बैराबी-सैरांग रेल लाइन और कलादान परियोजना मिजोरम को बदल देगी: राज्यपाल वीके सिंह
सारांश
मुख्य बातें
मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह (सेवानिवृत्त) ने आइजोल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बैराबी–सैरांग रेलवे लाइन, उसके जोरिनपुई तक प्रस्तावित विस्तार और कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना को राज्य की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक संभावनाओं के लिए संभावित गेम-चेंजर करार दिया। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए मिजोरम को अभी से तैयारी करनी होगी।
रेलवे परियोजना: क्या है और कहाँ तक पहुँचेगी
दक्षिणी असम के पास बैराबी से आइजोल के निकट सैरांग तक फैली 51.38 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को आइजोल में किया था। यह मिजोरम को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से सीधे जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम था।
अब इस लाइन को मिजोरम के दक्षिणी छोर तक — जोरिनपुई तक — 200 किलोमीटर से अधिक विस्तारित करने की योजना है। यह विस्तार कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना से जुड़ेगा, जो आगे म्यांमार के पलेतवा और सित्तवे बंदरगाह तक संपर्क स्थापित करेगी — जिससे भारत के पूर्वोत्तर को हिंद महासागर तक एक वैकल्पिक व्यापार मार्ग मिल सकता है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
राज्यपाल ने मिजोरम की पर्यटन क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा, 'हमारे खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य, समृद्ध संस्कृति, संगीत, भोजन और गर्मजोशी से भरा आतिथ्य पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखते हैं।' उन्होंने स्वच्छ शहरों, प्रशिक्षित आतिथ्य कर्मियों, गाइडों, होमस्टे और गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पादों की व्यवस्था को अनिवार्य बताया।
उन्होंने बाज़ार संपर्क को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा, 'हमें मज़बूत बाज़ार संपर्क स्थापित करना होगा, ताकि हमारे कृषि उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद और अन्य स्थानीय उत्पाद पूरे भारत के बाज़ारों तक पहुँच सकें।'
युवाओं से राष्ट्रीय-वैश्विक प्रतिस्पर्धा का आह्वान
राज्यपाल वीके सिंह ने मिजो युवाओं से सीमित दायरे से बाहर निकलकर राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर खुद को साबित करने का आग्रह किया। उन्होंने सिविल सेवाओं, IIT, IIM, चिकित्सा संस्थानों, रक्षा सेवाओं और उभरते नए पेशों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
उनके शब्दों में, 'हमारे युवाओं में बाहर जाकर प्रतिस्पर्धा करने और सफलता हासिल करने का आत्मविश्वास होना चाहिए तथा उन्हें अपना ज्ञान और अनुभव वापस मिजोरम में लाना चाहिए।'
सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की चेतावनी
विकास की चर्चा के साथ-साथ राज्यपाल ने यह भी आगाह किया कि इसकी कीमत मिजोरम की विशिष्ट पहचान नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमारी संस्कृति, सामुदायिक भावना, पर्यावरण और सामाजिक मूल्य हमारी अनमोल संपत्तियाँ हैं, जिन्हें हमें संरक्षित रखना चाहिए।' यह संतुलन का आह्वान ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य तीव्र बुनियादी ढाँचे के विकास के बीच सांस्कृतिक क्षरण की चिंता से जूझ रहे हैं।
कार्यक्रम में कौन-कौन उपस्थित रहे
इस अवसर पर मुख्यमंत्री लालदुहोमा, पूर्व मुख्यमंत्री लाल थनहावला और जोरामथांगा, तथा राज्य विधानसभा अध्यक्ष लालबियाकजामा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। राज्य के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की इस मंच पर एकजुटता इन परियोजनाओं के प्रति व्यापक सहमति का संकेत देती है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी को रणनीतिक प्राथमिकता दे रही है — और मिजोरम इस बदलाव के केंद्र में खड़ा है।