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गणेश चतुर्थी पर भाग्यश्री की पर्यावरण अपील: 'गोमय गणेश चुनें, प्रकृति को कुछ लौटाएं'

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गणेश चतुर्थी पर भाग्यश्री की पर्यावरण अपील: 'गोमय गणेश चुनें, प्रकृति को कुछ लौटाएं'

सारांश

भाग्यश्री ने गणेश चतुर्थी पर इंस्टाग्राम के ज़रिये बड़ा संदेश दिया — 90% श्रद्धालु अभी भी पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली पीओपी मूर्तियाँ लाते हैं। उनका सुझाव है गोमय गणेश, जो विसर्जन के बाद बगीचे में खाद बन जाता है और प्रकृति को कुछ लौटाता है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री भाग्यश्री ने गणेश चतुर्थी 2026 पर इंस्टाग्राम के ज़रिये पर्यावरण अनुकूल गणपति की मूर्ति अपनाने की अपील की।
उनके अनुसार आज भी करीब 90 प्रतिशत लोग पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से बनी मूर्तियाँ घर लाते हैं।
गोमय गणेश गाय के गोबर और प्राकृतिक मिट्टी से बनती है; विसर्जन के बाद बगीचे की मिट्टी में रखने पर यह प्राकृतिक खाद में बदल जाती है।
भाग्यश्री ने गोबर के पारंपरिक और वैज्ञानिक उपयोग का हवाला देते हुए इस विकल्प को पोषणदायक और परंपरा-सम्मत बताया।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब गणेश विसर्जन के दौरान जल प्रदूषण को लेकर विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों की चिंता हर साल बढ़ती जा रही है।

अभिनेत्री भाग्यश्री ने गणेश चतुर्थी 2026 के अवसर पर मुंबई से एक पर्यावरण जागरूकता अपील जारी की है, जिसमें उन्होंने लोगों से पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) की बजाय गोमय गणेश की मूर्ति घर लाने का आग्रह किया है। 'मैंने प्यार किया' फेम इस अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में जानकारी दी कि आज भी करीब 90 प्रतिशत श्रद्धालु पीओपी से बनी मूर्तियाँ घर लाते हैं, जो विसर्जन के बाद जल और मृदा को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं।

क्या होता है गोमय गणेश

गोमय गणेश गाय के गोबर से निर्मित गणपति की मूर्ति होती है। इसे अक्सर मिट्टी या मुल्तानी मिट्टी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। यह पारंपरिक पीओपी मूर्तियों का एक ऐसा विकल्प है जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि विसर्जन के बाद भूमि को पोषण भी देता है।

भाग्यश्री ने बताया कि पूजा के उपरांत गोमय गणेश को घर के बगीचे की मिट्टी में रखा जा सकता है, जहाँ समय के साथ यह प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाता है और पौधों के विकास में सहायक बनता है।

अभिनेत्री ने क्या कहा

भाग्यश्री ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, 'इस गणेश चतुर्थी गोमय गणेश के साथ ऐसी परंपरा को चुनना चाहिए, जो विसर्जन के बाद भी प्रकृति को कुछ लौटाए।' उन्होंने आगे कहा कि गाय में देवी-देवताओं का वास माना जाता है और गाय से मिलने वाली हर चीज़ उपयोगी होती है।

अभिनेत्री ने परंपरा और विज्ञान के संगम की बात करते हुए कहा, 'पुराने जमाने में गाँवों के घरों में कीड़े-मकौड़ों से बचाव और साफ-सफाई के लिए गोबर का इस्तेमाल किया जाता था। आज भी गोबर का उपयोग खाद के रूप में होता है।'

परंपरा और पर्यावरण का संतुलन

भाग्यश्री ने स्पष्ट किया कि गोमय गणेश की अवधारणा इसी वैज्ञानिक सोच पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'ये न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि पर्यावरण के लिए पोषण देने वाला विकल्प भी है।' उनके अनुसार बगीचे में विसर्जन से मिट्टी और पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब पर्यावरण विशेषज्ञ और नगर पालिकाएँ हर साल गणेश विसर्जन के दौरान नदियों और समुद्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताती रही हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार और कई शहरी निकाय भी पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण अनुकूल गणपति अभियान चला रहे हैं।

आम जनता पर असर

भाग्यश्री की यह अपील सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की जा रही है। उनके जैसी著名 हस्तियों की आवाज़ इस जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाती है, क्योंकि उनके करोड़ों अनुयायी उनके सुझावों को गंभीरता से लेते हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाएँ तो विसर्जन के बाद जल प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

आने वाले वर्षों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि सेलिब्रिटी-नेतृत्व वाली ऐसी अपीलें पीओपी मूर्तियों की माँग को वास्तव में कम कर पाती हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सेलिब्रिटी-नेतृत्व वाली जागरूकता मुहिमें तब तक सीमित रहती हैं जब तक उनके पीछे ठोस आपूर्ति-श्रृंखला और सुलभ मूल्य न हो — गोमय गणेश अभी भी पीओपी मूर्तियों की तुलना में महँगी और कम उपलब्ध हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) वर्षों से इको-फ्रेंडली गणपति अभियान चला रही हैं, फिर भी पीओपी का दबदबा 90% बना हुआ है — यह नीतिगत विफलता का संकेत है, न केवल जन-जागरूकता की कमी। असली बदलाव तभी आएगा जब पीओपी मूर्तियों पर नियामक प्रतिबंध सख्त हों और इको-विकल्प किफायती दामों पर हर गली-मोहल्ले में मिलें।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोमय गणेश क्या होता है और यह साधारण मूर्ति से कैसे अलग है?
गोमय गणेश गाय के गोबर और प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणपति की मूर्ति होती है। यह पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से बनी मूर्तियों के विपरीत विसर्जन के बाद जल या मृदा को प्रदूषित नहीं करती, बल्कि बगीचे में खाद बनकर पौधों को पोषण देती है।
भाग्यश्री ने गणेश चतुर्थी पर क्या अपील की?
अभिनेत्री भाग्यश्री ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा कर लोगों से पीओपी मूर्तियों की जगह गोमय गणेश घर लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विकल्प परंपरा भी निभाता है और विसर्जन के बाद प्रकृति को नुकसान पहुँचाने की बजाय उसे कुछ लौटाता है।
पीओपी मूर्तियाँ पर्यावरण के लिए क्यों हानिकारक हैं?
पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) एक रासायनिक पदार्थ है जो पानी में आसानी से नहीं घुलता। विसर्जन के बाद यह नदियों, तालाबों और समुद्र में जमा होकर जलीय जीवन को नुकसान पहुँचाता है और जल प्रदूषण बढ़ाता है।
गोमय गणेश का विसर्जन कैसे करें?
भाग्यश्री के अनुसार पूजा के बाद गोमय गणेश को घर के बगीचे की मिट्टी में रखा जा सकता है। समय के साथ यह प्राकृतिक खाद में बदल जाता है, जिससे मिट्टी और पौधों को पोषण मिलता है।
क्या भारत में इको-फ्रेंडली गणपति का चलन बढ़ रहा है?
महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई महानगर पालिका जैसी संस्थाएँ वर्षों से इको-फ्रेंडली गणपति अभियान चला रही हैं। हालाँकि भाग्यश्री के अनुसार अभी भी करीब 90 प्रतिशत श्रद्धालु पीओपी मूर्तियाँ ही लाते हैं, जो दर्शाता है कि जागरूकता अभी व्यापक पैमाने पर व्यवहार में नहीं बदली है।
राष्ट्र प्रेस
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