27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जंक फूड बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक, जानें सही आहार के 5 असरदार विकल्प

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जंक फूड बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक, जानें सही आहार के 5 असरदार विकल्प

सारांश

जंक फूड बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और कमजोर याददाश्त का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों को नमक-चीनी बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। ताजे फल, रागी लड्डू और घर का खाना सबसे बेहतर विकल्प हैं।

मुख्य बातें

जंक फूड में तेल, नमक और चीनी अधिक होती है लेकिन जरूरी पोषक तत्व न के बराबर होते हैं।
बच्चों को दिन में 5 ग्राम से अधिक नमक और 20-25 ग्राम से अधिक चीनी नहीं देनी चाहिए।
2 वर्ष से कम आयु के बच्चों के भोजन में नमक और चीनी का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।
अत्यधिक जंक फूड से बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है।
रागी के लड्डू, भुना चना, ताजे फल और लस्सी जंक फूड के बेहतरीन पौष्टिक विकल्प हैं।
बचपन में बनी स्वस्थ खान-पान की आदतें जीवनभर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करती हैं।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बच्चों का दैनिक आहार केवल उनकी भूख नहीं मिटाता, बल्कि उनकी शारीरिक वृद्धि, मानसिक क्षमता और भविष्य की नींव भी तय करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि जंक फूड का बढ़ता चलन बच्चों के समग्र विकास के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है। खानपान की अनदेखी आज की सबसे बड़ी स्वास्थ्य भूल साबित हो सकती है।

जंक फूड क्यों है बच्चों के लिए हानिकारक

आज के दौर में पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और नमकीन जैसी चीजें बच्चों की पसंदीदा बन चुकी हैं। इन खाद्य पदार्थों में तेल, चीनी और नमक की मात्रा अत्यधिक होती है, जबकि शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और खनिज लगभग नगण्य होते हैं।

यही कारण है कि जंक फूड को 'खाली कैलोरी' का स्रोत कहा जाता है — यह पेट तो भरता है, लेकिन पोषण नहीं देता। धीरे-धीरे यह आदत बच्चे के शरीर और दिमाग दोनों को नुकसान पहुंचाती है।

रोजाना आहार में कितना नमक, चीनी और तेल सही

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक बच्चे को दिनभर में 5 ग्राम (एक छोटी चम्मच) से अधिक नमक नहीं लेना चाहिए। चीनी का सेवन 20 से 25 ग्राम यानी 4 से 5 छोटी चम्मच तक सीमित रखना जरूरी है।

इसी तरह तेल की मात्रा 25 से 30 ग्राम यानी 5 से 6 छोटी चम्मच से अधिक नहीं होनी चाहिए। दो वर्ष से कम आयु के शिशुओं के भोजन में तो नमक और चीनी का उपयोग पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि उनके अंग अभी विकासशील अवस्था में होते हैं।

बच्चों की सेहत पर दीर्घकालिक दुष्प्रभाव

अत्यधिक जंक फूड सेवन से बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और कुछ मामलों में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की जड़ बन सकता है।

इसके अतिरिक्त, जंक फूड बच्चों की एकाग्रता और स्मरण शक्ति को भी कमजोर करता है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ता है। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी बाल पोषण को वैश्विक प्राथमिकता मानता है और अनुचित आहार को बाल मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में गिनता है।

जंक फूड के 5 स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प

बच्चों को स्वाद से वंचित किए बिना भी हेल्दी आहार दिया जा सकता है। ताजे मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, भुना चना, मूंगफली और मुरमुरा जैसे विकल्प न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि पोषण से भरपूर भी हैं।

इसके अलावा घर की बनी शिकंजी, लस्सी, ताजे फलों का जूस, रागी के लड्डू और घर की बनी चटनियां बच्चों को भरपूर ऊर्जा और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं। ये विकल्प बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करते हैं।

बचपन से डालें सही खानपान की आदत

विशेषज्ञों का मानना है कि बचपन में बनी खान-पान की आदतें जीवनभर बनी रहती हैं। यदि शुरू से ही बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार की आदत डाली जाए, तो वे शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से तेज और दीर्घायु होते हैं।

माता-पिता की भूमिका यहां सबसे अहम है — घर में जो परोसा जाएगा, बच्चा वही सीखेगा। स्कूल कैंटीन नीति और सरकारी मध्याह्न भोजन कार्यक्रम भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले समय में यदि जंक फूड पर नियामक अंकुश और जागरूकता अभियान तेज हुए, तो भारत में बाल स्वास्थ्य के आंकड़े बेहतर हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जंक फूड उद्योग पर नियामक लगाम कमजोर बनी हुई है — यह एक गंभीर नीतिगत विरोधाभास है। जहां एक ओर सरकार 'पोषण अभियान' चलाती है, वहीं स्कूलों के बाहर और कैंटीनों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बिक्री बेरोकटोक जारी है। असली सवाल यह है कि क्या माता-पिता की जागरूकता अकेले काफी है, या खाद्य लेबलिंग और विज्ञापन नियमों में सख्त बदलाव जरूरी हैं? जब तक नीति और जागरूकता साथ नहीं चलेंगे, बच्चों की थाली में असली बदलाव नहीं आएगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंक फूड बच्चों की सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
जंक फूड में अत्यधिक तेल, नमक और चीनी होती है लेकिन जरूरी पोषक तत्व नहीं होते। इससे बच्चों में मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और कमजोर एकाग्रता जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बच्चों के लिए रोज कितना नमक और चीनी सही है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को दिन में 5 ग्राम से अधिक नमक और 20 से 25 ग्राम से अधिक चीनी नहीं लेनी चाहिए। दो साल से छोटे बच्चों के खाने में नमक और चीनी बिल्कुल नहीं डालनी चाहिए।
जंक फूड की जगह बच्चों को क्या खिलाएं?
बच्चों को ताजे मौसमी फल, भुना चना, मूंगफली, रागी के लड्डू, लस्सी और घर की बनी चटनियां दी जा सकती हैं। ये विकल्प स्वादिष्ट भी हैं और पोषण से भरपूर भी।
क्या जंक फूड बच्चों की पढ़ाई पर भी असर डालता है?
हां, जंक फूड बच्चों की एकाग्रता और याददाश्त को कमजोर करता है। इससे उनका पढ़ाई में ध्यान कम लगता है और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है।
बच्चों में हेल्दी खाने की आदत कैसे डालें?
बचपन से ही घर में पौष्टिक और संतुलित आहार परोसना सबसे प्रभावी तरीका है। माता-पिता का उदाहरण और घर का वातावरण बच्चों की खान-पान की आदतों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले