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नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: रूस ने भारत की अध्यक्षता को सराहा, सफलता पर जताया भरोसा

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नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: रूस ने भारत की अध्यक्षता को सराहा, सफलता पर जताया भरोसा

सारांश

रूस ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को 'अत्यंत सराहनीय' बताया और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें शिखर सम्मेलन की सफलता पर पूरा भरोसा जताया। क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी पश्चिमी देश के विरुद्ध नहीं, बल्कि साझा दृष्टिकोण वाले देशों का मंच है।

मुख्य बातें

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 8 सितंबर को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की प्रशंसा की और शिखर सम्मेलन की सफलता पर भरोसा जताया।
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों और उच्चस्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।
2024 में शुरू 'पार्टनर स्टेट्स' श्रेणी में बेलारूस, वियतनाम, कजाकिस्तान, नाइजीरिया सहित 10 देश शामिल।
पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी पश्चिमी देश के विरुद्ध नहीं, यह समान सोच वाले देशों का अनौपचारिक मंच है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 8 सितंबर को स्पष्ट किया कि रूस भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के परिणामों को अत्यंत सकारात्मक दृष्टि से देखता है और उसे पूरा भरोसा है कि नई दिल्ली में आयोजित होने वाला 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न होगा। यह टिप्पणी उन्होंने एक वर्चुअल ब्रीफिंग के दौरान की, जो शिखर सम्मेलन से महज कुछ दिन पहले आयोजित की गई थी।

मुख्य घटनाक्रम

पेस्कोव ने कहा, 'यह शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। हम इस अवधि के दौरान भारत की अध्यक्षता के परिणामों की बहुत सराहना करते हैं और हमें कोई संदेह नहीं है कि यह शिखर सम्मेलन सफल होगा। रूस ब्रिक्स के सभी कार्यकारी प्रारूपों में बहुत सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।'

उन्होंने ब्रिक्स के ऐतिहासिक विकास का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 20 वर्ष पूर्व यह समूह रूस-भारत-चीन (RIC) के रूप में शुरू हुआ था, फिर ब्राजील के जुड़ने से 'BRIC' और दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद 'BRICS' बना। आज यह एक विस्तृत वैश्विक मंच बन चुका है।

ब्रिक्स की संरचना और स्वरूप

पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं है। उनके अनुसार, 'हमारे पास कोई चार्टर नहीं है, कोई औपचारिक नियमावली नहीं है और न ही कोई स्थायी कार्यालय है। यह उन देशों का समूह है जो दुनिया के विकास और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं।'

उन्होंने 2024 में शुरू की गई 'पार्टनर स्टेट्स' श्रेणी के विकास को सकारात्मक बताया। इस श्रेणी में अब बेलारूस, बोलिविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इन देशों के प्रतिनिधि धीरे-धीरे ब्रिक्स की विभिन्न कार्यप्रणालियों में भाग ले रहे हैं।

ब्रिक्स पश्चिम-विरोधी नहीं: पेस्कोव का स्पष्टीकरण

पेस्कोव ने उन धारणाओं को सिरे से खारिज किया जो ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के विरुद्ध एक गठबंधन के रूप में चित्रित करती हैं। उन्होंने कहा, 'हम भारत की इस बात से सहमत हैं कि ब्रिक्स किसी पश्चिमी देश के खिलाफ नहीं है। ब्रिक्स अपने सदस्य देशों के लिए है और उन देशों के लिए है जो इसकी विचारधारा को साझा करते हैं। यह किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है। यही ब्रिक्स की सबसे अनूठी विशेषता है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग ब्रिक्स को किसी अन्य समूह का विरोधी बताते हैं, वे बड़ी भूल कर रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी देश ब्रिक्स के विस्तार को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं।

भारत की अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन का एजेंडा

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' रखा गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' की भावना पर आधारित जन-केंद्रित सोच को दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों और उच्चस्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन किया है। गौरतलब है कि इनका उद्देश्य राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय साझेदारी, तथा सांस्कृतिक और जन-से-जन संपर्कों के तीन प्रमुख स्तंभों को सुदृढ़ बनाना है।

आगे क्या होगा

शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, साझेदार देशों और आमंत्रित राष्ट्रों के नेता भाग लेंगे। बैठक में वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श के साथ-साथ ब्रिक्स के भीतर सहयोग को और गहरा करने की रणनीति तैयार की जाएगी। रूस की सक्रिय भागीदारी और भारत के प्रति उसके सकारात्मक रुख को देखते हुए, यह सम्मेलन वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह समूह को व्यापक वैधता देता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ब्रिक्स की अनौपचारिक संरचना — कोई चार्टर नहीं, कोई स्थायी सचिवालय नहीं — इसे बड़े फैसलों के क्रियान्वयन में कमज़ोर बनाती है। असली परीक्षा यह है कि नई दिल्ली शिखर सम्मेलन केवल घोषणाओं का मंच बनता है या ठोस बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं का।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कब और कहाँ होगा?
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों, साझेदार देशों और आमंत्रित राष्ट्रों के नेता भाग लेंगे।
रूस ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पर क्या कहा?
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 8 सितंबर को कहा कि रूस भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के परिणामों की बहुत सराहना करता है और उसे नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की सफलता पर कोई संदेह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस ब्रिक्स के सभी कार्यकारी प्रारूपों में सक्रिय रहा है।
ब्रिक्स 'पार्टनर स्टेट्स' श्रेणी क्या है और इसमें कौन-से देश शामिल हैं?
2024 में शुरू की गई 'पार्टनर स्टेट्स' श्रेणी उन देशों के लिए है जो ब्रिक्स की विचारधारा साझा करते हैं लेकिन पूर्ण सदस्य नहीं हैं। इसमें बेलारूस, बोलिविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
क्या ब्रिक्स पश्चिमी देशों के खिलाफ है?
नहीं — क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी पश्चिमी देश के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समान दृष्टिकोण वाले देशों का मंच है और भारत की इस स्थिति से रूस पूरी तरह सहमत है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय क्या है और इस दौरान क्या हुआ?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' है। अध्यक्षता के दौरान भारत ने 350 से अधिक बैठकों और उच्चस्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिनका उद्देश्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करना था।
राष्ट्र प्रेस
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