बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन के एक साल पूरे, वैष्णव बोले — 'अनगिनत अवसरों के द्वार खुले'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 13 सितंबर 2026 को घोषणा की कि बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन को चालू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है और यह परियोजना मिजोरम के लिए अनगिनत अवसरों का प्रवेश द्वार साबित हो रही है। वैष्णव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट कर इस उपलब्धि को रेखांकित किया।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
51.38 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन ₹8,070 करोड़ से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुई है। इसके निर्माण में कुल 143 पुल और 45 सुरंगें शामिल हैं, जिनमें 55 बड़े पुल और 88 छोटे पुल हैं। इस परियोजना का सबसे ऊँचा पुल 114 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो इसे अपनी श्रेणी में एक इंजीनियरिंग उपलब्धि बनाता है।
यह रेललाइन असम की सीमा पर स्थित बैराबी को मिजोरम की राजधानी आइजोल के निकट स्थित सैरांग से जोड़ती है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में इसका निर्माण तकनीकी दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण था।
उद्घाटन और ऐतिहासिक महत्व
इस रेलवे लाइन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को किया था। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था, 'मिजोरम भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह राष्ट्र के लिए, विशेषकर मिजोरम के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। अब आइजोल भारत के रेलवे मानचित्र पर होगा।'
गौरतलब है कि इस परियोजना से पहले मिजोरम राज्य रेलवे नेटवर्क से व्यावहारिक रूप से कटा हुआ था। पहली बार सैरांग को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से सीधी रेल कनेक्टिविटी मिली है।
आम जनता पर असर
प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के दौरान कहा था कि यह परियोजना 'सिर्फ एक रेलवे नहीं, बल्कि परिवर्तन की जीवनरेखा है।' उन्होंने यह भी कहा था कि मिजोरम के किसान और व्यवसायी अब देश भर के अधिक बाज़ारों तक पहुँच सकेंगे, और लोगों को शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर अवसर मिलेंगे।
यह रेलवे लाइन पूर्वोत्तर भारत की अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की केंद्र सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
निर्माण में योगदान
प्रधानमंत्री ने उद्घाटन के अवसर पर उन इंजीनियरों और श्रमिकों का विशेष धन्यवाद किया था जिन्होंने इस परियोजना को कल्पना से वास्तविकता में बदला। दुर्गम पहाड़ी भूगोल, भारी वर्षा और भूस्खलन की चुनौतियों के बावजूद इसे पूरा करना एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है।
क्या होगा आगे
एक वर्ष की सफल संचालन अवधि के बाद यह देखा जाएगा कि यह रेलवे लाइन मिजोरम के आर्थिक और सामाजिक विकास में किस हद तक सहायक सिद्ध होती है। केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क के और विस्तार की योजनाओं पर भी कार्य कर रही है, जो इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मज़बूत करेगा।