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बैराबी-सैरांग रेल लाइन: उद्घाटन के एक साल में 15 लाख यात्री, मिजोरम को मिली नई कनेक्टिविटी

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बैराबी-सैरांग रेल लाइन: उद्घाटन के एक साल में 15 लाख यात्री, मिजोरम को मिली नई कनेक्टिविटी

सारांश

51.38 किलोमीटर की बैराबी-सैरांग रेल लाइन ने उद्घाटन के एक साल में मिजोरम को बदल दिया — 15 लाख यात्री, ₹54 करोड़ की कमाई और दिल्ली तक पहला सीधा रेल संपर्क। 153 पुल और 45 सुरंगों से बनी यह लाइन पूर्वोत्तर के बुनियादी ढाँचे की नई मिसाल है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेल लाइन और सैरांग रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था।
एक वर्ष में 15 लाख से अधिक यात्री , 1,100 से अधिक ट्रिप और ₹54 करोड़ की टिकट बिक्री दर्ज।
सैरांग स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 3,300 यात्री ; कुल 5.54 लाख यात्री आवाजाही।
परियोजना में 153 पुल , 45 सुरंगें (लगभग 16 किमी); सबसे ऊँचा पुल 114 मीटर — कुतुबमीनार से 42 मीटर ऊँचा।
सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस ने मिजोरम को नई दिल्ली से पहला सीधा प्रीमियम रेल संपर्क दिया।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जनवरी 2026 में सैरांग-सिलचर पैसेंजर ट्रेन सेवा का उद्घाटन किया।

बैराबी-सैरांग रेल लाइन के उद्घाटन को एक वर्ष पूरा होने पर रेलवे अधिकारियों ने 13 सितंबर 2026 को बताया कि 51.38 किलोमीटर लंबी इस पर्वतीय रेल परियोजना ने मिजोरम को पहली बार भारत के रेलवे मानचित्र पर प्रमुखता से स्थापित किया है और महज एक साल में 15 लाख से अधिक यात्री इस सेवा का लाभ उठा चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को इस चुनौतीपूर्ण रेल परियोजना और सैरांग रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था, जिससे आइजोल की दहलीज तक रेल सेवा पहुँची।

इंजीनियरिंग की अद्वितीय उपलब्धि

बैराबी-सैरांग रेल लाइन मिजोरम की खड़ी ढलानों, गहरी घाटियों और दुर्गम भूभाग से होकर गुजरती है। इस परियोजना में कुल 153 पुल शामिल हैं — 55 बड़े पुल, 88 छोटे पुल और 10 रोड ओवर ब्रिज / रोड अंडर ब्रिज। इनमें से 6 पुलों की ऊँचाई 70 मीटर से अधिक है, जबकि सबसे ऊँचा पुल 114 मीटर ऊँचा है — यह दिल्ली के कुतुबमीनार से भी 42 मीटर अधिक है।

इसके अतिरिक्त, रेल लाइन 45 सुरंगों से होकर गुजरती है, जो कुल मिलाकर लगभग 16 किलोमीटर तक फैली हुई हैं। रेल कॉरिडोर बैराबी (दक्षिणी असम से संपर्क बिंदु) से आगे चार नए विकसित स्टेशनों — हॉर्टोकी, कॉनपुई, मुआलखांग और सैरांग — को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ता है।

एक साल में यात्री सेवा का हिसाब

अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में इन ट्रेन सेवाओं ने 1,100 से अधिक ट्रिप पूरे किए हैं। इस अवधि में 15 लाख से अधिक यात्री इन सेवाओं का उपयोग कर चुके हैं और भारतीय रेलवे को ₹54 करोड़ की टिकट बिक्री प्राप्त हुई है। सैरांग रेलवे स्टेशन ने अकेले 5.54 लाख से अधिक यात्री आवाजाही सँभाली है, जो प्रतिदिन औसतन 3,300 यात्री के बराबर है।

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब पीढ़ियों से मिजोरम के दुर्गम भूभाग के कारण लंबी दूरी की यात्रा पूरी तरह सड़क परिवहन पर निर्भर थी — जो समय लेने वाली, असुविधाजनक और अविश्वसनीय थी।

