विदर्भ में 547 किमी के चार एक्सप्रेसवे को मंजूरी, फडणवीस ने दिए समयबद्ध पूर्णता के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता वाली इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैबिनेट समिति ने गुरुवार, 14 मई 2026 को विदर्भ क्षेत्र में चार एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की। ये परियोजनाएँ कुल मिलाकर 547 किलोमीटर लंबी हैं और इनका मुख्य उद्देश्य हाई-स्पीड कॉरिडोर के ज़रिए महाराष्ट्र की पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं को परस्पर जोड़ना है।
मुख्य घटनाक्रम: कौन-से चार एक्सप्रेसवे मंजूर हुए
स्वीकृत परियोजनाओं में नागपुर-गोंदिया एक्सप्रेसवे, भंडारा-गढ़चिरौली एक्सप्रेसवे, नागपुर-चंद्रपुर एक्सप्रेसवे और नवेगांव मोरे-कोंसारी से सुरजागढ़ ग्रीनफील्ड रोड शामिल हैं। ये चारों मार्ग विदर्भ के भीतरी और सीमावर्ती जिलों को राज्य के मुख्य राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ेंगे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं पर अगले कदम तेज़ी से उठाए जाएँ और समय पर पूर्णता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा, 'बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देकर, राज्य एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहा है जो एकीकृत, तेज़ गति वाला और समावेशी विकास से परिभाषित होगा।'
नवेगांव मोरे-सुरजागढ़ मार्ग: खनिज परिवहन की धुरी
नवेगांव मोरे-सुरजागढ़ मार्ग को खनिज परिवहन के लिहाज़ से विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मार्ग को समृद्धि महामार्ग से जोड़ा जाए, ताकि गढ़चिरौली और आसपास के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों से माल की आवाजाही सुगम हो सके। गौरतलब है कि गढ़चिरौली जिले में लौह अयस्क और अन्य खनिजों के विशाल भंडार हैं, जिनके दोहन के लिए बेहतर सड़क संपर्क लंबे समय से अपेक्षित था।
अफ्रीका-भारत आर्थिक क्षेत्र और एमओयू
इसी बैठक के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने महाराष्ट्र सरकार (शहर और औद्योगिक विकास निगम) और अफ्रीका इंडिया इकोनॉमिक फ़ाउंडेशन के बीच एक समझौते के आदान-प्रदान की अध्यक्षता की। यह समझौता खारघर, नवी मुंबई में 'अफ्रीका इंडिया इंटरनेशनल डेवलपमेंट ज़ोन' के विकास हेतु एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा।
प्रस्तावित परिसर में एआईबीसी टावर शामिल होगा, जिसमें 54 अफ्रीकी देशों और भारतीय हितधारकों के कार्यालय होंगे। इसके अतिरिक्त, कन्वेंशन एवं कॉन्फ्रेंस सुविधाएँ, प्रदर्शनी हॉल, सांस्कृतिक एवं विरासत केंद्र, इन्क्यूबेशन और अनुसंधान केंद्र, एमएसएमई एवं उद्यमिता विकास सुविधाएँ तथा आतिथ्य इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे।
₹1,14,000 करोड़ का ग्रीन डेटा सेंटर और AI हब
एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम में, मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार महाराष्ट्र सरकार (उद्योग विभाग) और एएम इंटेलिजेंस लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत मुंबई महानगर क्षेत्र में 500 मेगावाट के एकीकृत ग्रीन डेटा सेंटर पार्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूट हब की स्थापना की जाएगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि इस परियोजना में प्रस्तावित निवेश ₹1,14,000 करोड़ होगा और इससे 800 नौकरियाँ पैदा होने का अनुमान है। यह परियोजना पूर्णतः नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगी और बड़े पैमाने पर AI मॉडल प्रशिक्षण, डेटा प्रोसेसिंग तथा क्लाउड-आधारित सेवाएँ प्रदान करेगी।
विदर्भ के विकास पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब विदर्भ लंबे समय से पश्चिमी महाराष्ट्र की तुलना में इंफ्रास्ट्रक्चर में पिछड़ेपन की शिकायत करता रहा है। चारों एक्सप्रेसवे न केवल क्षेत्रीय संपर्क बेहतर करेंगे, बल्कि कृषि उपज, खनिज और औद्योगिक माल की ढुलाई की लागत भी घटाएँगे। इसके अलावा, फडणवीस ने अधिकारियों को पश्चिमी महाराष्ट्र को कोंकण क्षेत्र से जोड़ने वाली एक प्रस्तावित सुरंग सड़क का अध्ययन करने और उस पर विस्तृत प्रस्तुति तैयार करने का निर्देश भी दिया है। राज्य सरकार के इन कदमों से महाराष्ट्र को AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के केंद्र के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति स्पष्ट होती है।