ब्रिक्स विदेश मंत्री बैठक: मोदी बोले — भारत की अध्यक्षता में बनेगी समावेशी विश्व व्यवस्था

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ब्रिक्स विदेश मंत्री बैठक: मोदी बोले — भारत की अध्यक्षता में बनेगी समावेशी विश्व व्यवस्था

सारांश

नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स विदेश मंत्री बैठक शुरू हुई। PM मोदी ने ग्लोबल साउथ की आवाज़ बुलंद करने और समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने का संकल्प दोहराया। रूसी विदेश मंत्री लावरोव से यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर भी विचार-विमर्श हुआ।

मुख्य बातें

14 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई।
PM मोदी ने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ की उम्मीदों की आवाज़ बताते हुए बहुपक्षवाद और सतत विकास पर ज़ोर दिया।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मोदी से मुलाकात की; यूक्रेन और पश्चिम एशिया समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
मोदी ने शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को सही रास्ता बताया।
लावरोव ने दिसंबर 2025 की 23वीं भारत-रूस शिखर बैठक के बाद द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति की जानकारी दी।
बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 मई 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों से मुलाकात के बाद स्पष्ट किया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स बहुपक्षवाद को सुदृढ़ करने, सतत विकास को गति देने, आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और एक अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था की नींव रखने की दिशा में सामूहिक प्रयास करेगा। यह बैठक भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक के पहले दिन हुई।

मुख्य घटनाक्रम

नई दिल्ली में गुरुवार को शुरू हुई इस बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की। ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के विदेश मंत्री तथा वरिष्ठ प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। बैठक से पहले सभी प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने प्रधानमंत्री मोदी से शिष्टाचार भेंट की।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की उम्मीदों को आवाज देने का एक अहम मंच बन चुका है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में सभी सदस्य देश मिलकर एक अधिक न्यायसंगत और समावेशी वैश्विक ढाँचे के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

मोदी-लावरोव मुलाकात

बैठक से पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा किए। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, मोदी ने एक बार फिर रेखांकित किया कि बातचीत और कूटनीति ही किसी भी संघर्ष के समाधान का सही मार्ग है।

लावरोव ने दिसंबर 2025 में संपन्न 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग में हुई प्रगति की जानकारी भी मोदी को दी। मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा कि दोनों पक्षों ने भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर हुई प्रगति की समीक्षा की और शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों के प्रति अपने निरंतर समर्थन को दोहराया।

ग्लोबल साउथ और बहुपक्षवाद पर जोर

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है और विकासशील देश बहुपक्षीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि ब्रिक्स का विस्तार हाल के वर्षों में तेज़ी से हुआ है और अब इसमें कई नए साझेदार देश भी शामिल हो चुके हैं, जिससे यह मंच वैश्विक दक्षिण की सामूहिक आवाज़ के रूप में और अधिक प्रभावशाली बन गया है।

भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का एजेंडा आर्थिक सहयोग, जलवायु वित्त, और वैश्विक शासन सुधार जैसे विषयों पर केंद्रित बताया जा रहा है — जो विकसित देशों के नेतृत्व वाले मंचों पर अक्सर हाशिए पर रह जाते हैं।

आगे का रोडमैप

दो दिवसीय विदेश मंत्री बैठक के निष्कर्ष आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तय करेंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में होने वाले विचार-विमर्श में व्यापार, कनेक्टिविटी, और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों की साझा स्थिति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चुनौती भी। मोदी का 'समावेशी विश्व व्यवस्था' का नारा राजनयिक दृष्टि से आकर्षक है, पर ब्रिक्स के भीतर चीन और रूस के साथ बढ़ते हितों के टकराव को यह नहीं छुपाता। लावरोव से मुलाकात में यूक्रेन पर 'शांतिपूर्ण समाधान' की बात दोहराना भारत की परंपरागत रणनीतिक स्वायत्तता को रेखांकित करता है, लेकिन पश्चिमी सहयोगियों के साथ संतुलन बनाए रखने की कसरत भी जारी है। असली परीक्षा यह होगी कि भारत की अध्यक्षता ठोस साझा एजेंडे में तब्दील होती है या केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स विदेश मंत्री बैठक 2026 कहाँ और कब हो रही है?
यह दो दिवसीय बैठक 14 मई 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुई। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की।
PM मोदी ने ब्रिक्स बैठक में क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने और एक अधिक समावेशी विश्व व्यवस्था बनाने के लिए काम करेगा। उन्होंने ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ की उम्मीदों की आवाज़ बताया।
मोदी और लावरोव की मुलाकात में क्या हुआ?
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने PM मोदी से मुलाकात कर यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार साझा किए। लावरोव ने दिसंबर 2025 की 23वीं भारत-रूस शिखर बैठक के बाद द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की भी जानकारी दी।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य एजेंडा क्या है?
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का एजेंडा आर्थिक सहयोग, सतत विकास, और वैश्विक शासन सुधार पर केंद्रित है। इसके साथ ही ग्लोबल साउथ के देशों को बहुपक्षीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाना भी प्राथमिकता में है।
ब्रिक्स बैठक के बाद आगे क्या होगा?
दो दिवसीय विदेश मंत्री बैठक के निष्कर्ष आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तय करेंगे। सदस्य देशों की साझा स्थिति को व्यापार, कनेक्टिविटी और बहुपक्षीय सुधार जैसे मुद्दों पर अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 28 मिनट पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 5 घंटे पहले
  4. 5 घंटे पहले
  5. 8 घंटे पहले
  6. 11 घंटे पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले