूठी कहानियों के जरिए दुष्प्रचार अभियान चलाने की योजना बना रहा है। इसका मकसद घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करके सांप्रदायिक हिंसा भड़काना है।
क्या ABT अभी भारत में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है?
नहीं, अधिकारियों का कहना है कि ABT अभी 'टेस्टिंग द वॉटर' चरण में है और भारत में पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है। खुफिया एजेंसियाँ इसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
अंसार अल-इस्लाम (AAI) की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
अंसार अल-इस्लाम की स्थापना 2021 में इराक में हुई थी, जहाँ इसने शुरुआत में धर्मनिरपेक्ष कुर्द गुटों और अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। अधिकारियों के अनुसार इराक में इसका ढाँचा अब काफी हद तक बिखर चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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