दिल की बीमारी के 5 खतरनाक संकेत जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं

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दिल की बीमारी के 5 खतरनाक संकेत जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं

सारांश

हृदय रोग के शुरुआती संकेत जैसे सांस फूलना, सीने में दबाव, पैरों में सूजन और लगातार थकान को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, इन लक्षणों को समय रहते पहचानकर हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

Key Takeaways

  • सांस फूलना मामूली काम करते वक्त भी हृदय पर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है।
  • पैरों और टखनों में लगातार सूजन हृदय की रक्त पंप करने की क्षमता कमजोर होने का संकेत है।
  • सीने में दर्द, दबाव या भारीपन हार्ट अटैक का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है, इसे कभी नजरअंदाज न करें।
  • बार-बार चक्कर आना और आराम के बाद भी थकान दूर न होना हृदय की कमजोरी का संकेत है।
  • भारत में प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख लोग हृदय रोग से जान गंवाते हैं।
  • 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित ईसीजी और लिपिड प्रोफाइल जांच करवानी चाहिए।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हृदय रोग आज भारत में मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक बन चुका है, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लोग दिल से जुड़े शुरुआती चेतावनी संकेतों को सामान्य थकान या उम्र का असर मानकर अनदेखा कर देते हैं। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर स्थितियों से बचाव संभव है।

दिल क्यों है शरीर का सबसे जरूरी अंग

मेडिकल साइंस के अनुसार, हृदय पूरे शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने वाला केंद्रीय अंग है। जब यह सही तरीके से काम करना बंद करने लगता है, तो शरीर अलग-अलग तरीकों से संकेत देता है। इन संकेतों को नजरअंदाज करना न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि जीवन के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।

भारत में प्रतिवर्ष लगभग 28 लाख लोग हृदय रोग से जान गंवाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से एक बड़ा हिस्सा उन मामलों का है जहां शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

सांस फूलना — सिर्फ कमजोरी नहीं, हो सकता है दिल का संकेत

अगर किसी व्यक्ति को सीढ़ियां चढ़ते समय, थोड़ा तेज चलने पर या मामूली काम करते वक्त भी सांस फूलने लगे, तो इसे उम्र या शारीरिक कमजोरी का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि जब हृदय शरीर को पर्याप्त मात्रा में रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता, तब फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है।

यह लक्षण बार-बार आए तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और धूम्रपान से परहेज इस जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

पैरों और टखनों में सूजन — दिल की कमजोरी का छुपा संकेत

शरीर के निचले हिस्से, विशेषकर पैरों और टखनों में असामान्य सूजन, हृदय की कार्यक्षमता में कमी का संकेत हो सकती है। जब दिल रक्त को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं और यह सूजन के रूप में पैरों में दिखाई देता है।

बहुत से लोग इसे लंबे समय तक खड़े रहने या थकान का परिणाम मान लेते हैं। लेकिन अगर यह सूजन लगातार बनी रहे, तो नमक का सेवन कम करना, शरीर को सक्रिय रखना और चिकित्सकीय जांच करवाना जरूरी है।

सीने में दर्द या भारीपन — हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत

सीने में दबाव, जलन या भारीपन महसूस होना हृदय रोग के सबसे स्पष्ट और गंभीर लक्षणों में से एक माना जाता है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में अवरोध आने लगता है, तो सीने में दर्द या दबाव उत्पन्न होता है।

यह दर्द कभी-कभी कंधों, बाहों, गर्दन या पीठ तक भी फैल सकता है। अनेक लोग इसे गैस या सामान्य दर्द समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि डॉक्टरों का स्पष्ट मत है कि यह हार्ट अटैक का प्रारंभिक संकेत हो सकता है और इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

बार-बार चक्कर आना और लगातार थकान — इसे न करें अनदेखा

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार चक्कर आना, अचानक कमजोरी महसूस होना या पर्याप्त आराम के बाद भी थकान दूर न होना जैसी समस्याएं हो रही हों, तो यह हृदय की कमजोरी का संकेत हो सकता है। जब दिल कमजोर होने लगता है, तो शरीर को आवश्यक ऊर्जा नहीं मिल पाती और व्यक्ति लगातार सुस्ती और थकान महसूस करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को, विशेषकर जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो, नियमित रूप से ईसीजी और लिपिड प्रोफाइल जांच करवानी चाहिए। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में हृदय रोगियों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है, इसलिए जागरूकता और समय पर उपचार ही इस चुनौती से निपटने का सबसे कारगर उपाय है।

Point of View

और इसकी सबसे बड़ी वजह है जागरूकता की कमी। विडंबना यह है कि देश में स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की बातें होती हैं, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य शिक्षा और निवारक चिकित्सा पर ध्यान अभी भी नगण्य है। जो लक्षण आज सामान्य थकान लग रहे हैं, वे कल अस्पताल की आईसीयू में पहुंचा सकते हैं — यह सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर हृदय स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता देनी होगी।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षणों में सांस फूलना, सीने में दबाव या भारीपन, पैरों में सूजन, बार-बार चक्कर आना और बिना कारण लगातार थकान शामिल हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है।
सीने में दर्द होने पर क्या करना चाहिए?
सीने में दर्द, दबाव या जलन महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसे गैस या सामान्य दर्द मानकर बिल्कुल नजरअंदाज न करें।
पैरों में सूजन दिल की बीमारी का संकेत कैसे हो सकती है?
जब हृदय रक्त को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं जो पैरों और टखनों में सूजन के रूप में दिखाई देता है। अगर यह सूजन लगातार बनी रहे तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण, धूम्रपान से परहेज और नमक का सेवन कम करना दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है। 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित ईसीजी और लिपिड प्रोफाइल जांच करवानी चाहिए।
हार्ट अटैक और सामान्य सीने के दर्द में क्या फर्क है?
हार्ट अटैक में सीने का दर्द आमतौर पर कंधों, बाहों, गर्दन या पीठ तक फैल सकता है और यह दबाव या भारीपन जैसा महसूस होता है। सामान्य सीने का दर्द आमतौर पर एक जगह सीमित रहता है और शरीर की स्थिति बदलने से राहत मिलती है।
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