13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: $33 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का दावा, $1 ट्रिलियन निवेश लक्ष्य

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: $33 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का दावा, $1 ट्रिलियन निवेश लक्ष्य

सारांश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में $33 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की सामूहिक ताकत और $1 ट्रिलियन निवेश के महत्वाकांक्षी लक्ष्य ने मंच की दिशा तय की। PPP आधार पर ब्रिक्स गुट $82 ट्रिलियन के साथ जी-20 से आगे निकल चुका है — यह वैश्विक आर्थिक शक्ति-संतुलन में गहरे बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था $33 ट्रिलियन — वैश्विक जीडीपी का करीब 27% ।
PPP आधार पर ब्रिक्स और सहयोगी देशों की अर्थव्यवस्था $82 ट्रिलियन , जी-20 के $62 ट्रिलियन से बड़ी।
आईब्रिक्स का लक्ष्य ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में $1 ट्रिलियन निवेश आकर्षित करना।
पूर्व सचिव अजय दुआ ने कहा कि ब्रिक्स देशों की वृद्धि दर वैश्विक औसत 3.5% से काफी ऊपर।
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार को अनिवार्य बताया।
सम्मेलन में निष्पक्ष वैश्विक व्यापार और ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा पर विशेष ज़ोर।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के पहले दिन शनिवार, 12 सितंबर को नई दिल्ली में वैश्विक अर्थव्यवस्था, निवेश और बहुपक्षीय सहयोग पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि ब्रिक्स देशों की संयुक्त $33 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था — जो वैश्विक जीडीपी का करीब 27 प्रतिशत है — आने वाले वर्षों में विश्व आर्थिक व्यवस्था की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। सम्मेलन में निष्पक्ष वैश्विक व्यापार, विकासशील देशों में निवेश और $1 ट्रिलियन के महत्वाकांक्षी निवेश लक्ष्य पर विशेष ज़ोर दिया गया।

ब्रिक्स देशों की आर्थिक ताकत पर विशेषज्ञों की राय

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के पूर्व सचिव अजय दुआ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस टिप्पणी का समर्थन किया, जिसमें ब्रिक्स देशों की आर्थिक प्रगति को रेखांकित किया गया था। दुआ ने कहा कि पिछले लगभग एक दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था की औसत वृद्धि दर करीब 3.5 प्रतिशत सालाना रही है, जबकि ब्रिक्स देशों — विशेष रूप से भारत — की वृद्धि दर इससे काफी ऊपर बनी रही है। उन्होंने कहा कि चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था का भी 5.5 से 6 प्रतिशत की दर से बढ़ना वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डालता है, और यही कारण है कि ब्रिक्स देश आज वैश्विक विकास के प्रमुख इंजन बनकर उभरे हैं।

$1 ट्रिलियन निवेश का लक्ष्य और आईब्रिक्स की भूमिका

एसडब्ल्यूएफआई के चेयरमैन और आईब्रिक्स 2026 के लीड को-चेयर लक्ष्मी नारायणन ने बताया कि क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर ब्रिक्स और सहयोगी देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था लगभग $82 ट्रिलियन की है, जो जी-20 समूह के लगभग $62 ट्रिलियन के मुकाबले काफी बड़ी है। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि वैश्विक आर्थिक संतुलन धीरे-धीरे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर खिसक रहा है।

नारायणन ने आगे कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों का असर लगभग सभी सदस्य देशों पर पड़ा है, और इसलिए आपसी व्यापार को बढ़ाना इस शिखर सम्मेलन का प्रमुख फोकस है। उन्होंने कहा, 'आईब्रिक्स का लक्ष्य ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में $1 ट्रिलियन का निवेश आकर्षित करना है। यह निवेश विकासशील क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे, उद्योग, तकनीक और आर्थिक गतिविधियों को मज़बूत कर सकता है तथा ब्रिक्स देशों को सामूहिक आर्थिक शक्ति के रूप में और सशक्त बना सकता है।'

संयुक्त राष्ट्र ने बहुपक्षवाद पर दिया ज़ोर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि आज के समय में बहुपक्षवाद पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रीय समूहों और देशों के बीच सकारात्मक समझौते और सहयोग ही वैश्विक तनाव को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। दुजारिक ने रेखांकित किया कि ब्रिक्स विश्व की बड़ी आबादी और वैश्विक आर्थिक उत्पादन के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इस मंच की ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है।

वैश्विक दक्षिण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सुधार

दुजारिक ने आगे कहा कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक व्यवस्था अधिक संतुलित और समावेशी होनी चाहिए, ताकि लाभ केवल कुछ देशों या समूहों तक सीमित न रहे। उन्होंने वैश्विक व्यापार प्रणाली को अधिक निष्पक्ष बनाने और विकासशील देशों की आवाज़ को मज़बूत करने की ज़रूरत पर भी बल दिया।

आगे क्या — सम्मेलन से क्या उम्मीदें

गौरतलब है कि यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक व्यापार को अनिश्चितता में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रिक्स देश आपसी व्यापार और निवेश ढाँचे को मज़बूत करने में सफल रहते हैं, तो यह पश्चिम-केंद्रित वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का एक गंभीर विकल्प बन सकता है। सम्मेलन के अगले सत्रों में व्यापार समझौतों और वित्तीय सहयोग पर ठोस प्रस्तावों की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ब्रिक्स की असली चुनौती इन संख्याओं को ठोस संस्थागत ढाँचे में बदलना है। न्यू डेवलपमेंट बैंक अभी तक विश्व बैंक या IMF का विश्वसनीय विकल्प नहीं बन पाया है, और ब्रिक्स के भीतर भारत-चीन के बीच व्यापार असंतुलन जैसे विरोधाभास अनसुलझे हैं। $1 ट्रिलियन निवेश का लक्ष्य बिना स्पष्ट समयसीमा और क्रियान्वयन रोडमैप के एक और महत्वाकांक्षी घोषणा बनकर रह सकता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह सम्मेलन बाध्यकारी व्यापार समझौतों तक पहुँच पाता है, या केवल साझा बयानों की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में क्या चर्चा हुई?
12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था, $1 ट्रिलियन निवेश लक्ष्य, निष्पक्ष वैश्विक व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग पर गहन चर्चा हुई।
ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है?
ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था लगभग $33 ट्रिलियन है, जो वैश्विक जीडीपी का करीब 27 प्रतिशत है। क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर यह $82 ट्रिलियन तक पहुँचती है, जो जी-20 के $62 ट्रिलियन से अधिक है।
आईब्रिक्स का $1 ट्रिलियन निवेश लक्ष्य क्या है?
आईब्रिक्स 2026 के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं में $1 ट्रिलियन का निवेश आकर्षित करना है, जो बुनियादी ढाँचे, उद्योग और तकनीक को मज़बूत करेगा।
संयुक्त राष्ट्र ने ब्रिक्स सम्मेलन पर क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि बहुपक्षवाद पहले से कहीं अधिक ज़रूरी है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार अनिवार्य है ताकि वैश्विक व्यवस्था अधिक संतुलित और समावेशी बने।
ब्रिक्स देश वैश्विक विकास में कैसे योगदान दे रहे हैं?
पूर्व सचिव अजय दुआ के अनुसार, ब्रिक्स देशों की वृद्धि दर वैश्विक औसत 3.5 प्रतिशत से काफी अधिक रही है। भारत और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाएँ 5.5-6 प्रतिशत की दर से बढ़कर वैश्विक विकास के प्रमुख इंजन बनी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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