बलूच छात्रों का जबरन गायब होना जारी: पाकिस्तानी बलों पर आरोप, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर बलूचिस्तान और पंजाब प्रांतों में दो और बलूच छात्रों को कथित तौर पर जबरन गायब करने का आरोप लगा है। बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने 30 जुलाई को इन घटनाओं की जानकारी सार्वजनिक की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। यह घटनाएँ बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के एक लंबे और चिंताजनक सिलसिले की नवीनतम कड़ी हैं।
दो छात्रों की जबरन गुमशुदगी: क्या हुआ
पांक के अनुसार, 23 वर्षीय छात्र बख्तियार बलूच को 10 जुलाई को पंजाब के मुल्तान शहर स्थित निश्तर अस्पताल से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर जबरन उठा लिया। एक अलग घटना में, 17 वर्षीय छात्र नूर जैब को पिछले महीने बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के सरियाब रोड इलाके से कथित रूप से गायब किया गया।
गौरतलब है कि दोनों पीड़ित नाबालिग या युवा छात्र हैं — एक अस्पताल परिसर से और दूसरा एक आवासीय इलाके से। अधिकारों संगठनों के अनुसार, इस तरह के मामलों में परिवारों को अक्सर न तो हिरासत की कोई आधिकारिक सूचना दी जाती है और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
पांक की कड़ी निंदा और अंतरराष्ट्रीय अपील
इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए पांक ने कहा, "बलूच छात्रों और आम लोगों को जबरन गायब किए जाने की लगातार घटनाएँ बेहद चिंताजनक हैं और यह दर्शाती हैं कि दोषियों के विरुद्ध कोई जवाबदेही नहीं है। इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत ध्यान देना चाहिए।"
संगठन ने आगे कहा, "छात्रों समेत युवाओं को गायब करना इंसानी गरिमा और कानून के शासन पर सीधा हमला है। किसी भी संस्था को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह कानून से ऊपर होकर लोगों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित करे या उन्हें गुप्त हिरासत में रखे।"
पांक ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन), जबरदस्ती गुमशुदगी पर यूएन वर्किंग ग्रुप, संबंधित यूएन स्पेशल रिपोर्टर्स, यूरोपियन यूनियन (EU) और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस संकट को हल करने के लिए तत्काल दखल दें और ठोस कदम उठाएँ।
मानवाधिकार उल्लंघन: कानूनी परिप्रेक्ष्य
पांक ने स्पष्ट किया कि जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन है। इससे प्रभावित होने वाले अधिकारों में स्वतंत्रता का अधिकार, व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार, उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार और मनमानी गिरफ्तारी से संरक्षण का अधिकार शामिल हैं। संगठन ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयाँ पीड़ितों और उनके परिवारों को दीर्घकालिक मानसिक और सामाजिक पीड़ा में धकेलती हैं।
न्यायाधीश हत्याकांड पर बलूच अमेरिकन कांग्रेस की प्रतिक्रिया
इसी संदर्भ में, बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल हकीम काकर की हालिया हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की, जिसमें पाकिस्तानी राज्य की गुप्त एजेंसियों की कथित भूमिका से जुड़े आरोपों की भी जाँच शामिल हो।
आगे क्या होगा
पांक ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और निष्क्रियता से दोषियों का हौसला बढ़ता है और पीड़ित परिवारों की पीड़ा लंबी होती जाती है। ये परिवार आज भी सच, न्याय और जवाबदेही का इंतजार कर रहे हैं। यदि यूएन और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकाय पाकिस्तान पर दबाव बनाने में विफल रहे, तो बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी का यह सिलसिला और गहरा हो सकता है।