बलूच छात्रों और महिलाओं के जबरन गायब होने पर संगठनों का विरोध, ईद पर परिवार गम में डूबे
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में बलूच नागरिकों — विशेष रूप से महिलाओं और छात्रों — के जबरन गायब किए जाने के मामलों की 27 मई 2026 को कई प्रमुख मानवाधिकार और छात्र संगठनों ने कड़ी निंदा की। संगठनों का आरोप है कि ये कार्रवाइयाँ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही हैं, जिससे प्रभावित परिवार भारी मानसिक पीड़ा में हैं।
बलूच छात्रों की जबरन गुमशुदगी
बलूच स्टूडेंट्स काउंसिल (BSC) के पंजाब और इस्लामाबाद चैप्टर के अनुसार, संगठन से जुड़े कई छात्रों को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया है। उनके परिवारों को अब तक न गिरफ्तारी की पुष्टि मिली है और न ही उनके ठिकाने की कोई विश्वसनीय जानकारी दी गई है।
BSC पंजाब ने एक बयान में कहा, 'ईद-उल-अजहा के मौके पर जहाँ दुनियाभर में लोग अपने परिवारों के साथ खुशी मना रहे हैं, वहीं जबरन गायब किए गए बलूच छात्रों के माता-पिता, भाई-बहन और करीबी अपने प्रियजनों से बिछड़ने के दुख में डूबे हुए हैं। इन परिवारों के लिए ईद अब इंतजार, अनिश्चितता और गम की पहचान बन गई है।' संगठन ने यह भी कहा कि यह स्थिति 'बुनियादी मानव और कानूनी सिद्धांतों' पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
हबीबा पीरजान की दूसरी बार जबरन गुमशुदगी
बलूचिस्तान के नजरआबाद तुंप इलाके की मूल निवासी और फिलहाल कराची में रह रही बलूच महिला हबीबा पीरजान को कथित तौर पर 25 मई को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उनके घर पर छापा मारकर जबरन गायब कर दिया।
बलूच वुमेन फोरम (BWF) के अनुसार, यह दूसरी बार है जब हबीबा को इस प्रकार हिरासत में लिया गया है — इससे पहले मई 2022 में भी उन्हें उठाया गया था और कुछ दिनों बाद रिहा किया गया था। BWF ने कहा, 'बलूच महिलाओं को बार-बार जबरन गायब किया जाना दमन और सामूहिक सजा की एक बेहद चिंताजनक व्यवस्था को दर्शाता है। इससे लोगों में डर और अस्थिरता का माहौल बन गया है, जबकि परिवार लंबे समय तक अनिश्चितता में जीने को मजबूर हैं — उन्हें न जानकारी मिलती है, न कानूनी मदद और न ही कोई जवाबदेही।'
मानवाधिकार संगठनों की माँग
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग 'पांक' ने हबीबा पीरजान की तुरंत और सुरक्षित रिहाई की माँग की। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से बलूचिस्तान और कराची में जबरन गुमशुदगी तथा परिवारों को परेशान करने की प्रथा बंद करने की अपील की।
गौरतलब है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामले वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की चिंता का विषय रहे हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब ईद-उल-अजहा के अवसर पर पाकिस्तान भर में सुरक्षा अभियान तेज बताए जा रहे हैं।
खुजदार में रातभर छापेमारी
सोमवार को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के कई इलाकों में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाए। रिपोर्टों के अनुसार, खुजदार जिले के डॉक्टर कॉलोनी इलाके में देर रात छापे के दौरान सैफ-उर-रहमान नाम के एक दुकानदार को कथित तौर पर जबरन उठाया गया।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि जिले के अलग-अलग इलाकों में हुई कार्रवाइयों में छह और लोगों को हिरासत में लिया गया, हालाँकि उनकी पहचान अब तक सामने नहीं आई है। इन कार्रवाइयों पर पाकिस्तानी सरकार या सुरक्षा बलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
आगे क्या
मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से इन मामलों का संज्ञान लेने की अपील की है। BWF और BSC ने स्पष्ट किया है कि जब तक गायब किए गए व्यक्तियों की सुरक्षित वापसी नहीं होती और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा।