दुर्गा पूजा उद्घाटन राजनेताओं से नहीं, पद्म विजेताओं व समाजसेवियों से हो: दिलीप घोष
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि दुर्गा पूजा का उद्घाटन राजनेताओं की बजाय सामाजिक, शैक्षणिक और बौद्धिक क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तियों द्वारा कराया जाना बेहतर होगा। यह बयान इस मायने में उल्लेखनीय है कि घोष स्वयं एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती हैं।
घोष का स्पष्ट रुख
घोष ने कहा कि उनके अनुसार पद्म पुरस्कार विजेता दुर्गा पूजा के उद्घाटन के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी विशेष राजनीतिक निष्ठा से रहित उपलब्धि हासिल करने वाले लोग पूजा उद्घाटन के लिए सर्वोत्तम हैं।
घोष के शब्दों में, 'साधु-संतों जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक व्यक्तित्वों को भी उद्घाटन प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, कई ऐसे अज्ञात और गुमनाम व्यक्तित्व भी हैं जो दूरदराज के क्षेत्रों में जन कल्याण के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं। पूजा समितियाँ इन लोगों को भी शामिल कर सकती हैं और उनके द्वारा पूजा का उद्घाटन करवाकर उन्हें प्रसिद्धि दिला सकती हैं, क्योंकि वे समाज के लिए वास्तविक आदर्श हैं।'
भाजपा की पार्टी-आंतरिक सलाह
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य नेतृत्व ने पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों को सलाह दी है कि वे दुर्गा पूजा समितियों के मामलों में अत्यधिक हस्तक्षेप न करें और समिति के सदस्यों पर ही मामला छोड़ दें। घोष ने स्वयं कहा कि वे किसी भी ऐसे उद्घाटन समारोह में नहीं जाएँगे जो किसी राजनीतिक व्यक्ति से जुड़ा हो।
तृणमूल कांग्रेस पर आरोप
घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल के दौरान सत्ताधारी दल के नेताओं पर सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों पर एकाधिकार करने का आरोप लगता रहा है। उनके अनुसार, पूर्व मंत्रिमंडल के प्रभावशाली सदस्य एक ही समय में कई पूजा समितियों को नियंत्रित करते थे — जो उत्सव की धार्मिक और सामुदायिक भावना के विपरीत है।
खेल हस्तियों व समाजसेवियों की भागीदारी की वकालत
घोष ने प्रख्यात खेल हस्तियों को भी उद्घाटन में शामिल करने की वकालत की। उन्होंने BJP के निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी यह स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पूजा समितियों के साथ अपने संबंधों को सीमित रखें।
आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब दुर्गा पूजा 2026 की तैयारियाँ जोरों पर हैं और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों की पूजा आयोजनों में भूमिका हर साल बहस का विषय बनती है। घोष का यह बयान भाजपा की ओर से एक नई राजनीतिक-सांस्कृतिक रणनीति का संकेत दे सकता है — जहाँ दल धार्मिक आयोजनों से खुद को अलग दिखाने की कोशिश करता है और TMC पर राजनीतिकरण का आरोप मढ़ता है।