मानवाधिकार संगठन ने बलूच महिलाओं की जबरन गुमशुदगी पर पाकिस्तान से जवाबदेही की अपील की

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मानवाधिकार संगठन ने बलूच महिलाओं की जबरन गुमशुदगी पर पाकिस्तान से जवाबदेही की अपील की

सारांश

क्वेटा में बलूच महिलाओं की जबरन गुमशुदगी पर मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी सेना की कार्रवाइयों पर चिंता जताई है। यह मुद्दा गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर इशारा करता है।

Key Takeaways

  • बलूच महिलाओं की जबरन गुमशुदगी
  • मानवाधिकार उल्लंघन
  • पाकिस्तानी अधिकारियों की जवाबदेही
  • फर्जी मुठभेड़ में हत्या
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान

क्वेटा, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बलूच महिलाओं के लगातार जबरन गायब होने पर एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ बढ़ती ज्यादतियों के बीच, बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बताया कि 23 वर्षीय छात्रा महजबीन बलूच का पिछले साल 29 मई को पाकिस्तानी बलों ने अपहरण कर लिया था।

संगठन ने कहा कि उनके भाई यूनुस बलूच के लापता होने के तुरंत बाद महजबीन का गायब होना इस बात की ओर इशारा करता है कि परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया जा रहा है और पूरे क्षेत्र में सामूहिक सजा जैसी प्रथाएं अपनाई जा रही हैं।

मानवाधिकार संगठन के अनुसार, यूनुस को गंभीर यातनाओं के बाद रिहा कर दिया गया, लेकिन महजबीन का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

पांक ने कहा, “जबरन गायब करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है, जो व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण से वंचित करता है और उनके परिवारों को लगातार पीड़ा में रखता है।”

संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से महजबीन को तुरंत और बिना शर्त रिहा करने तथा उनकी स्थिति और ठिकाने की जानकारी बिना किसी देरी के सार्वजनिक करने की मांग की।

प्रांत में बढ़ती हिंसा के बीच, पांक ने मस्तुंग जिले के निवासी मुहम्मद आमिर की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या की कड़ी निंदा की।

संगठन ने इस घटना को बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से की गई हिंसा का एक और चिंताजनक उदाहरण बताया।

पीड़ित के परिवार के हवाले से पांक ने कहा कि पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के कर्मियों ने ईद की पूर्व संध्या पर मस्तुंग के किल्ली कारेज सोर इलाके में उनके घर पर छापा मारा, मुहम्मद को जबरन घर से बाहर ले गए और गोली मारकर हत्या कर दी।

परिवार का यह भी कहना है कि “न तो कोई गिरफ्तारी वारंट दिखाया गया, न ही कोई पुलिस रिपोर्ट दर्ज की गई और न ही कार्रवाई को सही ठहराने के लिए कोई सबूत पेश किया गया।”

पांक ने इस घटना को क्षेत्र में जबरन गायब किए जाने और फर्जी हत्याओं के व्यापक पैटर्न का हिस्सा बताते हुए कहा कि “ऐसी कार्रवाइयां जीवन के अधिकार, विधिक प्रक्रिया और मनमानी हिरासत से सुरक्षा जैसे मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं।”

संगठन ने कहा, यह हत्या गंभीर कानूनी और नैतिक सवाल खड़े करती है। संगठन ने इस पर तत्काल पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग की।

पांक ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाने की अपील की।

संगठन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से भी बलूचिस्तान की स्थिति पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि इससे हिंसा और नागरिकों की पीड़ा और बढ़ सकती है।

Point of View

जिसमें बलूच महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

बलूच महिलाओं की गुमशुदगी का क्या कारण है?
यह गुमशुदगी बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों का परिणाम है।
मानवाधिकार संगठन क्या कर रहा है?
मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से गुमशुदा महिलाओं की रिहाई की मांग की है।
क्या इस मामले में अंतरराष्ट्रीय ध्यान आवश्यक है?
हां, यह मामला गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आवश्यक है।
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