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बलूचिस्तान में 4 बलूच नागरिकों की जबरन गुमशुदगी, मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान से तत्काल जवाब माँगा

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बलूचिस्तान में 4 बलूच नागरिकों की जबरन गुमशुदगी, मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान से तत्काल जवाब माँगा

सारांश

बलूचिस्तान में चार बलूच नागरिकों — दो मज़दूर और दो छात्र — को जुलाई 2026 में कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने जबरन गायब किया। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए पाकिस्तान से तत्काल जवाब और स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

मुख्य बातें

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने 26 जुलाई 2026 को बलूचिस्तान में 4 बलूच नागरिकों की कथित जबरन गुमशुदगी की निंदा की।
आरिफ (ग्वादर, 24 जुलाई ), अतीक खेतरान (बर्खान, 21 जुलाई ), मीरान बलूच (क्वेटा, 23 जुलाई , तीसरी बार) और नासिर बलूच (क्वेटा, 27 मार्च ) के मामले दर्ज।
कथित संलिप्तता में मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) , काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) और अन्य पाकिस्तानी सुरक्षा बल शामिल बताए गए हैं।
संगठन ने माँग की कि लापता लोगों को तत्काल रिहा किया जाए या नागरिक अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने 26 जुलाई 2026 को बलूचिस्तान में चार बलूच नागरिकों की कथित जबरन गुमशुदगी की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान सरकार से तत्काल जवाब माँगा है। संगठन के अनुसार, इन घटनाओं में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) की कथित संलिप्तता है।

मुख्य घटनाक्रम: चार मामले, चार इलाके

दश्त शोलिग के मज़दूर आरिफ (पिता: यासीन) को 24 जुलाई को ग्वादर के पल्लिरी इलाके से कथित तौर पर उठाया गया। रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की भूमिका बताई जा रही है।

बर्खान निवासी अतीक खेतरान (पिता: रफीक) को 21 जुलाई को उनके घर से पाकिस्तानी राज्य सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लिया गया।

खारान के कुलान इलाके के 25 वर्षीय छात्र मीरान बलूच को 23 जुलाई की शाम करीब सात बजे क्वेटा के बशीर चौक से तीसरी बार कथित तौर पर गायब किया गया। इस मामले में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) की संलिप्तता की बात कही जा रही है।

क्वेटा के सरियाब रोड के 18 वर्षीय छात्र नासिर बलूच को 27 मार्च की रात करीब 2 बजे उनके इलाके से जबरन गायब किए जाने की सूचना है। रिपोर्टों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों और CTD की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

संगठन की माँगें

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने कहा, "जबरन गायब किया जाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है। इसमें किसी व्यक्ति की आज़ादी छीन ली जाती है और उसे कानून की सुरक्षा से बाहर कर दिया जाता है। अधिकारियों को तुरंत सभी लापता लोगों की स्थिति और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी देनी चाहिए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष व स्वतंत्र जाँच के ज़रिए कार्रवाई करनी चाहिए।"

संगठन ने माँग की है कि लापता व्यक्तियों को या तो तत्काल रिहा किया जाए या किसी सक्षम नागरिक अदालत के समक्ष जल्द से जल्द पेश किया जाए।

अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला

संगठन ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत बाध्य है कि वह जबरन गुमशुदगी की प्रथा को समाप्त करे और पीड़ितों तथा उनके परिजनों को सच्चाई, न्याय एवं उचित सहायता सुनिश्चित करे। गौरतलब है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों के मामले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वर्षों से उठाए जाते रहे हैं, और यह ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान पर पहले से ही मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर वैश्विक दबाव बना हुआ है।

आगे क्या

मानवाधिकार विभाग ने इन घटनाओं की स्वतंत्र, पारदर्शी और प्रभावी जाँच कराने की माँग की है। पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय की नज़रें अब इस्लामाबाद के अगले कदम पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे संयुक्त राष्ट्र की समितियाँ और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बार-बार उठा चुके हैं। चिंताजनक यह है कि एक ही पीड़ित — मीरान बलूच — के लिए यह तीसरी कथित गुमशुदगी है, जो दर्शाता है कि पिछली घटनाओं के बाद न जाँच हुई, न जवाबदेही। पाकिस्तान की नागरिक सरकार और सुरक्षा तंत्र के बीच की खाई इन मामलों में न्याय को और दुरूह बनाती है। जब तक स्वतंत्र और सत्यापन-योग्य जाँच तंत्र नहीं बनता, ये माँगें महज़ बयानों तक सीमित रहने का जोखिम उठाती हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के ये चार मामले क्या हैं?
ये चार मामले जुलाई 2026 में बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों से सामने आए हैं — ग्वादर से मज़दूर आरिफ (24 जुलाई), बर्खान से अतीक खेतरान (21 जुलाई), क्वेटा से छात्र मीरान बलूच (23 जुलाई, तीसरी बार) और क्वेटा से ही 18 वर्षीय छात्र नासिर बलूच (27 मार्च)। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने इन्हें दर्ज कर पाकिस्तान सरकार से जवाब माँगा है।
किन पाकिस्तानी एजेंसियों पर संलिप्तता का आरोप है?
रिपोर्टों के अनुसार इन मामलों में पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI), काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) और अन्य राज्य सुरक्षा बलों की भूमिका बताई जा रही है। हालाँकि पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान से क्या माँगें रखी हैं?
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग ने माँग की है कि पाकिस्तान सरकार तुरंत सभी लापता व्यक्तियों की स्थिति और ठिकाने की जानकारी दे, उन्हें रिहा करे या नागरिक अदालत के सामने पेश करे, और स्वतंत्र व पारदर्शी जाँच कराए। साथ ही पीड़ितों और उनके परिजनों को सच्चाई, न्याय और उचित सहायता सुनिश्चित करने की माँग भी की गई है।
जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन क्यों मानी जाती है?
जबरन गुमशुदगी में किसी व्यक्ति को राज्य या उसके एजेंटों द्वारा हिरासत में लिया जाता है और उसकी जानकारी या ठिकाना छुपाया जाता है, जिससे वह कानूनी सुरक्षा से वंचित हो जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून, विशेषतः जबरन गुमशुदगी से सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र, का गंभीर उल्लंघन है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों का पुराना इतिहास क्या है?
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों के मामले दो दशकों से अधिक समय से दर्ज होते आ रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार समितियाँ इन्हें बार-बार उठा चुकी हैं। इस बार मीरान बलूच के लिए यह तीसरी कथित गुमशुदगी है, जो दर्शाती है कि पिछले मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो पाई।
राष्ट्र प्रेस
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