बलूचिस्तान में कथित न्यायेतर हत्या और दो छात्रों के जबरन लापता होने का आरोप, मानवाधिकार संगठनों की अपील
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों की एक और गंभीर कड़ी सामने आई है। प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने 13 जून 2026 को आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर एक नागरिक की न्यायेतर हत्या की गई है, जबकि दो छात्रों को जबरन लापता कर दिया गया है। ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति और नागरिक अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं लगातार गहराती जा रही हैं।
तुर्बत में शव बरामद, हत्या का आरोप
मानवाधिकार संगठन बलूच यकेती कमिटी (BYC) के अनुसार, 28 वर्षीय सद्दाम का शव शुक्रवार को केच जिले के तुर्बत क्षेत्र के डी-बलोच इलाके में बरामद हुआ। संगठन का कहना है कि उनकी मौत की परिस्थितियों ने स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार पर्यवेक्षकों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
BYC ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 'सद्दाम की हत्या बलूचिस्तान में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की एक और दुखद कड़ी है। क्षेत्र के अनेक परिवार अपने प्रियजनों को खोने का दर्द झेल रहे हैं, जबकि उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।' संगठन ने इस कथित न्यायेतर हत्या की कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं, पत्रकारों और वैश्विक संगठनों से मामले का संज्ञान लेने की अपील की है।
दो छात्र जबरन लापता, परिवार बेखबर
इसी बीच, मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस ऑफ जस्टिस (BVJ) ने आरोप लगाया कि 19 वर्षीय शुक्रुल्लाह और 20 वर्षीय जुबैर बलूच नामक दो छात्रों को 4 जून को बलूचिस्तान के दलबंदिन क्षेत्र से कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा जबरन उठा लिया गया।
BVJ के अनुसार, दोनों छात्रों के परिवार उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में किसी भी आधिकारिक जानकारी से अब भी वंचित हैं। संगठन ने कहा कि 'नागरिकों का लगातार लापता होना बलूचिस्तान में भय और असुरक्षा को और बढ़ा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता, कानूनी प्रक्रिया और मनमानी हिरासत से सुरक्षा का अधिकार है।'
व्यापक संदर्भ: बढ़ते आरोपों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी और कथित न्यायेतर हत्याओं के मामले वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के एजेंडे पर हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाएं पहले भी इस क्षेत्र में नागरिक अधिकारों के हनन पर चिंता जता चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के बीच बलूचिस्तान की स्थिति और भी जटिल हो गई है।
पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अतीत में ऐसे कई आरोपों से इनकार करती रही हैं। आलोचकों का कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के अभाव में इन मामलों की सच्चाई सामने नहीं आ पाती।
मानवाधिकार संगठनों की माँग
BYC और BVJ दोनों संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन मामलों में हस्तक्षेप की माँग की है। संगठनों का कहना है कि जबरन गुमशुदगी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और कानून के शासन का गंभीर उल्लंघन है, और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकाय इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और पाकिस्तान सरकार इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।