CM योगी का निर्देश: 5 साल से लंबित राजस्व मामले प्राथमिकता से निपटाएं, 'तारीख पर तारीख' की प्रवृत्ति बदलनी होगी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 29 अगस्त को राजस्व न्यायालयों में वर्षों से अटके मामलों के समयबद्ध निस्तारण के कड़े निर्देश दिए। लखनऊ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों और फील्ड में तैनात पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिक की जमीन, संपत्ति और अधिकारों से जुड़े मामलों में अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'तारीख पर तारीख' की प्रवृत्ति हर हाल में बदलनी होगी।
राजस्व मामलों के निस्तारण पर मुख्य निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नायब तहसीलदार कोर्ट से लेकर राजस्व परिषद तक के न्यायालयों में 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित सभी राजस्व मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर नियोजित प्रयासों से निस्तारित कराया जाए। उन्होंने विशेष रूप से धारा 33 के अंतर्गत अविवादित वरासत के मामलों को मिशन मोड में निपटाने पर जोर दिया। बैठक में राजस्व परिषद की ओर से नामांतरण, सीमांकन, पैमाइश, अंश निर्धारण, वरासत, बंटवारा और भू-उपयोग से जुड़े मामलों की जिलावार स्थिति प्रस्तुत की गई। 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के लिहाज से शीर्ष 5 जिलों की स्थिति तथा प्रदेश में सबसे लंबे समय से लंबित शीर्ष 10 प्रकरणों की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी गई।
जनशिकायत निस्तारण में गुणवत्ता पर जोर
मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन तथा आईजीआरएस में प्राप्त जनशिकायतों के त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण के भी निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित होना चाहिए। समीक्षा में ऐसे प्रकरण सामने आए जहाँ मूल शिकायत के बजाय अन्य जानकारी के आधार पर निस्तारण किया गया या आवश्यक रिपोर्ट प्राप्त किए बिना ही प्रकरण बंद कर दिया गया।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिन मामलों में निस्तारण संतोषजनक नहीं है या गलत आख्या के आधार पर प्रकरण बंद किया गया है, उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संबंधित जिलाधिकारी अथवा पुलिस कप्तान को भेजकर 5 दिनों में स्पष्टीकरण माँगा जाए। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता शिकायतों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि आमजन की समस्या का वास्तविक और स्थायी समाधान करना है।
अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की समीक्षा
बैठक में 13 जुलाई से 23 अगस्त के बीच प्रदेश में अपराध की जनपदवार स्थिति का विश्लेषण भी किया गया। अपर पुलिस महानिदेशक, कानून-व्यवस्था ने बताया कि 13 से 19 जुलाई की तुलना में 17 से 23 अगस्त की अवधि में कुल एफआईआर की संख्या में 0.4 प्रतिशत, गंभीर अपराधों में 5.1 प्रतिशत, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में 3.9 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के विरुद्ध अपराधों में 11.2 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। मुख्यमंत्री ने अपराध नियंत्रण के लिए निरंतर सतर्कता और प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने महिला एवं बच्चों से संबंधित अपराधों में विशेष सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। पुलिस जोन और रेंज स्तर पर साप्ताहिक क्राइम एनालिसिस करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला बीट पुलिस अधिकारियों की सक्रियता और क्षेत्र में उनकी उपस्थिति बढ़ाई जाए। छेड़खानी और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर कठोरतम कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
त्योहारों के लिए सुरक्षा तैयारियाँ
आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और गणेश चतुर्थी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस-प्रशासन को पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ तैयारियाँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए क्राउड कंट्रोल की विस्तृत कार्ययोजना पहले से तैयार करने को कहा गया। श्री बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन के साथ समन्वय कर अलग कार्ययोजना तैयार करने तथा होल्डिंग एरिया की व्यवस्था के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने वृंदावन में नया पुलिस सर्किल गठित कर आवश्यक पुलिस बल की तैनाती तथा मथुरा और वृंदावन के लिए अलग-अलग जॉइंट मजिस्ट्रेट की तैनाती के निर्देश दिए। गणेश चतुर्थी के बाद प्रतिमा विसर्जन के दौरान हाईटेंशन तारों से दुर्घटना की आशंका को देखते हुए प्रतिमाओं की ऊँचाई निर्धारित सीमा के भीतर रखने और नदियों के उफान पर होने के कारण विसर्जन स्थलों पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने के भी निर्देश दिए गए।
बाढ़ राहत और माफिया विरोधी अभियान
मुख्यमंत्री ने चित्रकूट, फर्रुखाबाद, अयोध्या, आजमगढ़ और बाराबंकी के जिलाधिकारियों से बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में लोगों को भरपेट और गरम भोजन मिले तथा राहत सामग्री की गुणवत्ता जिलाधिकारी स्वयं सुनिश्चित करें। जलभराव वाले क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव के लिए सभी अस्पतालों में एंटी-वेनम और एंटी-रेबीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा बाढ़ का पानी उतरने के बाद संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को कैंप लगाने के निर्देश दिए गए। लंपी डिजीज से बचाव के लिए पशुपालन विभाग को तत्काल आवश्यक कार्य शुरू करने को कहा गया। माफिया के खिलाफ अभियान, गो-तस्करी, धर्मांतरण, धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ तथा महापुरुषों की प्रतिमाओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर पुलिस-प्रशासन को 24×7 अलर्ट रहने के निर्देश भी दिए गए।