बलूचिस्तान में छात्र के गायब होने पर पाकिस्तानी सेना पर मानवाधिकार संगठन की निंदा

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बलूचिस्तान में छात्र के गायब होने पर पाकिस्तानी सेना पर मानवाधिकार संगठन की निंदा

सारांश

एक और छात्र के गायब होने के मामले ने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के संकट को उजागर किया है। प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान सेना की कड़ी निंदा की है।

मुख्य बातें

गायब होने की घटनाएँ बलूचिस्तान में बढ़ रही हैं।
पाकिस्तान सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप।
मुमताज़ बलोच का ठिकाना अभी तक अज्ञात है।
मानवाधिकार संगठन की निंदा और न्याय की वकालत।
संयुक्त राष्ट्र से मदद की अपील की गई है।

क्वेटा, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बलूचिस्तान में युवाओं के गायब होने और बिना मुकदमे के हत्याओं की बढ़ती घटनाओं के बीच एक और छात्र के गायब होने का मामला सामने आया है। सोमवार को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने इसके लिए पाकिस्तान सेना की निंदा की।

सूत्रों के अनुसार, पांक (बलूच नेशनल मूवमेंट का मानवाधिकार विभाग) ने कहा कि मुमताज़ बलोच को केच जिले के तुरबत के अब्सार इलाके से पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स के कर्मियों ने जबरन गायब कर दिया। मुमताज़ बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के बलोची भाषा और साहित्य विभाग का छात्र है।

एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, मुमताज़ को बिना किसी कानूनी वारंट या विधिक प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया, और उनका ठिकाना अभी तक अज्ञात है।

पांक के अनुसार, मुमताज़ बलोच आवारान जिले के ज़ीक गेशकोर का निवासी है और अपने साथियों के बीच बलोची भाषा और साहित्य के संरक्षण तथा प्रचार के प्रति समर्पित छात्र के रूप में जाना जाता है। उनका गायब होना बलूचिस्तान में जारी उस चिंताजनक पैटर्न को दर्शाता है, जहां बुद्धिजीवियों, छात्रों और आम नागरिकों को अक्सर मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जाता है और लापता कर दिया जाता है।

मानवाधिकार संगठन ने कहा, “ऐसी कार्रवाइयां न केवल मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि बौद्धिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को भी दबाती हैं। जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसमें मनमानी हिरासत के खिलाफ सुरक्षा और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार शामिल हैं।”

पांक ने पाकिस्तानी अधिकारियों से मुमताज़ के ठिकाने का तुरंत खुलासा करने, उसकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने या यदि कोई आरोप है तो उसे अदालत में पेश करने की मांग की। साथ ही, बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की प्रथा समाप्त करने और इस गैरकानूनी कृत्य के जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की भी मांग की।

मानवाधिकार संगठन ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह (जबरन या अनैच्छिक गुमशुदगी), से इस मामले पर तुरंत ध्यान देने और पाकिस्तानी अधिकारियों पर अपने मानवाधिकार दायित्वों का पालन करने के लिए दबाव बनाने की अपील की।

पांक ने मानवाधिकार उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण जारी रखने और पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय की वकालत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “ऐसे मामलों में लगातार चुप्पी और निष्क्रियता केवल अपराधियों को बढ़ावा देती है और बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट को और गहरा करती है।”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मुमताज़ बलोच का ठिकाना अभी तक ज्ञात है?
नहीं, मुमताज़ बलोच का ठिकाना अभी तक अज्ञात है।
मानवाधिकार संगठन ने किसके खिलाफ निंदा की है?
मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान सेना के खिलाफ निंदा की है।
पाकिस्तानी अधिकारियों से क्या मांग की गई है?
पाकिस्तानी अधिकारियों से मुमताज़ के ठिकाने का खुलासा करने और उसकी सुरक्षित रिहाई की मांग की गई है।
पांक संगठन का क्या उद्देश्य है?
पांक संगठन मानवाधिकार उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण और पीड़ितों के लिए न्याय की वकालत करता है।
क्या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मदद की अपील की गई है?
हाँ, मानवाधिकार संगठन ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र से मदद की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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