बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और हत्याएँ: दो नागरिकों की कथित गैर-न्यायिक मौत, सात और लापता
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट गहराता जा रहा है — मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने 22 मई 2026 को दो नागरिकों की कथित गैर-न्यायिक हत्या का मामला उजागर किया है, जिनमें एक बुजुर्ग किसान और एक युवा ड्राइवर शामिल हैं। इसके साथ ही, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसी सप्ताह बलूचिस्तान के अलग-अलग जिलों से सात और नागरिकों को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
केच जिले के तुरबत इलाके में 21 मई 2026 को बुजुर्ग किसान शेरदिल की मौत हो गई। BYC के अनुसार, पाकिस्तान की फ्रंटियर कोर (FC) के जवानों ने उनकी जमीन के पास गोलीबारी की, जिसमें शेरदिल को गोली लगी और वे मौके पर ही दम तोड़ गए। संगठन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
दूसरी घटना में, 21 साल के ड्राइवर मोहसिन का शव 19 मई को पंजगुर जिले के पारूम इलाके में मिला। BYC के अनुसार, मोहसिन को 16 मार्च को पारूम के जीरक चेकपोस्ट से कथित तौर पर FC जवानों ने हिरासत में लिया था — और लगभग 66 दिन बाद उसका शव बरामद हुआ। आरोप है कि हिरासत के दौरान उसकी हत्या कर शव फेंक दिया गया।
सात नागरिकों की जबरन गुमशुदगी
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार को बलूचिस्तान के कई जिलों से सात नागरिकों को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने हिरासत में लेकर गायब कर दिया। इनमें एक 14 साल का नाबालिग लड़का, एक गायक, मजदूर, एक मछुआरा और एक ड्राइवर शामिल हैं।
ग्वादर जिले के धूर चेकपोस्ट पर 29 अप्रैल 2026 की शाम को 23 साल के ड्राइवर जावेद बलूच को कथित तौर पर मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के कर्मियों ने हिरासत में लिया। केच जिले के तुरबत के चाह सर इलाके से 30 अप्रैल को 20 साल के गायक खलील करीम को हिरासत में लेकर गायब कर दिया गया।
19 अप्रैल की रात ग्वादर जिले के जिवानी के पनवान इलाके में FC और MI के जवानों ने घरों पर छापे मारे और 14 साल के दिलशाद दाद, ड्राइवर अली फजल तथा 19 साल के मछुआरे सोहेल करीम को हिरासत में लेकर कथित तौर पर गायब कर दिया। इसके अलावा, 24 साल के मजदूर अब्दुल हक शहजाद को काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के कर्मियों ने हिरासत में लिया और वह भी लापता बताए जा रहे हैं। चागई जिले के किली हाजी मोहम्मद इलाके के 30 साल के नागरिक मजीद को FC और CTD कर्मियों ने हिरासत में लिया, और वह भी बाद में लापता हो गए।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
BYC ने कहा है कि बलूचिस्तान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। संगठन के अनुसार, 'आम लोगों को न तो सुरक्षा मिल रही है और न ही न्याय।' उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक संस्थाओं से अपील की है कि बलूचिस्तान की बिगड़ती स्थिति पर तत्काल ध्यान दें। संगठन ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, न्याय, नागरिकों की सुरक्षा और प्रभावित परिवारों के सम्मान की भी माँग की है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी कोई नई घटना नहीं है — यह क्षेत्र वर्षों से इस संकट से जूझ रहा है। पीड़ितों में किसान, मछुआरे, मजदूर, गायक और नाबालिग बच्चे शामिल हैं, जो दर्शाता है कि यह समस्या समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही है। BYC ने कहा कि लोग 'बेहद दर्द और दुख में जी रहे हैं, खासकर उन दिनों में जो शांति और साथ के होने चाहिए।'
क्या होगा आगे
अंतरराष्ट्रीय दबाव और मानवाधिकार संगठनों की अपीलों के बावजूद, पाकिस्तान सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BYC और अन्य संगठनों की माँग है कि लापता लोगों का पता लगाया जाए और दोषियों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। इन मामलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं।