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त्रिपुरा: 19 अनधिकृत रिहैब सेंटरों को शो-कॉज नोटिस, मरीज की मौत के बाद कार्रवाई

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त्रिपुरा: 19 अनधिकृत रिहैब सेंटरों को शो-कॉज नोटिस, मरीज की मौत के बाद कार्रवाई

सारांश

त्रिपुरा में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी की पोल खुल गई है — एक मरीज की कथित मारपीट के बाद मौत और 8 गिरफ्तारियों के बाद अब 19 अनधिकृत रिहैब सेंटरों को शो-कॉज नोटिस जारी हुए हैं। सवाल यह है कि ये सेंटर इतने समय तक बिना रजिस्ट्रेशन के कैसे चलते रहे।

मुख्य बातें

त्रिपुरा स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी ने 9 सितंबर 2026 को 19 अनधिकृत प्राइवेट रिहैब सेंटरों को शो-कॉज नोटिस जारी किए।
सभी सेंटरों पर मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 की धारा 65(1) के उल्लंघन का आरोप है।
स्वप्ना फाउंडेशन को अलग नोटिस; मरीज तुहिनसुभ्रा भट्टाचार्जी की कथित मारपीट के बाद मौत के मामले में मालिक शुभम बिस्वास समेत 8 लोग गिरफ्तार।
सभी संगठनों को 7 दिनों के भीतर जवाब देना अनिवार्य; असहयोग पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी।
त्रिपुरा में रिहैब सेंटरों के लिए अधिकारी द्वारा निर्धारित 12 नियमों का पालन अनिवार्य है।

त्रिपुरा के स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी ने राज्य के 19 अनधिकृत प्राइवेट रिहैबिलिटेशन सेंटरों को 9 सितंबर 2026 को 'शो-कॉज नोटिस' जारी किए, जो मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 के तहत अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के बिना संचालित हो रहे थे और तय गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं कर रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि यह कार्रवाई मरीजों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

दो अलग-अलग नोटिस, दो स्तरीय कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग ने 9 सितंबर को दो अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए। पहला नोटिस अगरतला के उजान अभयनगर स्थित 'स्वप्ना फाउंडेशन' को जारी किया गया, जिस पर आरोप है कि वह बिना वैध रजिस्ट्रेशन के मानसिक स्वास्थ्य और रिहैबिलिटेशन सेवाएं प्रदान कर रहा था। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया कि इस सेंटर में मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

दूसरे नोटिस में शेष 18 अन्य संगठनों को लक्षित किया गया, जो एक्ट की धारा 65(1) के उल्लंघन में बिना आवश्यक अनुमति के मानसिक रोग और नशा-मुक्ति से जुड़ी सेवाएं दे रहे थे। दोनों श्रेणियों के संगठनों को नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

कानूनी आधार और अनिवार्य मानक

मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 की धारा 65(1) के अनुसार, किसी भी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान या रिहैबिलिटेशन सेंटर को सक्षम अधिकारी से रजिस्ट्रेशन लिए बिना संचालित करना गैर-कानूनी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि त्रिपुरा में ऐसे सभी सेंटरों को अधिकारी द्वारा निर्धारित 12 नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

इन नियमों में सुरक्षा उपाय, खाने की गुणवत्ता, कमरे का न्यूनतम आकार, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं और बायोमेडिकल सुरक्षा जैसी अनिवार्य शर्तें शामिल हैं। विभाग के अनुसार, अनेक सेंटर इन बुनियादी मानकों का पालन करने में विफल रहे, जिससे मरीजों की सुरक्षा और अधिकारों के उल्लंघन की गंभीर आशंका उत्पन्न हुई।

स्वप्ना फाउंडेशन मामला: मरीज की मौत की पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब त्रिपुरा पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में एक युवक की कथित मारपीट के बाद हुई मौत के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 'स्वप्ना फाउंडेशन ड्रग डी-एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर' के मालिक शुभम बिस्वास और कई स्टाफ सदस्य शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, शहाना दास भट्टाचार्जी ने 16 अगस्त 2026 को एनसीसी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति तुहिनसुभ्रा भट्टाचार्जी — जिन्हें 9 अगस्त को उस सेंटर में भर्ती कराया गया था — के साथ वहाँ मारपीट की गई। उन्हें अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

चेतावनी और आगे की कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित संगठन सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं या जाँच में सहयोग नहीं करते, तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। यह प्रकरण राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और नशा-मुक्ति सेवाओं की निगरानी प्रणाली की कमज़ोरियों को उजागर करता है और यह देखना होगा कि अथॉरिटी इन सेंटरों के खिलाफ किस हद तक ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि निवारक — एक मरीज की जान जाने के बाद अथॉरिटी सक्रिय हुई, जो यह सवाल उठाता है कि निगरानी तंत्र पहले क्यों विफल रहा। मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 को लागू हुए लगभग एक दशक बीतने के बाद भी त्रिपुरा जैसे राज्यों में रजिस्ट्रेशन अनुपालन की स्थिति चिंताजनक है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये नोटिस केवल कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाएंगे, या इनके बाद वास्तविक बंदी और पुनर्गठन होगा। नशा-मुक्ति सेवाओं के क्षेत्र में अनियमित सेंटरों की समस्या त्रिपुरा तक सीमित नहीं — यह पूरे देश में एक ढांचागत विफलता को दर्शाती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा मेंटल हेल्थ अथॉरिटी ने किन सेंटरों को नोटिस जारी किया?
स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी ने 9 सितंबर 2026 को 19 अनधिकृत प्राइवेट रिहैबिलिटेशन सेंटरों को शो-कॉज नोटिस जारी किए, जो मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे। इनमें अगरतला के उजान अभयनगर स्थित स्वप्ना फाउंडेशन को अलग नोटिस और 18 अन्य संगठनों को एक संयुक्त नोटिस दिया गया।
स्वप्ना फाउंडेशन मामले में क्या हुआ?
स्वप्ना फाउंडेशन ड्रग डी-एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में 9 अगस्त 2026 को भर्ती कराए गए तुहिनसुभ्रा भट्टाचार्जी की कथित मारपीट के बाद मौत हो गई। उनकी पत्नी शहाना दास भट्टाचार्जी की शिकायत पर पुलिस ने सेंटर के मालिक शुभम बिस्वास समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया।
मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 के तहत रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी है?
एक्ट की धारा 65(1) के अनुसार, सक्षम अधिकारी से रजिस्ट्रेशन लिए बिना कोई भी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान या रिहैबिलिटेशन सेंटर चलाना गैर-कानूनी है। रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ 12 अनिवार्य नियमों का पालन करना भी जरूरी है, जिनमें सुरक्षा उपाय, खाने की गुणवत्ता और दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं।
नोटिस मिलने के बाद इन सेंटरों के पास कितना समय है?
सभी 19 संगठनों को नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर अपना जवाब देना अनिवार्य है। यदि वे संतोषजनक जवाब नहीं देते या जाँच में सहयोग नहीं करते, तो स्वास्थ्य विभाग ने एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी है।
त्रिपुरा में रिहैब सेंटरों के लिए कौन-से मानक अनिवार्य हैं?
त्रिपुरा में सभी मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों और रिहैब सेंटरों को अधिकारी द्वारा निर्धारित 12 नियमों का पालन करना होता है। इनमें सुरक्षा उपाय, खाने की गुणवत्ता, कमरे का न्यूनतम आकार, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं और बायोमेडिकल सुरक्षा प्रमुख हैं।
राष्ट्र प्रेस
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