त्रिपुरा में रेफरल मामले 80% घटे; सीएम माणिक साहा ने TTAADC क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज और नेत्र अस्पताल का ऐलान किया

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त्रिपुरा में रेफरल मामले 80% घटे; सीएम माणिक साहा ने TTAADC क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज और नेत्र अस्पताल का ऐलान किया

सारांश

त्रिपुरा में रेफरल मरीजों की संख्या 80% घटी — यह अकेले ही बड़ी उपलब्धि है। सीएम माणिक साहा ने TTAADC क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज, नेत्र अस्पताल और राज्य में चिकित्सा विश्वविद्यालय की घोषणा कर पूर्वोत्तर के स्वास्थ्य ढाँचे को नई दिशा देने का संकेत दिया है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा में इलाज के लिए राज्य से बाहर भेजे जाने वाले मरीजों की संख्या में 80% की कमी आई है।
माणिक साहा ने TTAADC क्षेत्र में नया मेडिकल कॉलेज और नेत्र अस्पताल स्थापित करने की घोषणा की।
राज्य में जल्द चिकित्सा विश्वविद्यालय और अतिरिक्त सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल बनाए जाएंगे।
153 नर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति हो चुकी है; 100 और पदों पर भर्ती शीघ्र होगी।
यह घोषणा 13 मई 2026 को अगरतला के रवींद्र शतवार्षिकी भवन में अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस समारोह में की गई।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने बुधवार, 13 मई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की नीति के चलते इलाज के लिए राज्य से बाहर भेजे जाने वाले मरीजों की संख्या में 80 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने यह बात अगरतला के रवींद्र शतवार्षिकी भवन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस समारोह के उद्घाटन अवसर पर कही।

मुख्य घोषणाएँ

स्वास्थ्य विभाग का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री साहा ने कई बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं की रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने कहा कि राज्य में जल्द ही एक चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा, इसके अलावा और भी सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल बनाए जाएंगे। त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) क्षेत्र में एक नया मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा, जिसके साथ ही एक नया नेत्र अस्पताल भी बनाया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर के कई राज्य विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों के पलायन की समस्या से जूझ रहे हैं।

नर्सिंग क्षेत्र में विस्तार

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नर्सिंग शिक्षा और रोज़गार के अवसरों का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने जानकारी दी कि 153 नर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है, जबकि 100 अन्य पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि नर्सिंग जनशक्ति की कमी पूर्वोत्तर भारत के स्वास्थ्य ढाँचे की एक पुरानी चुनौती रही है।

नर्सों की भूमिका और श्रद्धांजलि

समारोह में फ्लोरेंस नाइटिंगेल को श्रद्धांजलि देते हुए साहा ने उन्हें मानवीय सेवा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'नर्सों की वर्दी गर्व और जिम्मेदारी का प्रतीक है। वे जितनी अधिक चुनौतियों का सामना करती हैं, उतनी ही अधिक अनुभवी और कुशल बनती जाती हैं, जिससे उन्हें मरीजों का और भी अधिक विश्वास प्राप्त होता है।' मुख्यमंत्री ने नर्सों को चिकित्सा प्रणाली की रीढ़ बताते हुए उनके योगदान को अपरिहार्य करार दिया।

कोविड-19 से सबक

कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संकट के दौरान डॉक्टरों और नर्सों ने योद्धाओं की तरह समाज की सेवा की। स्वयं एक दंत सर्जन होने के नाते साहा ने स्वास्थ्यकर्मियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव किरण गित्ते, स्वास्थ्य निदेशक देबाश्री देबबर्मा, परिवार कल्याण एवं निवारक चिकित्सा निदेशक अंजन दास, चिकित्सा शिक्षा निदेशक एच.पी. शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आने वाले महीनों में प्रस्तावित परियोजनाओं की विस्तृत कार्य-योजना और समयसीमा की घोषणा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे स्वतंत्र डेटा से सत्यापित किया जाना अभी बाकी है — आधार वर्ष, माप-पद्धति और क्या यह कमी बेहतर सुविधाओं के कारण है या महँगे रेफरल से बचने की मजबूरी के कारण, यह स्पष्ट नहीं है। TTAADC क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की घोषणा दीर्घकालिक दृष्टि से सही दिशा में कदम है, क्योंकि आदिवासी बहुल इलाकों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा की पहुँच ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर रही है। हालाँकि, पूर्वोत्तर में ऐसी घोषणाओं और उनके ज़मीन पर क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रही है। असली कसौटी यह होगी कि इन परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन, भूमि अधिग्रहण और समयसीमा कब सार्वजनिक की जाती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में रेफरल मामलों में 80% की कमी कैसे आई?
मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के अनुसार, राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जिसके परिणामस्वरूप इलाज के लिए राज्य से बाहर भेजे जाने वाले मरीजों की संख्या में 80 प्रतिशत की कमी आई है। हालाँकि, इस दावे का विस्तृत डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है।
TTAADC क्षेत्र में नया मेडिकल कॉलेज कब स्थापित होगा?
सीएम साहा ने 13 मई 2026 को इसकी घोषणा की है, लेकिन स्थापना की सटीक समयसीमा और बजट का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। आने वाले महीनों में विस्तृत कार्य-योजना अपेक्षित है।
त्रिपुरा में नए नेत्र अस्पताल से किसे फायदा होगा?
प्रस्तावित नेत्र अस्पताल TTAADC क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा, जो मुख्यतः आदिवासी बहुल इलाका है। इससे उन मरीजों को सबसे अधिक लाभ होगा जिन्हें अब तक नेत्र रोग के उपचार के लिए अगरतला या राज्य से बाहर जाना पड़ता था।
त्रिपुरा में नर्सिंग भर्ती की क्या स्थिति है?
राज्य में 153 नर्सिंग कर्मियों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है और 100 अन्य पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में नर्सिंग शिक्षा और रोज़गार के अवसरों का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
त्रिपुरा में चिकित्सा विश्वविद्यालय की घोषणा क्यों महत्वपूर्ण है?
चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना से त्रिपुरा में उच्च चिकित्सा शिक्षा का ढाँचा मज़बूत होगा और राज्य के भीतर ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। पूर्वोत्तर भारत में ऐसी संस्था की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसके कारण छात्रों और मरीजों को बाहर जाना पड़ता था।
राष्ट्र प्रेस
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