31 जुलाई 2026
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बलूच छात्रों का जबरन गायब होना जारी: पाकिस्तानी बलों पर आरोप, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग

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बलूच छात्रों का जबरन गायब होना जारी: पाकिस्तानी बलों पर आरोप, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग

सारांश

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर दो और बलूच छात्रों — मुल्तान से बख्तियार बलूच और क्वेटा से नूर जैब — को जबरन गायब करने का आरोप। मानवाधिकार संगठन पांक ने यूएन और यूरोपियन यूनियन से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। यह बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के लंबे सिलसिले की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर 10 जुलाई को मुल्तान के निश्तर अस्पताल से 23 वर्षीय बख्तियार बलूच को कथित तौर पर जबरन उठाने का आरोप।
17 वर्षीय नूर जैब को क्वेटा के सरियाब रोड इलाके से पिछले महीने कथित रूप से गायब किया गया।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने घटनाओं की निंदा की और यूएन , EU व अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
पांक के अनुसार, ये घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन हैं और दोषियों के विरुद्ध कोई जवाबदेही नहीं है।
बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने मस्तुंग के न्यायाधीश अब्दुल हकीम काकर की हत्या की निंदा करते हुए स्वतंत्र जाँच की माँग की।

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर बलूचिस्तान और पंजाब प्रांतों में दो और बलूच छात्रों को कथित तौर पर जबरन गायब करने का आरोप लगा है। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने 30 जुलाई को इन घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। यह घटनाएँ बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के एक लंबे और चिंताजनक सिलसिले की नवीनतम कड़ी हैं।

दो छात्रों की जबरन गुमशुदगी: क्या हुआ

पांक के अनुसार, 23 वर्षीय छात्र बख्तियार बलूच को 10 जुलाई को पंजाब के मुल्तान शहर स्थित निश्तर अस्पताल से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर जबरन उठा लिया। एक अलग घटना में, 17 वर्षीय छात्र नूर जैब को पिछले महीने बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के सरियाब रोड इलाके से कथित रूप से गायब किया गया।

गौरतलब है कि दोनों पीड़ित नाबालिग या युवा छात्र हैं — एक अस्पताल परिसर से और दूसरा एक आवासीय इलाके से। अधिकारों संगठनों के अनुसार, इस तरह के मामलों में परिवारों को अक्सर न तो हिरासत की कोई आधिकारिक सूचना दी जाती है और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

पांक की कड़ी निंदा और अंतरराष्ट्रीय अपील

इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए पांक ने कहा, "बलूच छात्रों और आम लोगों को जबरन गायब किए जाने की लगातार घटनाएँ बेहद चिंताजनक हैं और यह दर्शाती हैं कि दोषियों के विरुद्ध कोई जवाबदेही नहीं है। इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत ध्यान देना चाहिए।"

संगठन ने आगे कहा, "छात्रों समेत युवाओं को गायब करना इंसानी गरिमा और कानून के शासन पर सीधा हमला है। किसी भी संस्था को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह कानून से ऊपर होकर लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित करे या उन्हें गुप्त हिरासत में रखे।"

पांक ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन), जबरदस्ती गुमशुदगी पर यूएन वर्किंग ग्रुप, संबंधित यूएन स्पेशल रिपोर्टर्स, यूरोपियन यूनियन (EU) और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस संकट को हल करने के लिए तत्काल दखल दें और ठोस कदम उठाएँ।

मानवाधिकार उल्लंघन: कानूनी परिप्रेक्ष्य

पांक ने स्पष्ट किया कि जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है। इससे प्रभावित होने वाले अधिकारों में स्वतंत्रता का अधिकार, व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार, उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार और मनमानी गिरफ्तारी से संरक्षण का अधिकार शामिल हैं। संगठन ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयाँ पीड़ितों और उनके परिवारों को दीर्घकालिक मानसिक और सामाजिक पीड़ा में धकेलती हैं।

न्यायाधीश हत्याकांड पर बलूच अमेरिकन कांग्रेस की प्रतिक्रिया

इसी संदर्भ में, बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल हकीम काकर की हालिया हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की, जिसमें पाकिस्तानी राज्य की गुप्त एजेंसियों की कथित भूमिका से जुड़े आरोपों की भी जाँच शामिल हो।

आगे क्या होगा

पांक ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और निष्क्रियता से दोषियों का हौसला बढ़ता है और पीड़ित परिवारों की पीड़ा लंबी होती जाती है। ये परिवार आज भी सच, न्याय और जवाबदेही का इंतजार कर रहे हैं। यदि यूएन और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकाय पाकिस्तान पर दबाव बनाने में विफल रहे, तो बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का यह सिलसिला और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि कार्रवाई का दायरा और भी व्यापक हो रहा है। यूएन वर्किंग ग्रुप को इस मामले में बार-बार रेफर किया जाता है, लेकिन पाकिस्तान पर वास्तविक जवाबदेही का दबाव नगण्य रहा है। जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय निंदा-प्रस्तावों से आगे बढ़कर ठोस राजनयिक और आर्थिक दबाव नहीं बनाता, ये परिवार न्याय की प्रतीक्षा में ही रहेंगे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी की ताज़ा घटनाएँ क्या हैं?
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर 10 जुलाई को मुल्तान के निश्तर अस्पताल से 23 वर्षीय बख्तियार बलूच और क्वेटा के सरियाब रोड से 17 वर्षीय नूर जैब को कथित तौर पर जबरन गायब करने का आरोप है। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने 30 जुलाई को इन घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक की।
पांक (PAANK) कौन है और इसकी माँग क्या है?
पांक, बलूच नेशनल मूवमेंट का मानवाधिकार विभाग है जो बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामलों को दर्ज और उजागर करता है। संगठन ने यूएन, यूएन वर्किंग ग्रुप ऑन एनफोर्स्ड डिसअपियरेंसेज़, यूएन स्पेशल रिपोर्टर्स और यूरोपियन यूनियन से तत्काल हस्तक्षेप और पाकिस्तान पर ठोस दबाव बनाने की माँग की है।
जबरन गुमशुदगी किन अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है?
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत जबरन गुमशुदगी एक गंभीर अपराध है। इससे व्यक्ति की स्वतंत्रता, सुरक्षा, उचित कानूनी प्रक्रिया और मनमानी गिरफ्तारी से संरक्षण के मूल अधिकारों का हनन होता है। संयुक्त राष्ट्र का 1992 का घोषणापत्र इसे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के रूप में परिभाषित करता है।
मस्तुंग के न्यायाधीश अब्दुल हकीम काकर की हत्या से यह मामला कैसे जुड़ा है?
बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के न्यायाधीश अब्दुल हकीम काकर की हालिया हत्या की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग की है, जिसमें पाकिस्तानी राज्य की गुप्त एजेंसियों की कथित भूमिका की भी जाँच शामिल हो।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का इतिहास क्या है?
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का सिलसिला दशकों पुराना है और मानवाधिकार संगठनों ने सैकड़ों मामले दर्ज किए हैं। पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुकी है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि दोषियों के विरुद्ध जवाबदेही लगभग शून्य रही है।
राष्ट्र प्रेस
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