18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बहरीन के विदेश मंत्री अल जायानी नई दिल्ली पहुंचे, भारत-जीसीसी सहयोग पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
बहरीन के विदेश मंत्री एवं खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायानी 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की राजधानी पहुंचे। विदेश मंत्रालय में खाड़ी मामलों के अतिरिक्त सचिव असीम महाजन ने हवाई अड्डे पर उनका औपचारिक स्वागत किया। उनकी यह यात्रा भारत और जीसीसी देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को नई गति देने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगमन और स्वागत
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'बहरीन के विदेश मंत्री और वर्तमान में जीसीसी के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायानी का 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। उनकी यात्रा से भारत-जीसीसी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।' यह स्वागत इस बात का संकेत है कि भारत इस सम्मेलन को केवल ब्रिक्स सदस्यों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि व्यापक वैश्विक साझेदारियों को भी मज़बूत करना चाहता है।
शिखर सम्मेलन का आयोजन और थीम
भारत 12 सितंबर 2026 से नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है। इस आयोजन में सदस्य और साझेदार देशों के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ आउटरीच के तहत आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हैं। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' दृष्टिकोण पर आधारित जन-केंद्रित सोच को प्रतिबिंबित करती है।
मुख्य घटनाक्रम और नई दिल्ली घोषणा
शनिवार को ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं ने भारत मंडपम में 'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मज़बूत करने' विषय पर आयोजित सत्र में भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के दौरान 'नई दिल्ली घोषणा 2026' को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दो विशेष डाक टिकट भी जारी किए गए।
समापन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'नई दिल्ली घोषणा साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा देती है और अब इन प्रस्तावों को ठोस परिणामों में बदलने की जिम्मेदारी सभी देशों की है।' उन्होंने ब्रिक्स नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को 'सार्थक और रचनात्मक' बताया।
वैश्विक शासन सुधार पर मोदी का ज़ोर
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि बदलती विश्व व्यवस्था को पुरानी संस्थाओं के ज़रिए नहीं संभाला जा सकता। उन्होंने प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। गौरतलब है कि ग्लोबल साउथ की भविष्य की तकनीकों और उनसे जुड़े नियमों के निर्माण में समान भागीदारी सुनिश्चित करने की माँग इस सम्मेलन की केंद्रीय आवाज़ बनकर उभरी।
नेताओं का पौधारोपण कार्यक्रम और उपस्थित प्रतिनिधि
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने नई दिल्ली में एक पौधारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। ब्रिक्स में अब 11 सदस्य देश — ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात — शामिल हैं, जबकि बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देशों के रूप में जुड़े हैं।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रासंगिकता पर व्यापक बहस जारी है और ग्लोबल साउथ एक मज़बूत सामूहिक आवाज़ की तलाश में है।