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जंक फूड से बच्चों की सेहत को गंभीर खतरा, जानें सही खानपान के स्मार्ट विकल्प

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जंक फूड से बच्चों की सेहत को गंभीर खतरा, जानें सही खानपान के स्मार्ट विकल्प

सारांश

जंक फूड की लत बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और कमज़ोर याददाश्त जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बचपन से ही सही खानपान की आदत डालना न केवल शरीर बल्कि दिमाग और भविष्य के लिए भी अनिवार्य है।

मुख्य बातें

जंक फूड में अत्यधिक तेल, चीनी और नमक होता है जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को नुकसान पहुंचाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को दिन में ५ ग्राम से अधिक नमक और २०-२५ ग्राम से अधिक चीनी नहीं देनी चाहिए।
दो वर्ष से कम आयु के शिशुओं के भोजन में नमक और चीनी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है।
लंबे समय तक जंक फूड खाने से मोटापा, टाइप-२ डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
FSSAI ने स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
रागी के लड्डू, भुना चना, ताज़े फल और लस्सी जैसे घरेलू पौष्टिक विकल्प जंक फूड की जगह बेहतर हैं।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बच्चों की थाली में परोसा जाने वाला खाना केवल उनका पेट नहीं भरता — यह उनके शरीर, दिमाग, पढ़ाई की क्षमता और आने वाले पूरे भविष्य को भी आकार देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि आज भारत में बच्चों के बीच जंक फूड की बढ़ती लत एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है, जिसे अभिभावक अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

जंक फूड क्या है और यह क्यों खतरनाक है

पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, चॉकलेट, केक, बिस्कुट, नमकीन और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें स्वाद में भले ही लुभावनी लगती हों, लेकिन इनमें तेल, चीनी और नमक की मात्रा अत्यधिक होती है जबकि शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व लगभग नगण्य होते हैं। यही जंक फूड की असली परिभाषा है — वह खाना जो कैलोरी तो देता है, पोषण नहीं।

शुरुआती दिनों में इसका असर भले ही दिखाई न दे, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बच्चों के स्वास्थ्य की नींव को खोखला करने लगती है। मोटापा, एकाग्रता में कमी, कमज़ोर याददाश्त और बार-बार बीमार पड़ना — ये सब इसी की देन हैं।

रोज़ाना कितना नमक, चीनी और तेल सही है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक बच्चे को दिनभर में ५ ग्राम (एक छोटी चम्मच) से अधिक नमक नहीं लेना चाहिए। इसी तरह चीनी का सेवन २० से २५ ग्राम यानी ४ से ५ छोटी चम्मच तक सीमित रखना उचित है। तेल की मात्रा २५ से ३० ग्राम यानी ५ से ६ छोटी चम्मच से अधिक नहीं होनी चाहिए।

विशेष रूप से दो वर्ष से कम आयु के शिशुओं के भोजन में नमक और चीनी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि इस उम्र में उनके अंग और तंत्रिका तंत्र विकास की नाजुक अवस्था में होते हैं।

दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम — आंकड़े चिंताजनक

भारत में बाल मोटापे की दर तेज़ी से बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमानों के अनुसार दक्षिण एशिया में अधिक वज़न वाले बच्चों की संख्या पिछले दो दशकों में दोगुनी हो चुकी है। अत्यधिक जंक फूड के सेवन से बच्चों में भविष्य में टाइप-२ डायबिटीज, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि जंक फूड बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता यानी सोचने-समझने और याद रखने की शक्ति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिसका सीधा असर उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों पर पड़ता है। गौरतलब है कि भारत में स्कूली बच्चों के बीच अवसाद और ध्यान की कमी (ADHD) के मामले भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं, और शोधकर्ता इसे खराब खानपान से जोड़ते हैं।

स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प — जंक फूड की जगह क्या दें

बच्चों को स्वाद से वंचित किए बिना भी हेल्दी रखा जा सकता है। ताज़े मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, भुना चना, मूंगफली, मुरमुरा, घर की बनी शिकंजी, लस्सी, ताज़ा फलों का जूस, रागी के लड्डू और घर की बनी चटनियां — ये सभी विकल्प बच्चों को स्वाद भी देते हैं और शरीर के लिए ज़रूरी पोषण भी।

पोषण विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि घर का बना खाना हमेशा पैकेज्ड फूड से बेहतर होता है क्योंकि इसमें प्रिज़र्वेटिव्स, अतिरिक्त नमक और कृत्रिम रंग नहीं होते।

बचपन की आदतें — जीवनभर की नींव

विशेषज्ञों का मानना है कि खानपान की आदतें बचपन में ही पक्की हो जाती हैं। यदि शुरू से ही बच्चों को पौष्टिक भोजन की ओर प्रेरित किया जाए, तो वे किशोरावस्था और वयस्क जीवन में भी स्वस्थ विकल्प चुनते हैं। इसके विपरीत, जो बच्चे बचपन में जंक फूड के आदी हो जाते हैं, उनके लिए बाद में आदत बदलना बेहद कठिन हो जाता है।

भारत सरकार के FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने भी स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। आने वाले समय में सरकार की ओर से पैकेज्ड फूड पर हेल्थ वॉर्निंग लेबल अनिवार्य किए जाने की भी संभावना है, जिससे अभिभावकों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन शहरी मध्यमवर्गीय बच्चों में तेज़ी से पनप रहा 'ओवरन्यूट्रिशन' यानी जंक फूड से होने वाला मोटापा और बीमारियां नीति-निर्माताओं के रडार पर कम हैं। विडंबना यह है कि FSSAI के दिशानिर्देश मौजूद हैं, लेकिन स्कूलों के बाहर जंक फूड की खुली बिक्री आज भी जारी है। जब तक खाद्य उद्योग पर सख्त लेबलिंग और विज्ञापन नियंत्रण नहीं होगा, केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं होंगे — यही वह कोण है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंक फूड बच्चों की सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
जंक फूड में तेल, चीनी और नमक अधिक होता है जबकि ज़रूरी पोषक तत्व नगण्य होते हैं। इससे बच्चों में मोटापा, कमज़ोर याददाश्त, एकाग्रता की कमी और आगे चलकर डायबिटीज व हृदय रोग का खतरा बढ़ता है।
बच्चों को एक दिन में कितना नमक और चीनी देना सही है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को दिनभर में ५ ग्राम से अधिक नमक और २०-२५ ग्राम से अधिक चीनी नहीं देनी चाहिए। दो वर्ष से कम उम्र के शिशुओं के भोजन में नमक और चीनी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
जंक फूड की जगह बच्चों को क्या खिलाएं?
जंक फूड के बजाय बच्चों को ताज़े मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, भुना चना, मूंगफली, रागी के लड्डू, लस्सी और घर की बनी चटनियां दी जा सकती हैं। ये विकल्प स्वादिष्ट भी हैं और पोषण से भरपूर भी।
क्या जंक फूड बच्चों की पढ़ाई पर असर डालता है?
हां, शोध बताते हैं कि अधिक जंक फूड खाने से बच्चों की एकाग्रता और याददाश्त कमज़ोर होती है। इससे पढ़ाई में ध्यान कम लगता है और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है।
बच्चों में हेल्दी खाने की आदत कैसे डालें?
बचपन से ही घर का बना पौष्टिक खाना देना शुरू करें और जंक फूड को धीरे-धीरे सीमित करें। बच्चों को खाने के फायदे सरल भाषा में समझाएं और स्वयं भी हेल्दी खाने का उदाहरण पेश करें।
राष्ट्र प्रेस
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