बलूचिस्तान में पाक सुरक्षा बलों पर नागरिक की हत्या और छात्र के अपहरण का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान के केच जिले में जान मोहम्मद का गोलियों से छलनी शव 14 मई 2026 को बानोक-ए-चदाई इलाके में बरामद हुआ। मानवाधिकार संगठन पांक (बलूच नेशनल मूवमेंट का मानवाधिकार विभाग) के अनुसार, जान मोहम्मद को कथित तौर पर 24 जनवरी को केच के टुम्प इलाके में उनके घर से जबरन उठाया गया था — यानी उनकी मौत से करीब चार महीने पहले। संगठन ने इस गैर-न्यायिक हत्या के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया है।
मुख्य घटनाक्रम
पांक की रिपोर्ट के मुताबिक, जान मोहम्मद को कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थित 'डेथ स्क्वॉड' ने अगवा किया था। उनका शव मिलना इस बात की पुष्टि करता है कि जबरन गुमशुदगी के बाद न्यायेतर हत्या की आशंका कितनी वास्तविक है।
इसी दिन एक अलग घटना में, वाशुक जिले में 18 वर्षीय छात्र शहाब बलूच को उनके घर से कथित तौर पर पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स ने जबरन उठा लिया। पांक ने इस घटना की भी पुष्टि की है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
बलूच यकजेहती कमेटी की प्रमुख आयोजक और मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना बयान जारी किया। उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति और मानवाधिकारों की आवाज उठाने की जगह दिन-ब-दिन कम होती जा रही है, जबकि न्याय की मांग करने वालों को डर और धमकी देकर लगातार चुप कराया जा रहा है।"
महरंग ने बलूच यकजेहती कमेटी के सदस्यों के परिवारों को परेशान करने, शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को गायब करने और खुलेआम हत्याओं को एक सुनियोजित रणनीति बताया। उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण आंदोलन को अपराध बनाया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार लोग बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहे हैं। राज्य खुद ऐसी कहानियाँ बना रहा है, ताकि विरोध की आवाज को दबाया जा सके।"
बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति
गौरतलब है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं की घटनाएँ दशकों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के रडार पर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र से फर्जी प्रेस कॉन्फ्रेंस की भी खबरें सामने आई हैं, जिन पर महरंग ने गंभीर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि राज्य तंत्र असहमति की आवाजों को व्यवस्थित रूप से दबाने के लिए इन घटनाओं का इस्तेमाल कर रहा है।
महरंग बलूच ने स्पष्ट किया, "बलूच यकजेहती कमेटी हमेशा शांतिपूर्ण थी, है और आगे भी रहेगी। हम बलूचिस्तान में अत्याचार, जबरन गायब किए जाने और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।"
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
महरंग बलूच ने सभी मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे बलूचिस्तान की स्थिति पर गंभीर ध्यान दें और पाकिस्तान को शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने तथा जारी मानवाधिकार संकट के लिए जवाबदेह ठहराएँ। यह मामला अंतरराष्ट्रीय दबाव की दिशा में एक नई परीक्षा बन सकता है।