18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रामाफोसा का आह्वान: AI, डिजिटल अर्थव्यवस्था में साझेदारी बढ़ाएं सदस्य देश
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों को आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भी साझेदारी गहरी करनी चाहिए। रामाफोसा ने रेखांकित किया कि यह मंच वैश्विक आबादी के लगभग 50 प्रतिशत और वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे किसी भी अन्य बहुपक्षीय मंच से अधिक व्यापक बनाता है।
ब्रिक्स की विशेषता: प्रभुत्व नहीं, साझा विकास
रामाफोसा ने कहा कि ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें कोई भी सदस्य देश दूसरे पर अपना दबदबा कायम करने की कोशिश नहीं करता। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स की खूबसूरती इसकी विविधता में है — विभिन्न महाद्वीपों, संस्कृतियों, भाषाओं और इतिहास वाले देश एक साझे उद्देश्य के लिए एकजुट हैं, और यही विविधता इस समूह की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरती है।' उन्होंने जोर दिया कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स का हिस्सा होने पर गर्व महसूस करता है, क्योंकि यह मंच निवेश, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उसके राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने में सहायक है।
एआई: अवसर भी, चुनौती भी
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने एआई को लेकर संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं को लेकर आशावादी है, क्योंकि यह आर्थिक और सामाजिक विकास दोनों को नई दिशा दे सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी, 'एआई आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बन सकता है, लेकिन इसके संभावित खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।' उनके अनुसार, एआई के विकास और उपयोग के दौरान आवश्यक नियंत्रण तंत्र और जिम्मेदार नियामक ढाँचे पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दुनिया भर की सरकारें एआई गवर्नेंस को लेकर अलग-अलग रास्ते अपना रही हैं।
बहुध्रुवीय विश्व और भू-राजनीतिक संदर्भ
रामाफोसा ने कहा कि आज की दुनिया भू-राजनीतिक तनावों और विभिन्न संघर्षों से जूझ रही है। ऐसे में ब्रिक्स देशों द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था और बहुध्रुवीय विश्व के समर्थन की पुनर्पुष्टि विशेष महत्व रखती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स का साझा दृष्टिकोण यह है कि वैश्विक व्यवस्था में किसी एक देश या शक्ति का एकाधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी देशों की संप्रभुता और विकास को समान महत्व मिलना चाहिए। गौरतलब है कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन (WTO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों की भागीदारी ने इसकी प्रासंगिकता को और बढ़ाया।
भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार सहयोग
शिखर सम्मेलन के साथ-साथ आयोजित भारत-दक्षिण अफ्रीका बिजनेस लीडर्स राउंडटेबल में रामाफोसा ने भारतीय उद्योग जगत की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबारी समुदाय ने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और कई भारतीय कंपनियाँ आज अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत उपस्थिति रखती हैं। उन्होंने ऊर्जा संक्रमण, महत्वपूर्ण खनिज, बुनियादी ढाँचा, कृषि, डिजिटल अर्थव्यवस्था और मानव संसाधन विकास को द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया। रामाफोसा ने दोनों देशों के उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे केवल चर्चाओं तक सीमित न रहें और व्यापार तथा निवेश बढ़ाने के लिए ठोस एवं क्रियान्वयन योग्य कदम उठाएं।
आगे की राह
शिखर सम्मेलन से निकला घोषणा-पत्र व्यापक विषयों को समाहित करता है, जिसमें वैश्विक शासन व्यवस्था को मजबूत करने और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता केंद्र में है। रामाफोसा के अनुसार, ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वैश्विक शांति, आर्थिक विकास और समृद्धि तभी संभव है जब सभी देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करें। अब देखना होगा कि एआई गवर्नेंस और डिजिटल साझेदारी के ये संकल्प सम्मेलन की घोषणाओं से आगे बढ़कर ठोस नीतिगत सहयोग का रूप लेते हैं या नहीं।