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12वीं ब्रिक्स पर्यावरण बैठक: सतत जीवनशैली और जलवायु लचीलापन पर सर्वसम्मति से संयुक्त बयान अपनाया

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12वीं ब्रिक्स पर्यावरण बैठक: सतत जीवनशैली और जलवायु लचीलापन पर सर्वसम्मति से संयुक्त बयान अपनाया

सारांश

नई दिल्ली में 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक सर्वसम्मत संयुक्त बयान के साथ संपन्न हुई। चार परिणाम दस्तावेजों में सतत जीवनशैली, वनाग्नि प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन पर ठोस सहयोग की रूपरेखा तय की गई — भारत की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखते हुए।

मुख्य बातें

12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में सर्वसम्मत मंत्रिस्तरीय संयुक्त बयान के साथ संपन्न हुई।
संयुक्त बयान में चार परिणाम दस्तावेज शामिल हैं — सतत जीवनशैली, भूमि प्रबंधन, वनाग्नि प्रतिक्रिया और जलवायु अनुकूलन पर।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'मिशन लाइफ' और 'एक पेड़ माँ के नाम' को पारिस्थितिक बहाली के भारतीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
भारत का नया NDC (2031–2035) जलवायु कार्रवाई, समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बैठक में ब्रिक्स देशों ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से जलवायु समाधान विकसित करने पर सहमति जताई।

नई दिल्ली में 18 अगस्त 2026 को संपन्न हुई 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से एक मंत्रिस्तरीय संयुक्त बयान अपनाया, जिसमें सतत जीवनशैली, जलवायु लचीलापन और भूमि प्रबंधन पर सहयोग के लिए चार परिणाम दस्तावेज शामिल किए गए। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक को ग्लोबल साउथ की पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को ब्रिक्स एजेंडे में केंद्रीय स्थान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संयुक्त बयान में क्या शामिल है

अपनाए गए संयुक्त बयान में ब्रिक्स संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से सतत जीवनशैली में ज्ञान साझाकरण, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। इसके अतिरिक्त, मरुस्थलीकरण से निपटने, सतत भूमि प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती के लिए एकीकृत भू-परिदृश्य प्रबंधन के ब्रिक्स सिद्धांत भी इसमें शामिल किए गए हैं।

बयान में ब्रिक्स देशों में वनाग्नि की तैयारी और प्रतिक्रिया पर साझा समझ विकसित करने तथा पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन के जरिए जलवायु लचीलापन बढ़ाने के सिद्धांत भी निर्धारित किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर वनाग्नि की घटनाएँ और भूमि क्षरण की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है।

भूपेंद्र यादव का संबोधन

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बैठक में कहा, "सहयोग और आपसी सीख की भावना को दर्शाते हुए, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत पर्यावरण कार्य समूह के संकलन लॉन्च किए गए हैं। इन संकलनों में ब्रिक्स सदस्य देशों के अनुभव, नवाचार दृष्टिकोण, पारंपरिक ज्ञान और साझा अनुभवों का समृद्ध संग्रह प्रस्तुत किया गया है।"

यादव ने यह भी रेखांकित किया कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण से प्रेरित है जिसमें ग्लोबल साउथ की चिंताओं को एजेंडे में सबसे आगे रखा गया है। उन्होंने ब्रिक्स को "सहयोग और स्थिरता के लिए लचीलापन एवं नवाचार का मंच" के रूप में पुनः परिभाषित करने की बात कही।

जलवायु चुनौतियाँ और भारत का दृष्टिकोण

पर्यावरण मंत्री ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास, प्रदूषण और आपदा जोखिम जैसी बढ़ती वैश्विक चुनौतियों पर विशेष ज़ोर दिया — खासकर उन विकासशील देशों के संदर्भ में जहाँ पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की प्राथमिकताएँ अक्सर आपस में उलझी होती हैं। उन्होंने कहा कि "पारिस्थितिक बहाली और मानव विकास साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।"

भारत के उदाहरण के रूप में उन्होंने 'मिशन लाइफ' और 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो पारिस्थितिक बहाली को जन भागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व से जोड़ती हैं। यादव ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का भी आह्वान किया, ताकि समाधान वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़, स्थानीय रूप से प्रासंगिक और सामाजिक रूप से समावेशी बनें।

