भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में तैनात किए 165 मतगणना पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षक
सारांश
Key Takeaways
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 2 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षकों और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की तैनाती की घोषणा की। यह कदम मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और कानून-व्यवस्था की कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
तैनाती का कानूनी आधार
आयोग ने यह नियुक्तियाँ भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की हैं। इस अवधि में सभी पर्यवेक्षक आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे और सीधे आयोग के पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण में कार्य करेंगे। गौरतलब है कि यह व्यवस्था उन 165 विधानसभा क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से की गई है जहाँ एक से अधिक मतगणना कक्ष हैं।
पुलिस पर्यवेक्षकों की भूमिका और सीमाएँ
तैनात 77 पुलिस पर्यवेक्षक अपने-अपने निर्धारित मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की निगरानी करेंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सुरक्षा व्यवस्था आयोग के निर्देशों के अनुरूप हो। हालाँकि, आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मतगणना के दिन पुलिस पर्यवेक्षक किसी भी परिस्थिति में मतगणना कक्ष के भीतर प्रवेश नहीं करेंगे। वे मतगणना पर्यवेक्षकों और अन्य चुनाव तंत्र के साथ घनिष्ठ समन्वय में कार्य करेंगे।
प्रवेश और पहचान की डिजिटल व्यवस्था
मतगणना केंद्रों में प्रवेश के लिए ECINET के एक विशेष मॉड्यूल के माध्यम से QR कोड-आधारित फोटो आईडी जारी की जाएगी। रिटर्निंग ऑफिसर (RO), मतगणना कर्मियों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों को इसी प्रणाली से पहचान पत्र प्राप्त होंगे। इसके अतिरिक्त, मतगणना पर्यवेक्षक और रिटर्निंग ऑफिसर को छोड़कर किसी भी व्यक्ति को मतगणना हॉल के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
पारदर्शिता के लिए फॉर्म 17सी और सूक्ष्म-पर्यवेक्षण
कंट्रोल यूनिट से प्राप्त गिनती परिणामों वाला फॉर्म 17सी-दो गिनती पर्यवेक्षकों द्वारा गिनती एजेंटों की उपस्थिति में तैयार किया जाएगा और हस्ताक्षर के लिए उन्हें सौंपा जाएगा। प्रत्येक टेबल पर तैनात सूक्ष्म-पर्यवेक्षक प्रत्येक दौर के अंत में कंट्रोल यूनिट डिस्प्ले से परिणाम स्वतंत्र रूप से नोट करेंगे और सत्यापन के लिए गिनती पर्यवेक्षक को सौंप देंगे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा और निष्पक्षता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, जिससे यह बहु-स्तरीय निगरानी ढाँचा विशेष महत्व रखता है।