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जंक फूड बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक, जानें सही पोषण के 5 जरूरी उपाय

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जंक फूड बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक, जानें सही पोषण के 5 जरूरी उपाय

सारांश

जंक फूड बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और कमजोर एकाग्रता का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार रोज 5 ग्राम से अधिक नमक और 25 ग्राम से अधिक चीनी खतरनाक है। बचपन से सही खान-पान की आदत बच्चे का पूरा भविष्य बदल सकती है।

मुख्य बातें

जंक फूड में पोषण नगण्य और तेल, नमक, चीनी की मात्रा अत्यधिक होती है जो बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को रोज 5 ग्राम से अधिक नमक और 20-25 ग्राम से अधिक चीनी नहीं देनी चाहिए।
दो वर्ष से कम आयु के शिशुओं के भोजन में नमक और चीनी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है।
अत्यधिक जंक फूड से बच्चों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और कमजोर याददाश्त का खतरा बढ़ता है।
रागी के लड्डू, भुना चना, ताजे फल, लस्सी जैसे घरेलू विकल्प जंक फूड का बेहतर और पोषणयुक्त विकल्प हैं।
FSSAI और "ईट राइट इंडिया" अभियान के बावजूद स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर नियंत्रण एक बड़ी नीतिगत चुनौती बनी हुई है।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बच्चों की थाली में परोसा जाने वाला खाना केवल उनकी भूख नहीं मिटाता, बल्कि यह उनकी शारीरिक वृद्धि, मानसिक क्षमता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य की नींव तय करता है। जंक फूड के बढ़ते चलन ने भारत में बच्चों के पोषण स्तर को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे लेकर लगातार चेतावनी दे रहे हैं।

जंक फूड क्यों है बच्चों के लिए घातक

पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, चॉकलेट, केक, बिस्कुट, नमकीन और कोल्ड ड्रिंक जैसे उत्पाद स्वाद में भले ही लुभावने हों, लेकिन इनमें अत्यधिक तेल, चीनी और नमक होता है जबकि शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व लगभग नगण्य होते हैं। यही कारण है कि पोषण विशेषज्ञ इसे "खाली कैलोरी" कहते हैं।

शुरुआती दौर में इसका असर भले ही दिखाई न दे, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बच्चों में मोटापा, शारीरिक कमजोरी, एकाग्रता में कमी और गंभीर बीमारियों का द्वार खोल देती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बचपन में अनुचित खानपान की आदतें वयस्क होने पर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का प्रमुख कारण बनती हैं।

रोजाना कितना नमक, चीनी और तेल है सुरक्षित

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक दिन में बच्चों को 5 ग्राम (एक छोटी चम्मच) से अधिक नमक नहीं देना चाहिए। इसी प्रकार चीनी का सेवन 20 से 25 ग्राम यानी 4 से 5 छोटी चम्मच तक सीमित रखना उचित है।

खाना पकाने में तेल की मात्रा 25 से 30 ग्राम यानी 5 से 6 छोटी चम्मच से अधिक नहीं होनी चाहिए। विशेष रूप से दो वर्ष से कम आयु के शिशुओं के भोजन में नमक और चीनी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि इस अवस्था में उनके अंग और तंत्रिका तंत्र विकास की संवेदनशील अवस्था में होते हैं।

दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम और विशेषज्ञों की चेतावनी

अत्यधिक जंक फूड सेवन से बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और कुछ मामलों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्टों में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में बच्चों में मोटापे की दर पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है।

इसके अलावा, अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बच्चों की याददाश्त और एकाग्रता को भी कमजोर करते हैं, जिसका सीधा प्रभाव उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ता है। यह तथ्य विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि भारत में स्कूली बच्चों का एक बड़ा वर्ग प्रतिदिन किसी न किसी रूप में जंक फूड का सेवन करता है।

स्वादिष्ट और पोषणयुक्त विकल्प जो बच्चों को पसंद आएंगे

जंक फूड को पूरी तरह नकारने की बजाय उसके स्वास्थ्यवर्धक विकल्प अपनाना अधिक व्यावहारिक है। ताजे मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, भुना चना, मूंगफली, मुरमुरा, घर की बनी शिकंजी, लस्सी, ताजे फलों का जूस, रागी के लड्डू और घर की बनी चटनियां ऐसे विकल्प हैं जो बच्चों को स्वाद और पोषण दोनों प्रदान करते हैं।

इन विकल्पों में प्राकृतिक शर्करा, फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक विटामिन मौजूद होते हैं जो बच्चे के समग्र विकास में सहायक हैं। माता-पिता यदि इन्हें आकर्षक तरीके से परोसें तो बच्चे इन्हें उतनी ही रुचि से खाते हैं।

बचपन से डालें सही खान-पान की आदत

पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि खाने की आदतें बचपन में ही पक्की होती हैं और यदि शुरुआत से ही संतुलित आहार की आदत विकसित की जाए, तो बच्चा न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी अधिक सक्षम बनता है। परिवार का भोजन व्यवहार, विद्यालय का वातावरण और सामाजिक प्रभाव — तीनों मिलकर बच्चे की खाने की आदतें तय करते हैं।

सरकार के "ईट राइट इंडिया" अभियान और FSSAI के दिशा-निर्देशों के बावजूद स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री पर नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में इस दिशा में नीतिगत सख्ती और जन जागरूकता दोनों की आवश्यकता होगी ताकि भारत की अगली पीढ़ी स्वस्थ और सशक्त बन सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस संकट की जड़ें केवल घर की रसोई तक सीमित नहीं हैं — स्कूलों के बाहर खुलेआम बिकते जंक फूड और उसके आक्रामक विज्ञापन सीधे बच्चों को निशाना बनाते हैं। FSSAI के दिशा-निर्देश कागजों पर हैं, जमीन पर लागू नहीं। विडंबना यह है कि सरकार एक तरफ "ईट राइट इंडिया" का नारा देती है, दूसरी तरफ प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग पर कर रियायतें जारी हैं। जब तक नीति और जवाबदेही एक साथ नहीं चलेगी, केवल माता-पिता को जागरूक करना पर्याप्त नहीं होगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंक फूड बच्चों की सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
जंक फूड में अत्यधिक तेल, नमक और चीनी होती है जबकि जरूरी पोषक तत्व नगण्य होते हैं। इससे बच्चों में मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और कमजोर एकाग्रता जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
बच्चों के लिए एक दिन में कितना नमक और चीनी सुरक्षित है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को रोज 5 ग्राम से अधिक नमक और 20 से 25 ग्राम से अधिक चीनी नहीं देनी चाहिए। दो वर्ष से छोटे शिशुओं के भोजन में नमक और चीनी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।
जंक फूड की जगह बच्चों को क्या खिलाएं?
ताजे मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, भुना चना, मुरमुरा, रागी के लड्डू, लस्सी और घर की बनी चटनियां स्वादिष्ट और पोषणयुक्त विकल्प हैं। ये बच्चों को स्वाद और जरूरी पोषण दोनों देते हैं।
क्या जंक फूड बच्चों की पढ़ाई पर भी असर डालता है?
हां, अत्यधिक प्रसंस्कृत और जंक फूड बच्चों की याददाश्त और एकाग्रता को कमजोर करता है। इससे उनका शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है।
बच्चों में सही खान-पान की आदत कब और कैसे डालें?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार खाने की आदतें बचपन में ही पक्की होती हैं, इसलिए जन्म से ही संतुलित आहार देना शुरू करें। परिवार का भोजन व्यवहार और घर का माहौल बच्चे की खाने की आदतों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है।
राष्ट्र प्रेस
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