CM योगी के निर्देश पर राजस्व वादों के निस्तारण में लखनऊ अव्वल, अप्रैल में 3,37,708 मामले निपटाए

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CM योगी के निर्देश पर राजस्व वादों के निस्तारण में लखनऊ अव्वल, अप्रैल में 3,37,708 मामले निपटाए

सारांश

CM योगी आदित्यनाथ की मासिक जिलावार समीक्षा और सख्त मॉनीटरिंग का नतीजा — अप्रैल 2026 में उत्तर प्रदेश भर में 3,37,708 राजस्व मामले निपटाए गए। लखनऊ 18,861 मामलों के साथ प्रदेश में पहले और जौनपुर जनपद स्तरीय न्यायालयों में 214% उपलब्धि के साथ अव्वल रहा।

Key Takeaways

CM योगी आदित्यनाथ की मॉनीटरिंग के तहत अप्रैल 2026 में उत्तर प्रदेश में 3,37,708 राजस्व मामले निस्तारित किए गए। लखनऊ ने 18,861 मामले निपटाकर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया; प्रयागराज (12,036) दूसरे और बाराबंकी (9,139) तीसरे स्थान पर रहे। जौनपुर की पाँच राजस्व न्यायालयों ने मानक 250 के सापेक्ष 535 मामले निस्तारित कर 214% उपलब्धि दर्ज की। जौनपुर जिलाधिकारी न्यायालय ने मानक 30 के सापेक्ष 70 मामले निपटाकर 233.33% की उपलब्धि के साथ प्रदेश में शीर्ष स्थान पाया। जौनपुर लगातार 16 माह से जनपद स्तरीय न्यायालयों में शीर्ष पाँच जिलों में बना हुआ है।

उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग और जिलावार मासिक समीक्षा का ठोस असर सामने आया है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में 3,37,708 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें लखनऊ 18,861 मामले निपटाकर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने लगातार 16 माह से शीर्ष पाँच जिलों में अपनी जगह बनाए रखी है।

मुख्यमंत्री की पहल और रणनीति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व विवादों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य जनता को त्वरित न्याय दिलाने के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना है। इसी के तहत सभी जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। योगी सरकार हर माह जिलावार प्रदर्शन की समीक्षा करती है, जिससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बना है।

लखनऊ शीर्ष पर, प्रयागराज और बाराबंकी का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय

लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि अप्रैल में राजधानी में 18,861 मामले निस्तारित किए गए, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक हैं। इसके बाद प्रयागराज ने 12,036 मामले निपटाकर दूसरा और बाराबंकी ने 9,139 मामले निपटाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। आजमगढ़ ने 8,483 मामले निस्तारित कर चौथा और बरेली ने भी 8,483 मामले निपटाकर पाँचवाँ स्थान हासिल किया।

आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। नियमित समीक्षा बैठकें और अभियान चलाकर लंबित प्रकरणों को निपटाया जा रहा है।

जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर का दबदबा

जौनपुर के जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि बोर्ड ऑफ रेवन्यू की आरसीसीएमएस रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पाँच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक 250 के सापेक्ष 535 मामलों का निस्तारण किया, जो 214 प्रतिशत की उपलब्धि है। जनपदीय न्यायालय में जौनपुर ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मानक 350 के सापेक्ष 370 मामले निपटाकर सुल्तानपुर दूसरे और मानक 190 के सापेक्ष 199 मामले निस्तारित कर गाजीपुर तीसरे स्थान पर रहा।

जिलाधिकारी न्यायालयों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन

अप्रैल में जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के सापेक्ष 70 मामले निस्तारित कर 233.33 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो प्रदेश भर में सर्वाधिक है। मऊ के जिलाधिकारी न्यायालय ने 70 मामले निस्तारित कर दूसरा और मैनपुरी ने 58 मामले निपटाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि योगी सरकार की जवाबदेही-आधारित प्रशासन की नीति जमीनी स्तर पर परिणाम दे रही है। आने वाले महीनों में इस गति को बनाए रखना और पिछड़े जिलों को शीर्ष प्रदर्शनकर्ताओं के बराबर लाना सरकार की अगली बड़ी चुनौती होगी।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि 'निस्तारित' मामलों में से कितने वास्तव में न्यायपूर्ण और स्थायी रूप से हल हुए, और कितने महज तकनीकी रूप से बंद किए गए। मासिक रैंकिंग और मुख्यमंत्री समीक्षा की व्यवस्था जिलों में गति तो लाती है, पर यह दबाव गुणवत्ता की बजाय संख्या को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति भी पैदा कर सकता है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में राजस्व विवादों की पुरानी और गहरी जड़ें हैं — केवल डिजिटल प्रबंधन प्रणाली और प्रतिस्पर्धात्मक रैंकिंग से दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित नहीं होता। नागरिक संतुष्टि और अपील दर जैसे स्वतंत्र मापदंडों के बिना यह उपलब्धि अधूरी तस्वीर पेश करती है।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

CM योगी के राजस्व वाद निस्तारण अभियान में अप्रैल 2026 में क्या हासिल हुआ?
अप्रैल 2026 में उत्तर प्रदेश भर में कुल 3,37,708 राजस्व मामले निस्तारित किए गए। लखनऊ 18,861 मामलों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा।
आरसीसीएमएस (RCCMS) क्या है और यह कैसे काम करती है?
आरसीसीएमएस यानी राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली उत्तर प्रदेश सरकार की डिजिटल व्यवस्था है, जो राजस्व न्यायालयों में लंबित और निस्तारित मामलों की जिलावार ट्रैकिंग करती है। बोर्ड ऑफ रेवन्यू इसी प्रणाली के आधार पर मासिक रिपोर्ट जारी करता है।
जौनपुर जनपद स्तरीय राजस्व न्यायालयों में शीर्ष पर क्यों है?
जौनपुर की पाँच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के मानक 250 के सापेक्ष 535 मामले निस्तारित कर 214% की उपलब्धि दर्ज की। जिलाधिकारी न्यायालय ने भी मानक 30 के सापेक्ष 70 मामले निपटाकर 233.33% की दर हासिल की, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।
राजस्व वाद निस्तारण में शीर्ष पाँच जिले कौन से रहे?
अप्रैल 2026 में शीर्ष पाँच जिले क्रमशः लखनऊ (18,861), प्रयागराज (12,036), बाराबंकी (9,139), आजमगढ़ (8,483) और बरेली (8,483) रहे। जौनपुर 8,274 मामलों के साथ छठे स्थान पर रहा।
CM योगी की राजस्व मामलों की मॉनीटरिंग कैसे होती है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर माह जिलावार राजस्व मामलों की समीक्षा करते हैं और सभी जिलाधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। आरसीसीएमएस के माध्यम से डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
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