CM योगी के निर्देश पर राजस्व वादों के निस्तारण में लखनऊ अव्वल, अप्रैल में 3,37,708 मामले निपटाए
सारांश
Key Takeaways
उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग और जिलावार मासिक समीक्षा का ठोस असर सामने आया है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में 3,37,708 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें लखनऊ 18,861 मामले निपटाकर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने लगातार 16 माह से शीर्ष पाँच जिलों में अपनी जगह बनाए रखी है।
मुख्यमंत्री की पहल और रणनीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व विवादों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य जनता को त्वरित न्याय दिलाने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना है। इसी के तहत सभी जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। योगी सरकार हर माह जिलावार प्रदर्शन की समीक्षा करती है, जिससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बना है।
लखनऊ शीर्ष पर, प्रयागराज और बाराबंकी का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय
लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि अप्रैल में राजधानी में 18,861 मामले निस्तारित किए गए, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक हैं। इसके बाद प्रयागराज ने 12,036 मामले निपटाकर दूसरा और बाराबंकी ने 9,139 मामले निपटाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। आजमगढ़ ने 8,483 मामले निस्तारित कर चौथा और बरेली ने भी 8,483 मामले निपटाकर पाँचवाँ स्थान हासिल किया।
आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। नियमित समीक्षा बैठकें और अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों को निपटाया जा रहा है।
जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर का दबदबा
जौनपुर के जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि बोर्ड ऑफ रेवन्यू की आरसीसीएमएस रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पाँच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक 250 के सापेक्ष 535 मामलों का निस्तारण किया, जो 214 प्रतिशत की उपलब्धि है। जनपदीय न्यायालय में जौनपुर ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मानक 350 के सापेक्ष 370 मामले निपटाकर सुल्तानपुर दूसरे और मानक 190 के सापेक्ष 199 मामले निस्तारित कर गाजीपुर तीसरे स्थान पर रहा।
जिलाधिकारी न्यायालयों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
अप्रैल में जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के सापेक्ष 70 मामले निस्तारित कर 233.33 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो प्रदेश भर में सर्वाधिक है। मऊ के जिलाधिकारी न्यायालय ने 70 मामले निस्तारित कर दूसरा और मैनपुरी ने 58 मामले निपटाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि योगी सरकार की जवाबदेही-आधारित प्रशासन की नीति जमीनी स्तर पर परिणाम दे रही है। आने वाले महीनों में इस गति को बनाए रखना और पिछड़े जिलों को शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं के बराबर लाना सरकार की अगली बड़ी चुनौती होगी।