ब्रिक्स STI बैठक में जितेंद्र सिंह का आह्वान: उभरती तकनीकों को सुलभ व भरोसेमंद बनाए वैश्विक सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 22 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 14वीं ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) मंत्रिस्तरीय बैठक में कहा कि उभरती तकनीकों को सुलभ, किफायती, भरोसेमंद और टिकाऊ बनाए रखने के लिए मज़बूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से अपील की कि वे इनोवेशन को केवल आर्थिक लाभ का साधन न बनाकर मानवता की सेवा का माध्यम बनाएं।
मुख्य घटनाक्रम
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. सिंह ने ब्रिक्स सहयोगी देशों से कहा कि वे अत्याधुनिक शोध, इनोवेशन फंडिंग, प्रतिभा आवाजाही, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर की साझेदारी, स्टार्टअप पार्टनरशिप और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग के रास्ते अपनाएं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा सहयोग एक भविष्य-उन्मुख ब्रिक्स STI ढाँचा खड़ा करने में मदद करेगा जो वैश्विक चुनौतियों से निपटने और 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं का समर्थन करने में सक्षम हो।
मंत्री ने रेखांकित किया कि आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटीरियल्स, बायोटेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकें बदलाव की रफ़्तार को तेज़ कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा चरम पर है और विकासशील देश डिजिटल विभाजन को पाटने की कोशिश में जुटे हैं।
भारत की पहलें और वैश्विक भूमिका
डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक पहुँच की चर्चा की। उन्होंने नेशनल क्वांटम मिशन, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन, BioE3 नीति, नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते इकोसिस्टम का उल्लेख किया।
गौरतलब है कि ये पहलें भारत के उस दृष्टिकोण को दर्शाती हैं जिसमें इनोवेशन को आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और टिकाऊ आर्थिक रूपांतरण का साधन माना जाता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत विज्ञान और इनोवेशन के प्रति एक खुले, समावेशी और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध है।
ब्रिक्स अध्यक्षता और थीम
ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि भारत ने 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए 'लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' को थीम के रूप में चुना है। उन्होंने कहा कि यह थीम इस साझा विश्वास को प्रतिबिंबित करती है कि STI को लचीलापन बढ़ाकर, समावेशी विकास को गति देकर और देशों के बीच समान साझेदारी को प्रोत्साहित करके मानवता की सेवा करनी चाहिए।
अपनी विशाल आबादी, वैज्ञानिक प्रतिभा और बढ़ती रिसर्च क्षमताओं के साथ, ब्रिक्स एक सहयोगी, जिम्मेदार और भविष्य-उन्मुख इनोवेशन इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की मज़बूत स्थिति में है — यह डॉ. सिंह का मत था।
STI तंत्र की सराहना
डॉ. सिंह ने STI स्टीयरिंग कमेटी, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न STI वर्किंग ग्रुप्स के योगदान की सराहना की, जिन्होंने बातचीत को व्यावहारिक सहयोग और ठोस नतीजों में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स STI सहयोग अब एक मज़बूत मंच के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें रिसर्च सहयोग, इनोवेशन पार्टनरशिप, युवा वैज्ञानिकों का आदान-प्रदान और विषय-आधारित वर्किंग ग्रुप्स शामिल हैं।
आगे की राह
भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स STI प्राथमिकताओं की व्यापक समीक्षा की गई, ताकि सहयोग को उभरते वैज्ञानिक-तकनीकी क्षेत्रों और समाजों की विकासात्मक आकांक्षाओं के अनुरूप ढाला जा सके। आलोचकों का कहना है कि ब्रिक्स के भीतर भू-राजनीतिक मतभेद व्यावहारिक सहयोग की राह में बाधा बन सकते हैं, लेकिन STI क्षेत्र को अपेक्षाकृत तटस्थ मंच माना जाता है जहाँ साझा हित प्रबल होते हैं।