क्या आरजीएचएस में अनियमितताएं साबित हुईं? चार दवा दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, दो निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) में अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद, राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। पिछले सप्ताह चार दवा दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और दो दुकानों को योजना से निलंबित किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, कुल छह दवा दुकानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। 14 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, जबकि संबंधित विभागों को पत्र भेजकर 19 आरजीएचएस कार्डधारकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव गायत्री राठौर ने कहा कि राज्य सरकार आरजीएचएस जैसी जन कल्याणकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या दुरुपयोग के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति अपनाती है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निरंतर उपाय किए जा रहे हैं, जिनमें एफआईआर दर्ज करना और तकनीकी हस्तक्षेप शामिल है।
राजस्थान राज्य स्वास्थ्य बीमा एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि भीलवाड़ा स्थित हरिकृष्णा मेडिकल स्टोर और सांवरिया फार्मा स्टोर के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के लिए एफआईआर दर्ज की गई है।
उन्होंने जानकारी दी कि अतिरिक्त औषधि नियंत्रक ने दोनों दुकानों के दवा लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। आरोप है कि इन दुकानों ने दवाओं और इंजेक्शनों की बेचने का झूठा दावा करके आरजीएचएस योजना के तहत धोखाधड़ी से भुगतान प्राप्त किया, जबकि उन्होंने कभी दवाएं खरीदी ही नहीं थीं। इस प्रकार उन्होंने लगभग 27 लाख रुपए की अवैध राशि प्राप्त की।
इसी तरह, नागौर जिले के रेन और जायल स्थित कॉन्फेड फार्मा स्टोर के खिलाफ भी आरजीएचएस के नुस्खों में हेरफेर और धोखाधड़ी से भुगतान प्राप्त करने के लिए एफआईआर दर्ज की गई है।
गंभीर अनियमितताओं से जुड़े मामलों में बीकानेर स्थित कॉन्फेड फार्मा स्टोर संख्या 6 और हनुमानगढ़ स्थित स्टोर संख्या 5 को आरजीएचएस योजना से निलंबित कर दिया गया है।