13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: टैरिफ चुनौतियों पर एकजुट हुए सदस्य देश, भारत-रूस व्यापार $100 अरब का लक्ष्य

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: टैरिफ चुनौतियों पर एकजुट हुए सदस्य देश, भारत-रूस व्यापार $100 अरब का लक्ष्य

सारांश

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया — यह मंच केवल बातचीत का नहीं, परिणामों का है। भारत-रूस $100 अरब व्यापार लक्ष्य, भारत-चीन सीमा मुद्दे पर सहमति और दिल्ली घोषणा पत्र ने वैश्विक दक्षिण की एकजुटता को नई परिभाषा दी।

मुख्य बातें

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन 13 सितंबर को विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने टैरिफ चुनौतियों पर सामूहिक एकजुटता का संदेश दिया।
भारत और रूस ने द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब तक बढ़ाने के लक्ष्य पर सहमति जताई।
भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान की दिशा में सकारात्मक सहमति बनी।
ब्रिक्स देश विश्व की आधी से अधिक आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दिल्ली घोषणा पत्र को वैश्विक सुरक्षा और बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिहाज़ से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बताया गया।
भारत मंडपम, नई दिल्ली में विश्व नेताओं की उपस्थिति को भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन, 13 सितंबर को, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने एकस्वर में कहा कि ब्रिक्स अब महज एक राजनीतिक या आर्थिक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की सामूहिक आर्थिक शक्ति का केंद्र बन चुका है। वैश्विक टैरिफ दबावों के बीच सदस्य देशों ने सामूहिक और सहयोगात्मक समाधान की दिशा में ठोस सहमति जताई।

शिखर सम्मेलन के तीन प्रमुख परिणाम

एसडब्ल्यूएफआई के चेयरमैन और आईब्रिक्स 2026 के लीड को-चेयर लक्ष्मी नारायणन ने कहा कि मौजूदा टैरिफ चुनौतियाँ ब्रिक्स देशों की उपज नहीं हैं, बल्कि ये वैश्विक व्यापारिक माहौल — विशेषकर अमेरिकी नीतियों — के प्रभाव का परिणाम हैं।

नारायणन ने इस शिखर सम्मेलन से तीन ठोस परिणाम गिनाए: पहला, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार एवं वाणिज्य को बढ़ावा देने पर सहमति; दूसरा, भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान की दिशा में सकारात्मक सहमति; और तीसरा, भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब (करीब ₹8.3 लाख करोड़) तक बढ़ाने के लक्ष्य पर आम राय।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिक्स जहाँ नीति निर्माण और संवाद का मंच है, वहीं आईब्रिक्स निवेशकों, संप्रभु निधियों और परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों को एक साथ लाकर आर्थिक सहयोग को व्यावहारिक परिणामों में बदलने का प्लेटफॉर्म है।

दिल्ली घोषणा पत्र और वैश्विक सुरक्षा

रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय ने कहा कि शिखर सम्मेलन में अपनाया गया दिल्ली घोषणा पत्र वैश्विक सुरक्षा और सहयोग के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जलवायु परिवर्तन, रक्षा, वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक विकास जैसी चुनौतियाँ अकेले किसी एक देश द्वारा हल नहीं की जा सकतीं।

राय ने कहा, 'ब्रिक्स का मूल उद्देश्य एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मज़बूत करना है, जहाँ वैश्विक निर्णय केवल कुछ देशों तक सीमित न रहें।' उनके अनुसार, सम्मेलन का एक बड़ा अप्रत्यक्ष लाभ यह रहा कि विश्व के नेताओं को भारत को करीब से समझने का अवसर मिला।

वैश्विक दक्षिण की बढ़ती आर्थिक ताकत

पूर्व सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी ने कहा कि ब्रिक्स विश्व की आधी से अधिक आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का मंच बनाता है।

जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ब्रिक्स पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली और परिणामोन्मुख संस्था बनकर उभरा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात को उल्लेखनीय बताया कि जिन देशों के बीच हाल तक संवाद सीमित था, उनके बीच भी संयुक्त घोषणा पत्र पर सहमति बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। डिजिटल परिवर्तन, बुनियादी ढाँचे और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।

भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और व्यापार विस्तार

इंडो विंग्स के संस्थापक और सीईओ पारस जैन ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन के आयोजन ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि विदेश व्यापार समझौतों पर चर्चाएँ, स्थानीय कंपनियों के बीच सहयोग और स्थिरता पर हुए संवाद — ये सभी पहलू दर्शाते हैं कि भारत ने उद्घाटन से लेकर समापन तक उत्कृष्ट अध्यक्षता के साथ सम्मेलन का संचालन किया।

इंडोजीनियस के सह-संस्थापक निक बुकर ने कहा कि सामान्यतः कम टैरिफ वाला वैश्विक व्यापारिक वातावरण आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देता है, और इतिहास में व्यापारिक बाधाओं में कमी से निवेश व विकास को प्रोत्साहन मिलता रहा है। उन्होंने नई दिल्ली के भारत मंडपम में विश्व नेताओं की उपस्थिति को भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रमाण बताया और कहा कि भारत आज वैश्विक संबंधों के नेटवर्क के केंद्र में तेज़ी से उभर रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक व्यापार में अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण अनिश्चितता का माहौल है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली घोषणा पत्र और भारत-रूस $100 अरब व्यापार लक्ष्य जैसे ठोस परिणाम ब्रिक्स को संवाद-मंच से क्रियान्वयन-मंच में बदलने की दिशा में अहम कदम हैं। अब सभी की नज़रें इस बात पर होंगी कि ये घोषित लक्ष्य व्यावहारिक नीतियों और परियोजनाओं का रूप कब और कैसे लेते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — पिछले ब्रिक्स सम्मेलनों में भी ऐसी घोषणाएँ हुई थीं जो कागज़ों तक सीमित रह गईं। आलोचकों का कहना है कि जब तक इन लक्ष्यों के लिए बाध्यकारी समयसीमा और सत्यापन-योग्य तंत्र नहीं बनते, तब तक ये केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति के प्रतीक हैं। भारत की मेजबानी निस्संदेह कूटनीतिक उपलब्धि है, पर वैश्विक दक्षिण की 40% जीडीपी का दावा करने वाले इस समूह को अब दिखाना होगा कि वह अमेरिकी टैरिफ दबावों का वास्तविक विकल्प बन सकता है — न केवल घोषणाओं में, बल्कि व्यापार प्रवाह के आँकड़ों में भी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के मुख्य परिणाम क्या रहे?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के तीन प्रमुख परिणाम रहे — द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति, भारत-चीन सीमा मुद्दे पर सकारात्मक सहमति, और भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब तक बढ़ाने का लक्ष्य। इसके अलावा दिल्ली घोषणा पत्र को भी अपनाया गया।
भारत-रूस $100 अरब व्यापार लक्ष्य क्या है?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान भारत और रूस ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब (लगभग ₹8.3 लाख करोड़) तक बढ़ाने के लक्ष्य पर सहमति जताई। यह लक्ष्य दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाई देने का प्रयास है।
दिल्ली घोषणा पत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
रक्षा विशेषज्ञ रंजीत राय के अनुसार, दिल्ली घोषणा पत्र वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिहाज़ से एक अहम दस्तावेज़ है। यह घोषणा पत्र ऐसे देशों के बीच सहमति का प्रतीक है जिनके बीच हाल तक संवाद सीमित था।
आईब्रिक्स (iBRICS) क्या है और यह ब्रिक्स से कैसे अलग है?
आईब्रिक्स एक निवेश-केंद्रित प्लेटफॉर्म है जो ब्रिक्स के नीति-निर्माण ढाँचे को व्यावहारिक परिणामों में बदलने का काम करता है। जहाँ ब्रिक्स संवाद और नीति का मंच है, वहीं आईब्रिक्स निवेशकों, संप्रभु निधियों और परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों को एक साथ लाता है।
ब्रिक्स देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में कितनी हिस्सेदारी रखते हैं?
ब्रिक्स देश विश्व की आधी से अधिक आबादी और लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह समूह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को एकजुट करता है।
राष्ट्र प्रेस
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