बच्चों में 'पिकी ईटिंग' की समस्या: यूनिसेफ समर्थित 7 प्रभावी टिप्स जो बदल देंगी खाने की आदत
सारांश
मुख्य बातें
खाने के समय नखरे दिखाना — जिसे अंग्रेज़ी में 'पिकी ईटिंग' कहते हैं — छोटे बच्चों की सबसे आम और माता-पिता को सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली समस्याओं में से एक है। यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, छोटे बच्चों का स्वाद और खान-पान की पसंद हर दिन बदलती रहती है और यह एक वैश्विक परिघटना है — दुनियाभर के माता-पिता इससे जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके और धैर्य अपनाने से इस समस्या को सुलझाना संभव है।
पिकी ईटिंग क्यों होती है और यह कितनी सामान्य है
बाल पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे स्वभाव से नए स्वाद और बनावट के प्रति सतर्क होते हैं — यह उनके विकास का एक सामान्य हिस्सा है। यूनिसेफ के आँकड़ों के अनुसार, किसी नए खाद्य पदार्थ को स्वीकार करने में बच्चे को 10 बार से अधिक चखना पड़ सकता है। भागदौड़ भरी जीवनशैली में बच्चे का खान-पान संतुलित रखना माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण ज़रूर है, लेकिन असंभव नहीं।
सात प्रभावी टिप्स जो आएंगी काम
१. बार-बार कोशिश करें: नया खाना बच्चे को तुरंत पसंद नहीं आता। हार न मानें — थोड़ी मात्रा में नया खाना बार-बार दें। जिस चीज़ को बच्चा नकारता है, उसे उसकी पसंदीदा चीज़ के साथ मिलाकर परोसें।
२. विविध और पौष्टिक खाना दें: रोज़ाना फल, सब्जियाँ, अनाज, दालें, डेयरी उत्पाद, मेवे और बीज शामिल करें। अलग-अलग रंग, स्वाद और बनावट वाले खाने बच्चे को आकर्षित करते हैं। एक ही सब्ज़ी को कच्चे और पके — दोनों रूपों में आज़माएँ।
३. बच्चे को टीम का हिस्सा बनाएँ: बच्चे को बाज़ार ले जाएँ और उन्हें फल-सब्ज़ी चुनने दें। घर पर उनकी उम्र के अनुसार छोटा काम सौंपें — जैसे सामग्री मिलाना या थाली सजाना। जब बच्चा खाना बनाने में शामिल होता है, तो उसे खाने का उत्साह अपने आप बढ़ जाता है।
४. उनकी भूख पर भरोसा करें: बच्चे को खाने के लिए मजबूर न करें। जब तक बच्चा स्वस्थ है, फुर्तीला है और वज़न सामान्य रूप से बढ़ रहा है, अत्यधिक चिंता की ज़रूरत नहीं है। बच्चे को अपने भूख और तृप्ति के संकेत खुद समझने दें।
५. कम मात्रा में खाना परोसें: छोटे बच्चों का पेट बहुत छोटा होता है। उन्हें उनकी उम्र के अनुसार छोटी-छोटी सर्विंग दें। थोड़ा भी खाने पर उनकी तारीफ करें — इससे सकारात्मक संबंध बनता है।
६. खाने को इनाम या सज़ा न बनाएँ: अच्छे व्यवहार के बदले मिठाई या जंक फूड का लालच देने से बच्चे खाने को लेकर गलत धारणा विकसित कर लेते हैं। इसके बजाय खेलने या बाहर घूमने का वादा करें।
७. खुद रोल मॉडल बनें: बच्चे अपने माता-पिता की नकल करते हैं। परिवार के साथ बैठकर पौष्टिक भोजन करें और उसे स्वादिष्ट बताएँ। जब बच्चा देखेगा कि आप भी वही खा रहे हैं, तो वह खुद उसे आज़माना चाहेगा।
माता-पिता के लिए विशेषज्ञों की सलाह
बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, धैर्य और सकारात्मक रवैया इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी कुंजी है। खाने के समय तनावपूर्ण माहौल से बचें — यह बच्चे की खाने के प्रति अरुचि को और बढ़ा सकता है। यह भी ध्यान रखें कि हर बच्चा अलग होता है और उसकी स्वीकृति की गति भी अलग होगी।
आम जनता पर असर
भारत में बाल कुपोषण एक गंभीर चुनौती है और शहरी परिवारों में भी 'पिकी ईटिंग' के कारण बच्चों को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इन सात टिप्स को अपनाकर माता-पिता न केवल अपने बच्चे की खाने की आदतें सुधार सकते हैं, बल्कि उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य की नींव भी रख सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन में बनी खान-पान की आदतें जीवनभर के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।