12 जुलाई 2026
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बलूच छात्रों और महिलाओं के जबरन गायब होने पर संगठनों का विरोध, ईद पर परिवार गम में डूबे

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बलूच छात्रों और महिलाओं के जबरन गायब होने पर संगठनों का विरोध, ईद पर परिवार गम में डूबे

सारांश

ईद-उल-अजहा पर जहाँ परिवार जश्न मना रहे थे, बलूच छात्रों और महिलाओं के परिजन अपने प्रियजनों की तलाश में थे। BSC, BWF और 'पांक' ने जबरन गुमशुदगी की निंदा की; हबीबा पीरजान को दूसरी बार कथित तौर पर उठाया गया और खुजदार में रातभर छापेमारी में सात लोग हिरासत में लिए गए।

मुख्य बातें

बलूच स्टूडेंट्स काउंसिल (BSC) के पंजाब और इस्लामाबाद चैप्टर के कई छात्रों को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया; परिवारों को कोई जानकारी नहीं दी गई।
बलूच महिला हबीबा पीरजान को 25 मई 2026 को कराची में घर पर छापे के बाद दूसरी बार कथित तौर पर उठाया गया — पहली बार मई 2022 में उठाया गया था।
बलूच वुमेन फोरम (BWF) ने बलूच महिलाओं को बार-बार निशाना बनाने को 'दमन और सामूहिक सजा की चिंताजनक व्यवस्था' बताया।
बलूच नेशनल मूवमेंट के 'पांक' विभाग ने हबीबा की तुरंत रिहाई और जबरन गुमशुदगी की प्रथा बंद करने की माँग की।
खुजदार जिले में रातभर छापेमारी में दुकानदार सैफ-उर-रहमान सहित कम से कम सात लोगों को हिरासत में लिया गया।

पाकिस्तान में बलूच नागरिकों — विशेष रूप से महिलाओं और छात्रों — के जबरन गायब किए जाने के मामलों की 27 मई 2026 को कई प्रमुख मानवाधिकार और छात्र संगठनों ने कड़ी निंदा की। संगठनों का आरोप है कि ये कार्रवाइयाँ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही हैं, जिससे प्रभावित परिवार भारी मानसिक पीड़ा में हैं।

बलूच छात्रों की जबरन गुमशुदगी

बलूच स्टूडेंट्स काउंसिल (BSC) के पंजाब और इस्लामाबाद चैप्टर के अनुसार, संगठन से जुड़े कई छात्रों को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया है। उनके परिवारों को अब तक न गिरफ्तारी की पुष्टि मिली है और न ही उनके ठिकाने की कोई विश्वसनीय जानकारी दी गई है।

BSC पंजाब ने एक बयान में कहा, 'ईद-उल-अजहा के मौके पर जहाँ दुनियाभर में लोग अपने परिवारों के साथ खुशी मना रहे हैं, वहीं जबरन गायब किए गए बलूच छात्रों के माता-पिता, भाई-बहन और करीबी अपने प्रियजनों से बिछड़ने के दुख में डूबे हुए हैं। इन परिवारों के लिए ईद अब इंतजार, अनिश्चितता और गम की पहचान बन गई है।' संगठन ने यह भी कहा कि यह स्थिति 'बुनियादी मानव और कानूनी सिद्धांतों' पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

हबीबा पीरजान की दूसरी बार जबरन गुमशुदगी

बलूचिस्तान के नजरआबाद तुंप इलाके की मूल निवासी और फिलहाल कराची में रह रही बलूच महिला हबीबा पीरजान को कथित तौर पर 25 मई को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उनके घर पर छापा मारकर जबरन गायब कर दिया।

बलूच वुमेन फोरम (BWF) के अनुसार, यह दूसरी बार है जब हबीबा को इस प्रकार हिरासत में लिया गया है — इससे पहले मई 2022 में भी उन्हें उठाया गया था और कुछ दिनों बाद रिहा किया गया था। BWF ने कहा, 'बलूच महिलाओं को बार-बार जबरन गायब किया जाना दमन और सामूहिक सजा की एक बेहद चिंताजनक व्यवस्था को दर्शाता है। इससे लोगों में डर और अस्थिरता का माहौल बन गया है, जबकि परिवार लंबे समय तक अनिश्चितता में जीने को मजबूर हैं — उन्हें न जानकारी मिलती है, न कानूनी मदद और न ही कोई जवाबदेही।'