भारत का नया राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्य

यादव ने यह भी उजागर किया कि 2031–2035 के लिए भारत का नया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने के साथ-साथ समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा को समर्थन देने की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गौरतलब है कि यह नया NDC भारत के पिछले जलवायु लक्ष्यों की तुलना में अधिक विस्तृत और बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं की ओर संकेत करता है।

बैठक में अन्य गतिविधियाँ

पर्यावरण मंत्रियों की इस बैठक में पैनल चर्चाएँ और साइड इवेंट भी आयोजित किए गए। इनमें 'जन-केंद्रित, समुदाय-आधारित अनुकूलन' विषय पर ब्रिक्स जलवायु परिवर्तन उच्चस्तरीय संवाद और एकीकृत भू-परिदृश्य आधारित हरियाली पर चर्चा प्रमुख रही, जिसमें ब्रिक्स देशों ने लचीले भू-परिदृश्य और सतत विकास के अपने अनुभव साझा किए। आने वाले महीनों में इन सिद्धांतों को राष्ट्रीय नीतियों में कैसे शामिल किया जाएगा, यह देखना अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — ब्रिक्स के भीतर चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के अलग-अलग उत्सर्जन प्रोफाइल और विकास प्राथमिकताएँ इन साझा सिद्धांतों को ज़मीन पर उतारना जटिल बनाती हैं। भारत की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ की आवाज़ को केंद्र में लाने की कोशिश सराहनीय है, पर यह देखना बाकी है कि 'संकलन' और 'सिद्धांत' कब बाध्यकारी लक्ष्यों में तब्दील होंगे। जलवायु वित्त पर ठोस संख्याओं का अभाव और 'पारंपरिक ज्ञान' पर ज़ोर — बिना सत्यापन ढाँचे के — इस बयान को नीतिगत दस्तावेज़ से अधिक इरादे की घोषणा बनाता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में क्या तय हुआ?
18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में संपन्न इस बैठक में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से एक मंत्रिस्तरीय संयुक्त बयान अपनाया, जिसमें चार परिणाम दस्तावेज शामिल हैं। इनमें सतत जीवनशैली, मरुस्थलीकरण रोकथाम, वनाग्नि प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन पर ब्रिक्स सहयोग की रूपरेखा तय की गई।
ब्रिक्स के संयुक्त बयान में जलवायु लचीलापन पर क्या कहा गया?
संयुक्त बयान में पारंपरिक ज्ञान पर आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन के ज़रिए जलवायु लचीलापन बढ़ाने के सिद्धांत तय किए गए हैं। साथ ही वनाग्नि की पूर्व चेतावनी, तैयारी और आग के बाद की रिकवरी पर ब्रिक्स देशों के बीच साझा समझ विकसित करने पर भी सहमति बनी।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का पर्यावरण एजेंडे पर क्या प्रभाव रहा?
भारत की अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ की पर्यावरणीय चिंताओं — जैसे जलवायु वित्त, अनुकूलन और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना — को एजेंडे में प्राथमिकता दी गई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'मिशन लाइफ' और 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसी भारतीय पहलों को ब्रिक्स के साझा मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।
भारत का नया NDC 2031–2035 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
2031–2035 के लिए भारत का नया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) जलवायु कार्रवाई को समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पिछले NDC की तुलना में अधिक महत्वाकांक्षी माना जा रहा है और ब्रिक्स मंच पर भारत की जलवायु साख को मज़बूत करता है।
ब्रिक्स पर्यावरण बैठक में वनाग्नि पर क्या निर्णय हुए?
बैठक में ब्रिक्स देशों ने जंगल की आग को रोकने, पूर्व चेतावनी प्रणाली, प्रतिक्रिया तंत्र और आग के बाद की रिकवरी पर आपसी सहयोग को मज़बूत करने पर सहमति जताई। यह सहमति एक साझा समझ दस्तावेज के रूप में संयुक्त बयान में शामिल की गई है।
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