राष्ट्रीय राजधानी से पहला सीधा रेल संपर्क

तीन महत्वपूर्ण लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएँ अब मिजोरम को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ती हैं। सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस ने मिजोरम को नई दिल्ली के साथ पहला सीधा प्रीमियम रेल संपर्क दिया। गुवाहाटी और कोलकाता की सेवाओं ने पूर्वी और उत्तरी भारत के प्रमुख शैक्षिक, वाणिज्यिक और चिकित्सा केंद्रों से विश्वसनीय कनेक्टिविटी स्थापित की।

इसके अलावा, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जनवरी 2026 में सैरांग-सिलचर पैसेंजर ट्रेन सेवा का उद्घाटन किया, जिसने सैरांग को दक्षिणी असम से एक नियमित और भरोसेमंद यात्री सेवा से जोड़ा।

माल परिवहन में बदलाव

यात्री सेवाओं के अतिरिक्त, बैराबी-सैरांग रेल लाइन ने मिजोरम में माल ढुलाई को भी बदल दिया है। आवश्यक वस्तुएँ, ऑटोमोबाइल और निर्माण सामग्री अब सुरक्षित, समयबद्ध और किफायती तरीके से आइजोल तक पहुँच रही हैं। गौरतलब है कि इससे पहले सड़क परिवहन की अनिश्चितता के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होती थी।

सामुदायिक प्रभाव और आगे की राह

अधिकारियों ने बताया कि सैरांग रेलवे स्टेशन सिर्फ यातायात का केंद्र नहीं बना — स्थानीय निवासी स्टेशन परिसर के आसपास वृक्षारोपण और पर्यावरण पहल भी कर रहे हैं, जो इसे सामुदायिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। रेलवे के अनुसार, यह लाइन मिजोरम में पर्यटन को बढ़ावा देने, बाजार तक पहुँच सुलभ करने और नई आर्थिक संभावनाओं के द्वार खोलने का काम कर रही है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक एकीकरण प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह कनेक्टिविटी मिजोरम की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव ला रही है या केवल यात्री आँकड़े बढ़ा रही है। पूर्वोत्तर के अन्य रेल विस्तारों का अनुभव बताता है कि बुनियादी ढाँचे का लाभ तभी टिकाऊ होता है जब स्थानीय उद्यमिता, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स और पर्यटन नीति साथ चले। माल ढुलाई के आँकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं — यह रिक्तता बताती है कि आर्थिक प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन अभी बाकी है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैराबी-सैरांग रेल लाइन क्या है और इसका उद्घाटन कब हुआ?
बैराबी-सैरांग रेल लाइन मिजोरम में 51.38 किलोमीटर लंबी पर्वतीय रेल परियोजना है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को किया था। यह पहली बार आइजोल को भारत के राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ती है।
एक साल में कितने यात्रियों ने बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उपयोग किया?
उद्घाटन के एक वर्ष के भीतर 15 लाख से अधिक यात्रियों ने इन ट्रेन सेवाओं का उपयोग किया है। सैरांग रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 3,300 यात्री आते हैं और कुल 5.54 लाख यात्री आवाजाही दर्ज की गई है।
मिजोरम से कौन-सी ट्रेनें अब दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता के लिए चलती हैं?
सैरांग-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस मिजोरम को नई दिल्ली से सीधे जोड़ती है — यह राज्य का पहला प्रीमियम रेल संपर्क है। इसके अलावा गुवाहाटी और कोलकाता के लिए भी सेवाएँ चल रही हैं, तथा जनवरी 2026 में सैरांग-सिलचर पैसेंजर ट्रेन शुरू की गई।
बैराबी-सैरांग रेल लाइन को इंजीनियरिंग चमत्कार क्यों कहा जाता है?
इस लाइन में 153 पुल (55 बड़े, 88 छोटे) और 45 सुरंगें हैं जो लगभग 16 किलोमीटर तक फैली हैं। सबसे ऊँचा पुल 114 मीटर है, जो दिल्ली के कुतुबमीनार से 42 मीटर अधिक ऊँचा है — यह मिजोरम के अत्यंत दुर्गम पहाड़ी भूभाग में निर्माण की कठिनाई को दर्शाता है।
मिजोरम में माल परिवहन पर रेल लाइन का क्या असर पड़ा है?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक वस्तुएँ, ऑटोमोबाइल और निर्माण सामग्री अब सुरक्षित, समयबद्ध और किफायती तरीके से आइजोल तक पहुँच रही हैं। इससे पहले सड़क परिवहन पर पूर्ण निर्भरता के कारण आपूर्ति अनिश्चित और महँगी थी।
राष्ट्र प्रेस
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