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ब्रिक्स STI बैठक में जितेंद्र सिंह का आह्वान: उभरती तकनीकों को सुलभ व भरोसेमंद बनाए वैश्विक सहयोग

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ब्रिक्स STI बैठक में जितेंद्र सिंह का आह्वान: उभरती तकनीकों को सुलभ व भरोसेमंद बनाए वैश्विक सहयोग

सारांश

14वीं ब्रिक्स STI मंत्रिस्तरीय बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने साफ़ संदेश दिया — AI, क्वांटम और बायोटेक की दौड़ में 'ग्लोबल साउथ' को पीछे नहीं छूटना चाहिए। भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता इस विश्वास पर टिकी है कि इनोवेशन तभी सार्थक है जब वह समावेशी और मानव-केंद्रित हो।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 14वीं ब्रिक्स STI मंत्रिस्तरीय बैठक में उभरती तकनीकों को सुलभ व भरोसेमंद बनाने के लिए मज़बूत वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।
भारत ने 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए थीम चुनी: 'लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' ।
मंत्री ने AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक, फोटोनिक्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को वैश्विक बदलाव की प्रमुख शक्तियाँ बताया।
भारत की नेशनल क्वांटम मिशन , नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन , BioE3 नीति और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को समावेशी इनोवेशन के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
ब्रिक्स STI प्राथमिकताओं की व्यापक समीक्षा भारत की अध्यक्षता में पूरी की गई, ताकि सहयोग को उभरते क्षेत्रों के अनुरूप बनाया जा सके।

केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 22 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 14वीं ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) मंत्रिस्तरीय बैठक में कहा कि उभरती तकनीकों को सुलभ, किफायती, भरोसेमंद और टिकाऊ बनाए रखने के लिए मज़बूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से अपील की कि वे इनोवेशन को केवल आर्थिक लाभ का साधन न बनाकर मानवता की सेवा का माध्यम बनाएं।

मुख्य घटनाक्रम

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. सिंह ने ब्रिक्स सहयोगी देशों से कहा कि वे अत्याधुनिक शोध, इनोवेशन फंडिंग, प्रतिभा आवाजाही, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर की साझेदारी, स्टार्टअप पार्टनरशिप और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग के रास्ते अपनाएं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा सहयोग एक भविष्य-उन्मुख ब्रिक्स STI ढाँचा खड़ा करने में मदद करेगा जो वैश्विक चुनौतियों से निपटने और 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं का समर्थन करने में सक्षम हो।

मंत्री ने रेखांकित किया कि आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटीरियल्स, बायोटेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकें बदलाव की रफ़्तार को तेज़ कर रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा चरम पर है और विकासशील देश डिजिटल विभाजन को पाटने की कोशिश में जुटे हैं।

भारत की पहलें और वैश्विक भूमिका

डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक पहुँच की चर्चा की। उन्होंने नेशनल क्वांटम मिशन, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन, BioE3 नीति, नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते इकोसिस्टम का उल्लेख किया।

गौरतलब है कि ये पहलें भारत के उस दृष्टिकोण को दर्शाती हैं जिसमें इनोवेशन को आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और टिकाऊ आर्थिक रूपांतरण का साधन माना जाता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत विज्ञान और इनोवेशन के प्रति एक खुले, समावेशी और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्रिक्स अध्यक्षता और थीम

ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि भारत ने 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए 'लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' को थीम के रूप में चुना है। उन्होंने कहा कि यह थीम इस साझा विश्वास को प्रतिबिंबित करती है कि STI को लचीलापन बढ़ाकर, समावेशी विकास को गति देकर और देशों के बीच समान साझेदारी को प्रोत्साहित करके मानवता की सेवा करनी चाहिए।

अपनी विशाल आबादी, वैज्ञानिक प्रतिभा और बढ़ती रिसर्च क्षमताओं के साथ, ब्रिक्स एक सहयोगी, जिम्मेदार और भविष्य-उन्मुख इनोवेशन इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की मज़बूत स्थिति में है — यह डॉ. सिंह का मत था।

STI तंत्र की सराहना

डॉ. सिंह ने STI स्टीयरिंग कमेटी, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न STI वर्किंग ग्रुप्स के योगदान की सराहना की, जिन्होंने बातचीत को व्यावहारिक सहयोग और ठोस नतीजों में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स STI सहयोग अब एक मज़बूत मंच के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें रिसर्च सहयोग, इनोवेशन पार्टनरशिप, युवा वैज्ञानिकों का आदान-प्रदान और विषय-आधारित वर्किंग ग्रुप्स शामिल हैं।

आगे की राह

भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स STI प्राथमिकताओं की व्यापक समीक्षा की गई, ताकि सहयोग को उभरते वैज्ञानिक-तकनीकी क्षेत्रों और समाजों की विकासात्मक आकांक्षाओं के अनुरूप ढाला जा सके। आलोचकों का कहना है कि ब्रिक्स के भीतर भू-राजनीतिक मतभेद व्यावहारिक सहयोग की राह में बाधा बन सकते हैं, लेकिन STI क्षेत्र को अपेक्षाकृत तटस्थ मंच माना जाता है जहाँ साझा हित प्रबल होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा घोषणाओं से परे है। 'ग्लोबल साउथ' के लिए समावेशी इनोवेशन की बात तब तक खोखली रहती है जब तक ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच IP साझेदारी, फंडिंग वितरण और प्रतिभा आवाजाही पर ठोस तंत्र न बने। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ब्रिक्स के भीतर भू-राजनीतिक तनाव — विशेषकर चीन-भारत संबंधों की जटिलता — व्यावहारिक STI सहयोग को सीमित कर सकते हैं। बिना बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं के, यह बैठक एक और उच्च-स्तरीय संवाद बनकर रह जाने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

14वीं ब्रिक्स STI मंत्रिस्तरीय बैठक में क्या हुआ?
नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ब्रिक्स देशों से उभरती तकनीकों को सुलभ, किफायती और भरोसेमंद बनाने के लिए व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग अपनाने का आह्वान किया। बैठक में रिसर्च फंडिंग, प्रतिभा आवाजाही और स्टार्टअप पार्टनरशिप जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए भारत की थीम क्या है?
भारत ने 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए 'लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' थीम चुनी है। यह थीम समावेशी विकास, टिकाऊ प्रगति और देशों के बीच समान साझेदारी के सिद्धांतों पर आधारित है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की कौन-सी तकनीकी पहलों का उल्लेख किया?
उन्होंने नेशनल क्वांटम मिशन, नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन, BioE3 नीति, नेशनल जियोस्पेशियल पॉलिसी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम का उल्लेख किया। ये पहलें भारत के मानव-केंद्रित और समावेशी इनोवेशन दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
ब्रिक्स STI सहयोग 'ग्लोबल साउथ' के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
ब्रिक्स देशों के पास विशाल आबादी, वैज्ञानिक प्रतिभा और बढ़ती रिसर्च क्षमताएं हैं, जो मिलकर एक समावेशी इनोवेशन इकोसिस्टम बना सकती हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, यह सहयोग 'ग्लोबल साउथ' की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने और तकनीकी असमानता को कम करने में सहायक होगा।
ब्रिक्स STI बैठक में किन उभरती तकनीकों पर ज़ोर दिया गया?
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटीरियल्स, बायोटेक्नोलॉजी, फोटोनिक्स, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को वैश्विक बदलाव की प्रमुख शक्तियों के रूप में रेखांकित किया गया। इन क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।
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