29 अगस्त 2026
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वीएचपी के दुर्गा पूजा सुझावों पर कुणाल घोष का पलटवार: 'पूजा बंगाल की सामाजिक एकता की पहचान'

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वीएचपी के दुर्गा पूजा सुझावों पर कुणाल घोष का पलटवार: 'पूजा बंगाल की सामाजिक एकता की पहचान'

सारांश

वीएचपी के दुर्गा पूजा संबंधी सुझावों पर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने सीधा पलटवार किया — बंगाल की पूजा पर बाहरी नियम थोपना न केवल परंपरा के खिलाफ है, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुँचा सकता है जो इस उत्सव की असली पहचान है।

मुख्य बातें

कुणाल घोष ने 29 अगस्त को कोलकाता में वीएचपी के दुर्गा पूजा सुझावों को खारिज किया।
घोष ने कहा कि पंडालों में मांसाहारी भोजन सामान्यतः नहीं परोसा जाता, नए निर्देश की जरूरत नहीं।
बंगाल की दुर्गा पूजा को यूनेस्को से विरासत का दर्जा मिला है — घोष ने इसे व्यापक सांस्कृतिक पहचान का प्रमाण बताया।
ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर को घोष ने राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया।
तौकीर आलम की हिरासत में कथित मारपीट पर घोष ने निष्पक्ष जाँच की माँग की; आलम एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती बताए जा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने 29 अगस्त को कोलकाता में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) द्वारा पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा को लेकर दिए गए सुझावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बंगाल की सामाजिक सद्भावना, सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक जीवन का अभिन्न अंग है। घोष के अनुसार, समाज के सभी वर्गों की भागीदारी ही इस उत्सव को बंगाल की विशिष्ट पहचान देती है।

मुख्य घटनाक्रम

घोष ने कहा कि दुर्गा पूजा एक बेहद संवेदनशील विषय है और इस पर बयान देते समय सावधानी बरती जानी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि सदियों से चली आ रही यह परंपरा अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही — पूजा के दौरान कपड़े, फूल, सजावट सामग्री और अन्य वस्तुओं की खरीद-बिक्री में विभिन्न समुदायों के लोग आर्थिक रूप से जुड़े होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूनेस्को द्वारा बंगाल की दुर्गा पूजा को विरासत का दर्जा मिलना इसकी व्यापक सांस्कृतिक पहचान को प्रमाणित करता है।

वीएचपी के सुझावों पर आपत्ति

वीएचपी की ओर से पंडालों में पारंपरिक पूजा और धार्मिक वातावरण बनाए रखने तथा मांसाहारी भोजन न परोसने जैसे सुझावों पर घोष ने कहा कि पंडालों में सामान्यतः मांसाहारी भोजन नहीं परोसा जाता और इस संबंध में किसी नए निर्देश की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म की विभिन्न परंपराओं में बलि जैसी प्रथाएँ भी रही हैं, इसलिए धार्मिक परंपराओं पर एकतरफा नियम थोपना उचित नहीं होगा। घोष ने चेतावनी दी कि यदि वीएचपी कार्यकर्ता पूजा समितियों पर दबाव बनाएंगे, तो इससे उत्सव के दौरान विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

थीम पंडाल और नई पीढ़ी का योगदान

घोष ने थीम आधारित पंडालों और कलात्मक सजावट का बचाव करते हुए कहा कि इन्होंने दुर्गा पूजा की खूबसूरती को और निखारा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई थीम पंडालों में भी माँ दुर्गा का पारंपरिक स्वरूप बनाए रखा जाता है। नई पीढ़ी, कलाकारों और नई कला शैलियों ने पूजा को एक अलग पहचान दी है, जो बंगाल की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का विस्तार है।

राजनीतिक मुद्दे और अन्य आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को घोष ने राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि टीएमसी न्यायालय के आदेशों का सम्मान करती है और कार्यक्रम के दौरान हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने का प्रयास किया गया। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय को लेकर कथित कानूनी नोटिस के सवाल पर घोष ने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है और संबंधित पक्ष ही बेहतर जानकारी दे सकता है।

हिरासत में कथित मारपीट का मुद्दा

घोष ने दावा किया कि तौकीर आलम को हिरासत में गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में इस प्रकार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। घोष ने स्वतंत्र जाँच की माँग करते हुए कहा कि हिरासत में किसी व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बंगाल की राजनीतिक संवेदनशीलता में इन्हें हस्तक्षेप के रूप में पढ़ा जाना स्वाभाविक है। दुर्गा पूजा यहाँ केवल आस्था नहीं — यह टीएमसी की राजनीतिक पहचान का भी केंद्र है, जो इसे हर साल करोड़ों रुपये की अनुदान राशि देती है। यह विवाद उस बड़े टकराव का हिस्सा है जिसमें भाजपा-संबद्ध संगठन बंगाल की सांस्कृतिक जमीन पर पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं और टीएमसी हर मोर्चे पर उन्हें रोकने की। असली सवाल यह है कि क्या धार्मिक उत्सवों पर इस तरह की राजनीतिक खींचतान अंततः उस सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाती है जिसका दावा दोनों पक्ष करते हैं।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीएचपी ने दुर्गा पूजा को लेकर क्या सुझाव दिए थे?
वीएचपी ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों में पारंपरिक पूजा-पद्धति और धार्मिक वातावरण बनाए रखने तथा मांसाहारी भोजन न परोसने जैसे सुझाव दिए थे। इन सुझावों को टीएमसी नेताओं ने बाहरी हस्तक्षेप बताते हुए खारिज किया है।
कुणाल घोष ने वीएचपी के सुझावों पर क्या कहा?
कुणाल घोष ने कहा कि पंडालों में मांसाहारी भोजन सामान्यतः नहीं परोसा जाता, इसलिए नए निर्देश की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू परंपराओं में विविधता है और एकतरफा नियम थोपना उचित नहीं होगा।
बंगाल की दुर्गा पूजा को यूनेस्को का दर्जा क्यों मिला है?
यूनेस्को ने बंगाल की दुर्गा पूजा को उसकी व्यापक सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक पहचान के कारण अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया है। घोष ने इसे थीम पंडालों और सामुदायिक भागीदारी की परंपरा के समर्थन में उद्धृत किया।
ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर पर टीएमसी का क्या रुख है?
कुणाल घोष ने ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि टीएमसी न्यायालय के आदेशों का सम्मान करती है और कार्यक्रम के दौरान हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने का प्रयास किया गया।
तौकीर आलम की हिरासत में कथित मारपीट का मामला क्या है?
कुणाल घोष ने दावा किया कि तौकीर आलम को पुलिस हिरासत में गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घोष ने इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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