मानवाधिकार संगठनों की माँग

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने हबीबा पीरजान की तुरंत और सुरक्षित रिहाई की माँग की। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से बलूचिस्तान और कराची में जबरन गुमशुदगी तथा परिवारों को परेशान करने की प्रथा बंद करने की अपील की।

गौरतलब है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामले वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की चिंता का विषय रहे हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब ईद-उल-अजहा के अवसर पर पाकिस्तान भर में सुरक्षा अभियान तेज बताए जा रहे हैं।

खुजदार में रातभर छापेमारी

सोमवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के कई इलाकों में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाए। रिपोर्टों के अनुसार, खुजदार जिले के डॉक्टर कॉलोनी इलाके में देर रात छापे के दौरान सैफ-उर-रहमान नाम के एक दुकानदार को कथित तौर पर जबरन उठाया गया।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि जिले के अलग-अलग इलाकों में हुई कार्रवाइयों में छह और लोगों को हिरासत में लिया गया, हालाँकि उनकी पहचान अब तक सामने नहीं आई है। इन कार्रवाइयों पर पाकिस्तानी सरकार या सुरक्षा बलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आगे क्या

मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से इन मामलों का संज्ञान लेने की अपील की है। BWF और BSC ने स्पष्ट किया है कि जब तक गायब किए गए व्यक्तियों की सुरक्षित वापसी नहीं होती और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दमन की रणनीति में गुणात्मक बदलाव का संकेत है। पाकिस्तानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जवाब न आना जवाबदेही के पूर्ण अभाव को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी इस संकट को और गहरा करती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी क्या है?
जबरन गुमशुदगी वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति को बिना किसी आधिकारिक गिरफ्तारी के सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर उठा लिया जाता है और उसके परिवार को उसके ठिकाने या स्थिति की कोई जानकारी नहीं दी जाती। बलूचिस्तान में यह मामले वर्षों से मानवाधिकार संगठनों की चिंता का विषय रहे हैं।
हबीबा पीरजान कौन हैं और उन्हें क्यों उठाया गया?
हबीबा पीरजान बलूचिस्तान के नजरआबाद तुंप इलाके की मूल निवासी हैं जो कराची में रह रही थीं। उन्हें कथित तौर पर 25 मई 2026 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने घर पर छापा मारकर जबरन गायब किया; यह उनकी दूसरी ऐसी गुमशुदगी है, पहली बार मई 2022 में हुई थी।
बलूच स्टूडेंट्स काउंसिल (BSC) ने क्या आरोप लगाए हैं?
BSC के पंजाब और इस्लामाबाद चैप्टर ने आरोप लगाया है कि उनके कई छात्र सदस्यों को जबरन गायब किया गया है और उनके परिवारों को गिरफ्तारी या ठिकाने की कोई जानकारी नहीं दी गई। संगठन ने कहा कि यह स्थिति बुनियादी मानव और कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन है।
खुजदार में क्या हुआ?
सोमवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने खुजदार जिले सहित बलूचिस्तान के कई इलाकों में रातभर छापेमारी की। डॉक्टर कॉलोनी इलाके में दुकानदार सैफ-उर-रहमान सहित कम से कम सात लोगों को हिरासत में लिया गया, हालाँकि बाकी लोगों की पहचान सामने नहीं आई है।
इन मामलों में मानवाधिकार संगठनों की क्या माँग है?
बलूच नेशनल मूवमेंट के 'पांक' विभाग और BWF ने हबीबा पीरजान की तुरंत और सुरक्षित रिहाई की माँग की है। साथ ही पाकिस्तानी अधिकारियों से बलूचिस्तान और कराची में जबरन गुमशुदगी और परिवारों को परेशान करने की प्रथा बंद करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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